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कब उतरेगा लापरवाही का नशा!, कानून बदला फिर भी शराब पर मेहरबानी
Thu, 30 May 2019 10:34 AM IST
प्रशांत कुमार
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Thu, 30 May 2019 10:34 AM IST
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पीडीएफ पांच जून 2018
- फोटो : अमर उजाला
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मिलावटी शराब पीने से लोगों की मौत पर फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने कानून में बदलाव किया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को शराब में मिलावट की जांच के लिए नमूने भरकर जांचने का अधिकार दिया गया है। पूरे देश में यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल से लागू हो गई है। कई प्रदेशों में नमूने भरे जाने लगे हैं, लेकिन प्रदेश में नई व्यवस्था लागू कराने का आदेश प्रमुख सचिव स्तर पर लटका है।
मालूम हो कि बाराबंकी में मिलावटी शराब पीने से 16 लोगों की मौत हो गई है। इससे पहले कानपुर और कानपुर देहात में मिलावटी शराब से 25 लोगों की जान जा चुकी है। प्रदेश में आए दिन मिलावटी शराब पीने से लोगों की मौत पर ‘अमर उजाला’ सवाल उठाता रहा था कि गुणवत्ता परखने के लिए शराब के नमूने क्यों नहीं भरे जाते।
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मालूम हो कि बाराबंकी में मिलावटी शराब पीने से 16 लोगों की मौत हो गई है। इससे पहले कानपुर और कानपुर देहात में मिलावटी शराब से 25 लोगों की जान जा चुकी है। प्रदेश में आए दिन मिलावटी शराब पीने से लोगों की मौत पर ‘अमर उजाला’ सवाल उठाता रहा था कि गुणवत्ता परखने के लिए शराब के नमूने क्यों नहीं भरे जाते।
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नई व्यवस्था 1 अप्रैल से लागू भी कर दी गई है
इसके बाद पिछले साल एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 में इसका प्रावधान करने का फैसला लिया था। एल्कोहलिक ब्रेवरेज (एल्कोहल युक्त पेय पदार्थ) के नमूने भरने के मानक तय किए गए। इसके बाद एफएसएसएआई ने क्वालिटी कंट्रोल (गुणवत्ता नियंत्रण) की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को दे दी है। नई व्यवस्था 1 अप्रैल से लागू भी कर दी गई है।
अभिहित अधिकारी विजय प्रताप सिंह ने बताया कि हरियाणा, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र समेत कई प्रदेशों में यह कार्रवाई जारी है। प्रदेश में मुख्य सचिव स्तर पर अब फैसला लिया जाना है। तय किया जाना है कि आबकारी विभाग में ही इंस्पेक्टर को खाद्य सुरक्षा अधिकारी नामित करते हुए यह जिम्मेदारी दी जाए या खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से ही यह काम लिया जाए।
अभिहित अधिकारी विजय प्रताप सिंह ने बताया कि हरियाणा, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र समेत कई प्रदेशों में यह कार्रवाई जारी है। प्रदेश में मुख्य सचिव स्तर पर अब फैसला लिया जाना है। तय किया जाना है कि आबकारी विभाग में ही इंस्पेक्टर को खाद्य सुरक्षा अधिकारी नामित करते हुए यह जिम्मेदारी दी जाए या खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से ही यह काम लिया जाए।