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Kanpur News: नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले छह गिरफ्तार

Wed, 18 Dec 2024 11:29 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 18 Dec 2024 11:29 PM IST
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Roadways bus collides with private bus and enters field, accident averted
इटावा। इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (आईफोरसी) से मिले संदिग्ध खातों की सूचना के बाद बसरेहर पुलिस ने छह साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी नौकरी दिलाने का झांसा दिलाकर लोगों के खाते खोलकर साइबर ठगी करते थे। ठगी के रुपयों को विभिन्न ऐप के माध्यम से यूएसडीटी (डिजिटल मुद्रा) में कंवर्ट करते थे।
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एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि डेढ़ माह पहले इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर लखनऊ से सूचना मिली थी कि जिले के तीन लोगों के खाते संदिग्ध पाए गए हैं। उनका डाटा लेकर साइबर पुलिस जांच में जुट गई थी। बुधवार सुबह साइबर व बसरेहर पुलिस ने तीन कार पर सवार छह लोगों को बसरेहर बाईपास के पास से गिरफ्तार किया। उनके पास से एक फर्जी नंबर प्लेट, 10 मोबाइल, दो लैपटॉप, दो आईपैड, दो पैन ड्राइव, चार एटीएम कार्ड, पांच फर्जी आधार कार्ड, तीन चेकबुक व दो सिम कार्ड बरामद हुए है।
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तीन आरोपी इकदिल थाना क्षेत्र के विकास कॉलोनी निवासी अंकित मिश्रा, बसरेहर थाना व कस्बा किल्ली रोड निवासी अभिषेक उर्फ अनुज व फ्रेंड्स कॉलोन थाना के शकुंतला नगर निवासी यश उर्फ मनु हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश के जिला ग्वालियर के थाना के महाराजपुर बाबा सारणपुर निवासी पवन राय, ग्वालियर जिले के थाना महाराजपुर के बीएल-04 डीडी नगर निवासी विशाल चौहान व ग्वालियर जिले के नारायाण बिहार काॅलोनी गोले का मंदिर के पास रहने वाला सूरज हैं। एसएसपी ने बताया कि इसमें बैंक कर्मचारियों की भी जांच होगी।
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पुलिस पूछताछ में बताया कि वह लोग कम पढ़े लिखे लोगों को मनरेगा, इंश्योरेंस कंपनी और पीडब्ल्यूडी में काम दिलाने का झांसा देकर उनके बैंक खाते खुलवा देते हैं। उनके खाते में लिंक मोबाइल नंबर, बैंक की चेकबुक और एटीएम कार्ड को ले लेते हैं। इससे वह बैंक खातों में लिंक मोबाइल नंबर से यूपीआई आईडी जनरेट करके टेलीग्राम पर बने एक ग्रुप में उस यूपीआई आईडी को भेज देते हैं। उस आईडी में जो साइबर फ्रॉड का पैसा आता है उसे एटीएम से निकालकर अपने साथियों के खातों में जमा कर देते हैं।



सात लोगों के खातों की यूपीआईडी भेजकर लोगों से अबतक 50 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी कर चुके हैं। ठगी के रुपये को विभिन्न एप के माध्यम से वॉलेट में डालते हैं। वॉलेट से एक यूएसडीटी (डिजिटल मुद्रा) लगभग 86 से 87 रुपये में खरीदते थे। उसे 105 रुपये में बेचकर क्रिप्टो करेंसी खरीदते हैं। इससे उन्हें 18 रुपये का और फायदा होता है। एक साल में 50 लाख यूएसडीटी (डिजिटल मुद्रा) बेचकर 15 लाख रुपये का फायदा किया है। खुलासा करने वाली टीम को एसएसपी ने 25 हजार रुपये का इनाम देकर पुरस्कृत किया है।
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