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पीएम मोदी के लिए गंगा बैराज पर पहली बार माइक्रो सरफेसिंग विधि से सड़क निर्माण
Sat, 14 Dec 2019 01:44 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 14 Dec 2019 01:44 PM IST
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पीएम मोदी के लिए माइक्रो सरफेसिंग विधि से सड़क का निर्माण
- फोटो : अमर उजाला
खराब मौसम के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूट की सड़क बनाने का रास्ता पीडब्ल्यू़डी ने खोज लिया। पीडब्ल्यूडी ने बारिश के दौरान भी गंगा बैराज से लेकर बैराज चौराहे तक माइक्रो सरफेसिंग विधि से सड़क का निर्माण शुक्रवार को करा दिया। इसके लिए लखनऊ से विशेष मशीन मंगवाकर यह सड़क बनवाई गई।
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के मुताबिक शहर में पहली बार इस विधि से सड़क बनाई गई है। इस विधि से सड़क निर्माण से न तो वायु प्रदूषण होता है और न ही सड़क की मोटाई बढ़ती है। मोटाई कम होने के कारण इसकी लागत भी कम आती है और मजबूती भी आम सड़क की तरह होती है।
पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता एसपी ओझा ने बताया कि बैराज की सड़कें निर्धारित मानकों के मुताबिक बनाई जाती हैं। इनकी मोटाई बढ़ने से तय डिजाइन में व्यवधान पड़ सकता है। शहर के वायु प्रदूषण, खराब मौसम और बैराज के मानकों को ध्यान में रखते हुए पहली बार माइक्रो सरफेसिंग विधि से सड़क बनवाई गई।
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इस विधि में कोल्ड इमल्शन (केमिकल का घोल) में डामर घोला जाता है। डामर गर्म न होने से वायु प्रदूषण भी नहीं होता। इस घोल में सीमेंट और गिट्टी मिलाई जाती है। विशेष मशीन से महज आधा से पौन इंच की मोटाई में डामर की परत बिछाई जाती है।
इस विधि से सड़क बनाने पर इसकी मोटाई नही बढ़ती है। ऐसी सड़कें जहां दरारें या साधारण गड्ढे है, वहां इसका इस्तेमाल किया जाता है। इमल्शन के कारण बारिश के दौरान भी यह सड़क बनाई जा सकती है। इसकी मजबूती भी आम सड़कों की तरह ही होती है।
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पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के मुताबिक शहर में पहली बार इस विधि से सड़क बनाई गई है। इस विधि से सड़क निर्माण से न तो वायु प्रदूषण होता है और न ही सड़क की मोटाई बढ़ती है। मोटाई कम होने के कारण इसकी लागत भी कम आती है और मजबूती भी आम सड़क की तरह होती है।
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पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता एसपी ओझा ने बताया कि बैराज की सड़कें निर्धारित मानकों के मुताबिक बनाई जाती हैं। इनकी मोटाई बढ़ने से तय डिजाइन में व्यवधान पड़ सकता है। शहर के वायु प्रदूषण, खराब मौसम और बैराज के मानकों को ध्यान में रखते हुए पहली बार माइक्रो सरफेसिंग विधि से सड़क बनवाई गई।
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इस विधि में कोल्ड इमल्शन (केमिकल का घोल) में डामर घोला जाता है। डामर गर्म न होने से वायु प्रदूषण भी नहीं होता। इस घोल में सीमेंट और गिट्टी मिलाई जाती है। विशेष मशीन से महज आधा से पौन इंच की मोटाई में डामर की परत बिछाई जाती है।
इस विधि से सड़क बनाने पर इसकी मोटाई नही बढ़ती है। ऐसी सड़कें जहां दरारें या साधारण गड्ढे है, वहां इसका इस्तेमाल किया जाता है। इमल्शन के कारण बारिश के दौरान भी यह सड़क बनाई जा सकती है। इसकी मजबूती भी आम सड़कों की तरह ही होती है।