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Kanpur News: मल्टी सुपर स्पेशियलिटी एंड पीजीआई में रोबोट करेगा न्यूरो सर्जरी
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कानपुर। मल्टी सुपर स्पेशियलिटी एंड पीजीआई में अब रोबोट की मदद से न्यूरो सर्जरी की जाएगी। इसके लिए सोमवार को शासन की एक्यूपमेंट एप्रूवल कमेटी ने रोबोट और मोबाइल सीटी स्कैन मशीन खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस पहल से अस्पताल में न्यूरो सर्जरी की गुणवत्ता और सटीकता में सुधार की उम्मीद है। यहां हर साल करीब 1500 न्यूरो सर्जरी होती हैं।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि दोनों अत्याधुनिक उपकरणों के प्रस्ताव को पहले शासन को भेजा गया था जिसे अब स्वीकृति मिल चुकी है। जल्द ही इसके लिए बजट आवंटित होने की संभावना है और उपकरणों की स्थापना के बाद रोबोटिक न्यूरो सर्जरी की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। इससे हर साल हजारों मरीजों को लाभ मिलेगा।
न्यूरो सर्जरी विभाग के अध्यक्ष एवं मल्टी सुपर स्पेशियलिटी एंड पीजीआई के नोडल अधिकारी डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी प्रणाली और मोबाइल सीटी स्कैन मशीन दोनों की लागत लगभग 14-14 करोड़ रुपये है। सीटी और एमआरआई से प्राप्त इमेजिंग डेटा को रोबोट में फीड किया जाएगा जिसके आधार पर रोबोट न्यूरो सर्जन के साथ मिलकर जटिल ऑपरेशन करेगा।
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डॉ. सिंह ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें छोटे चीरे लगते हैं जिससे मरीज को कम दर्द होता है और रिकवरी तेजी से होती है। जटिलताओं की संभावना भी काफी कम हो जाती है।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि दोनों अत्याधुनिक उपकरणों के प्रस्ताव को पहले शासन को भेजा गया था जिसे अब स्वीकृति मिल चुकी है। जल्द ही इसके लिए बजट आवंटित होने की संभावना है और उपकरणों की स्थापना के बाद रोबोटिक न्यूरो सर्जरी की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। इससे हर साल हजारों मरीजों को लाभ मिलेगा।
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न्यूरो सर्जरी विभाग के अध्यक्ष एवं मल्टी सुपर स्पेशियलिटी एंड पीजीआई के नोडल अधिकारी डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी प्रणाली और मोबाइल सीटी स्कैन मशीन दोनों की लागत लगभग 14-14 करोड़ रुपये है। सीटी और एमआरआई से प्राप्त इमेजिंग डेटा को रोबोट में फीड किया जाएगा जिसके आधार पर रोबोट न्यूरो सर्जन के साथ मिलकर जटिल ऑपरेशन करेगा।
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डॉ. सिंह ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें छोटे चीरे लगते हैं जिससे मरीज को कम दर्द होता है और रिकवरी तेजी से होती है। जटिलताओं की संभावना भी काफी कम हो जाती है।