{"_id":"621b3b7685c4a11cee453023","slug":"russia-ukraine-war-reached-poland-border-by-walking-35-km-to-return-to-india","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Russia Ukraine war: वतन वापसी के लिए 35 किमी पैदल चल पोलैंड बॉर्डर पहुंचे, आयुष पाल ने बताए वहां के भयावह हालात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Russia Ukraine war: वतन वापसी के लिए 35 किमी पैदल चल पोलैंड बॉर्डर पहुंचे, आयुष पाल ने बताए वहां के भयावह हालात
Sun, 27 Feb 2022 02:21 PM IST
शिखा पांडेय
दिव्यांश सिंह, कानपुर
दिव्यांश सिंह, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 27 Feb 2022 02:21 PM IST
सार
टर्नोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस थर्ड ईयर के छात्र आयुष ने बताया कि उनके शहर से 50-60 किमी दूर धमाके हो रहे थे। दो दिन पहले रेड अलर्ट घोषित किया गया तो बंकर में रहकर रात गुजारी।
विज्ञापन
पोलैंड बॉर्डर पर खड़े भारतीय छात्र
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वतन वापसी के लिए हम लोगों को पोलैंड बार्डर पहुंचने को कहा गया। शुक्रवार सुबह बस से निकले तो रात में पोलैंड बार्डर से 35 किमी पहले ही रोक दिया गया। हम करीब 50 साथी 35 किलोमीटर पैदल चलकर बार्डर पहुंचे। यहां देखा तो 400-500 भारतीय छात्र पहले से जमा थे।
अन्य देशों के छात्रों को तो भेजा जा रहा था, लेकिन भारतीयों की सुनने वाला कोई नहीं है। हम भूखे-प्यासे वहीं रुके हैं। माइनस तीन डिग्री तापमान में कई की तबीयत भी बिगड़ गई है। शनिवार को गुरुसहायगंज के आयुष पाल ने मोबाइल पर हुई बातचीत के दौरान वहां की भयावहता बया की। कहा कि बहुत डर लग रहा है।
आसपास एंबुलेंस और सेना की हूटर बजाती गाड़ियों की आवाज सुनकर दिल दहल जाता है। टर्नोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस थर्ड ईयर के छात्र आयुष ने बताया कि उनके शहर से 50-60 किमी दूर धमाके हो रहे थे। दो दिन पहले रेड अलर्ट घोषित किया गया तो बंकर में रहकर रात गुजारी। खाने को कुछ नहीं था, केवल जूस था।
विज्ञापन
विज्ञापन
अन्य देशों के छात्रों को तो भेजा जा रहा था, लेकिन भारतीयों की सुनने वाला कोई नहीं है। हम भूखे-प्यासे वहीं रुके हैं। माइनस तीन डिग्री तापमान में कई की तबीयत भी बिगड़ गई है। शनिवार को गुरुसहायगंज के आयुष पाल ने मोबाइल पर हुई बातचीत के दौरान वहां की भयावहता बया की। कहा कि बहुत डर लग रहा है।
विज्ञापन
आसपास एंबुलेंस और सेना की हूटर बजाती गाड़ियों की आवाज सुनकर दिल दहल जाता है। टर्नोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस थर्ड ईयर के छात्र आयुष ने बताया कि उनके शहर से 50-60 किमी दूर धमाके हो रहे थे। दो दिन पहले रेड अलर्ट घोषित किया गया तो बंकर में रहकर रात गुजारी। खाने को कुछ नहीं था, केवल जूस था।
विज्ञापन
Trending Videos
बस किसी तरह अपने देश लौट आने की तमन्ना
कन्नौज की रहने वाली अलका पाल ने बताया कि हम भूखे हैं, तबीयत भी खराब है लेकिन हमारी तकलीफ पूछने वाला कोई नहीं हैं। हमारे शहर में रूस की सेना ने नेवी का बेस तबाह कर दिया है। धमाकों की आवाजें कानों में गूंज रहीं हैं। अब हम अब किसी तरह अपने देश सकुशल आना चाहते हैं।
कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि ऐसे मंजर का गवाह बनना पड़ेगा। अब तो फोन भी डिस्चार्ज होने वाला है। ऐसे में घर वालों से कैसे बात होगी, इसका भी पता नहीं है। इनके साथ गोरखपुर के अभिनव यादव, वाराणसी के दिव्या श्रीवास्तव के साथ कई भारतीय छात्र हैं।
कन्नौज की रहने वाली अलका पाल ने बताया कि हम भूखे हैं, तबीयत भी खराब है लेकिन हमारी तकलीफ पूछने वाला कोई नहीं हैं। हमारे शहर में रूस की सेना ने नेवी का बेस तबाह कर दिया है। धमाकों की आवाजें कानों में गूंज रहीं हैं। अब हम अब किसी तरह अपने देश सकुशल आना चाहते हैं।
कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि ऐसे मंजर का गवाह बनना पड़ेगा। अब तो फोन भी डिस्चार्ज होने वाला है। ऐसे में घर वालों से कैसे बात होगी, इसका भी पता नहीं है। इनके साथ गोरखपुर के अभिनव यादव, वाराणसी के दिव्या श्रीवास्तव के साथ कई भारतीय छात्र हैं।
रूसी सेना ने एयरपोर्ट ध्वस्त कर दिया, शहर में घुस आई
नौबस्ता के रहने वाले डॉ. पीएस राजपूत का बेटा संकेत राजपूत यूक्रेन के ओडेशा शहर में है। उन्हें बेटे ने बताया कि यहां का माहौल बहुत खराब है। एयरपोर्ट को ध्वस्त कर दिया गया है। ब्लैक सी के जरिये रूसी की सेना ओडेशा आ गई है। बम और मिसाइल के धमाकों की आवाजें हर पल सुनाई देती हैं।
सरकार रोमानिया और पोलैंड सीमा पर आने को कह रही है। 400 किमी दूरी तय करने का कोई जरिया नहीं हैं। संकेत ओडेशा नेशनल विवि से एमबीबीएस पांचवें साल के छात्र हैं। बताया कि भारत आना चाहते थे लेकिन कॉलेज के डीन ने कहा कि अनुपस्थित हुए तो साल खराब होगा। इस वजह से समय से देश नहीं लौट पाए। वे अपने दोस्तों के साथ फ्लैट में हैं। चार दिन पहले एक महीने का राशन ले आए थे।
नौबस्ता के रहने वाले डॉ. पीएस राजपूत का बेटा संकेत राजपूत यूक्रेन के ओडेशा शहर में है। उन्हें बेटे ने बताया कि यहां का माहौल बहुत खराब है। एयरपोर्ट को ध्वस्त कर दिया गया है। ब्लैक सी के जरिये रूसी की सेना ओडेशा आ गई है। बम और मिसाइल के धमाकों की आवाजें हर पल सुनाई देती हैं।
सरकार रोमानिया और पोलैंड सीमा पर आने को कह रही है। 400 किमी दूरी तय करने का कोई जरिया नहीं हैं। संकेत ओडेशा नेशनल विवि से एमबीबीएस पांचवें साल के छात्र हैं। बताया कि भारत आना चाहते थे लेकिन कॉलेज के डीन ने कहा कि अनुपस्थित हुए तो साल खराब होगा। इस वजह से समय से देश नहीं लौट पाए। वे अपने दोस्तों के साथ फ्लैट में हैं। चार दिन पहले एक महीने का राशन ले आए थे।