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नीदरलैंड की जियोक्रीट तकनीक से बनी सड़क हुई खस्ताहाल
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नीदरलैंड जियोक्रीट तकनीक से बनी मंगलपुर-रसूलाबाद सड़क में गड्ढ़े।
- फोटो : AKBARPUR
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झींझक (कानपुर देहात)। मंगलपुर से रसूलाबाद तक नीदरलैंड जियोक्रीट तकनीकी से बनी सड़क पर एक साल में ही जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। इससे लोगों को आवागमन में काफी दिक्कत हो रही है।
अक्तूबर 2016 में मंगलपुर से रसूलाबाद तक 20 किलोमीटर सड़क का निर्माण दिल्ली की कावा इंफाटेक कंपनी ने 32 करोड़ की लागत से नीदरलैंड की जियोक्रीट तकनीक से निर्माण शुरू कराया था। मई 2018 में काम पूरा हो गया था। इससे कन्नौज लोकसभा क्षेत्र के रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले मंगलपुर, मुड़ेरा, झींझक, जैतीपुर, किशौरा समेत सैकड़ों गांवों के लोगों को सहूलियत मिली थी।
इस तकनीकी की यह प्रदेश की पहली सड़क बनी थी। निर्माण के समय महाराष्ट्र के लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने यहां आकर सड़क निर्माण की विधि देखी थी। लगातार ओवरलोड ट्रकों के आवागमन से सड़क सुरासी, मुड़ेरा, किशौरा, मिंडाकुआ, झींझक समेत कई जगहों पर टूट गई है। बड़े-बड़े गड्डे हो गए हैं। इस कारण लोगों को आवागमन में समस्या का सामना करना पड़ रहा है। झींझक के मोनू दीक्षित, औरंगाबाद के राहुल सिंह का कहना है कि सड़क पर गड्ढों से चलना मुश्किल हो गया है।
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इस तकनीक से बनती
इस तकनीक से सड़क निर्माण में कम गिट्टी लगती है। पहले मशीन से पुरानी सड़क को खोदकर उसकी गिट्टी बारीक कर दी जाती है। इसके बाद सड़क में रोलर चलाया जाता है। फिर गिट्टी के ऊपर जियोक्रीट पाउडर और सीमेंट डालकर पानी से मिक्स कर दिया जाता है।
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अक्तूबर 2016 में मंगलपुर से रसूलाबाद तक 20 किलोमीटर सड़क का निर्माण दिल्ली की कावा इंफाटेक कंपनी ने 32 करोड़ की लागत से नीदरलैंड की जियोक्रीट तकनीक से निर्माण शुरू कराया था। मई 2018 में काम पूरा हो गया था। इससे कन्नौज लोकसभा क्षेत्र के रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले मंगलपुर, मुड़ेरा, झींझक, जैतीपुर, किशौरा समेत सैकड़ों गांवों के लोगों को सहूलियत मिली थी।
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इस तकनीकी की यह प्रदेश की पहली सड़क बनी थी। निर्माण के समय महाराष्ट्र के लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने यहां आकर सड़क निर्माण की विधि देखी थी। लगातार ओवरलोड ट्रकों के आवागमन से सड़क सुरासी, मुड़ेरा, किशौरा, मिंडाकुआ, झींझक समेत कई जगहों पर टूट गई है। बड़े-बड़े गड्डे हो गए हैं। इस कारण लोगों को आवागमन में समस्या का सामना करना पड़ रहा है। झींझक के मोनू दीक्षित, औरंगाबाद के राहुल सिंह का कहना है कि सड़क पर गड्ढों से चलना मुश्किल हो गया है।
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इस तकनीक से बनती
इस तकनीक से सड़क निर्माण में कम गिट्टी लगती है। पहले मशीन से पुरानी सड़क को खोदकर उसकी गिट्टी बारीक कर दी जाती है। इसके बाद सड़क में रोलर चलाया जाता है। फिर गिट्टी के ऊपर जियोक्रीट पाउडर और सीमेंट डालकर पानी से मिक्स कर दिया जाता है।