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इस घटना को पढ़कर यही कहेंगे- 'कलयुग में भी जिंदा है ईमानदारी'
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 09 Aug 2017 08:25 PM IST
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रुपयों से भरा बैग मिलने के बाद अक्सर लोगों की नीयत डोल जाती है। हालांकि रंगकर्मी जब्बार अकरम ने रुपयों से भरे बैग को उसके मालिक तक पहुंचाकर इमानदारी की नजीर पेश की है। उन्नाव में मंगलवार शाम रंगकर्मी को उनकी दुकान के बाहर रुपयों से भरा बैग मिला था। जिसे उन्होंने बुधवार सुबह बुजुर्ग तक पहुंचा दिया। बैग मिलने की आस खो चुके बुजुर्ग को जब बैग मिला तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा।
बताते चलें कि कचहरी ओवरब्रिज के निकट स्वराज्य आश्रम के इंचार्ज सुभाष चंद्र शुक्ला मंगलवार शाम आश्रम को बंद करते समय अपना रुपयों से भरा बैग आश्रम के बाहर भूल गए थे। पास में ही काम करने वाले रंगकर्मी जब्बार अकरम को देर शाम बैग आश्रम के पास पड़ा मिला। जब उन्होंने बैग खोला तो उसमें बीस हजार रुपये व कुछ कागजात पड़े थे।
रुपयों से भरा बैग मिलते ही जब्बार ने उसे मालिक तक पहुंचाने की ठान ली थी। सभी कागजातों को जब उन्होंने देखा तो एक कागज में फोन नंबर उन्हें मिला। उन नंबरों पर फोन करने के बाद उन्हें बैग मालिक का पता मिला। जिस पर बुधवार सुबह उन्होंने बैग मालिक सुभाष चंद्र शुक्ला को उनके आश्रम पहुंच बैग लौटाया। खोया हुआ बैग पाकर सुभाष चहक उठे। सुभाष चंद्र शुक्ला का कहना था कि वह बैग मिलने की आस खो चुके थे।
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-रुपयों का बैग लौटा पेश की ईमानदारी की नजीर
-रंगकर्मी जब्बार अकरम को मंगलवार शाम दुकान के बाहर मिला था बैग
-बैग में थे बीस हजार रुपये, कागजात से बुजुर्ग बैग मालिक का लगाया पता
-दुकान पहुंचकर लौटाया बैग
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बताते चलें कि कचहरी ओवरब्रिज के निकट स्वराज्य आश्रम के इंचार्ज सुभाष चंद्र शुक्ला मंगलवार शाम आश्रम को बंद करते समय अपना रुपयों से भरा बैग आश्रम के बाहर भूल गए थे। पास में ही काम करने वाले रंगकर्मी जब्बार अकरम को देर शाम बैग आश्रम के पास पड़ा मिला। जब उन्होंने बैग खोला तो उसमें बीस हजार रुपये व कुछ कागजात पड़े थे।
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रुपयों से भरा बैग मिलते ही जब्बार ने उसे मालिक तक पहुंचाने की ठान ली थी। सभी कागजातों को जब उन्होंने देखा तो एक कागज में फोन नंबर उन्हें मिला। उन नंबरों पर फोन करने के बाद उन्हें बैग मालिक का पता मिला। जिस पर बुधवार सुबह उन्होंने बैग मालिक सुभाष चंद्र शुक्ला को उनके आश्रम पहुंच बैग लौटाया। खोया हुआ बैग पाकर सुभाष चहक उठे। सुभाष चंद्र शुक्ला का कहना था कि वह बैग मिलने की आस खो चुके थे।
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-रुपयों का बैग लौटा पेश की ईमानदारी की नजीर
-रंगकर्मी जब्बार अकरम को मंगलवार शाम दुकान के बाहर मिला था बैग
-बैग में थे बीस हजार रुपये, कागजात से बुजुर्ग बैग मालिक का लगाया पता
-दुकान पहुंचकर लौटाया बैग