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Kanpur: सेवानिवृत्त शिक्षक को डिजिटल अरेस्ट रख 25 लाख ठगे, आतंकवादियों के पास आधार कार्ड मिलने की बात कह डराया
Tue, 07 Jul 2026 11:19 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Tue, 07 Jul 2026 11:19 PM IST
सार
Kanpur News: सेवानिवृत्त शिक्षक को जम्मू में पकड़े गए आतंकवादियों के पास आधार कार्ड मिलने की बात कह डराया।
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डिजिटल अरेस्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दबौली निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक को पांच दिन डिजिटल अरेस्ट रखकर शातिरों ने 25 लाख रुपये ठग लिए। उन्होंने गोविंदनगर थाने और साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। दबौली निवासी राघव राम यादव वर्ष 2013 में गोविंदनगर स्थित खालसा इंटर कालेज से सेवानिवृत्त हुए थे। परिवार में पत्नी ऊषा मानसिक बीमार हैं। बड़ा बेटा अमित भोपाल में असिस्टेंट लाइब्रेरियन व छोटा बेटा रवि नोएडा में साफ्टवेयर इंजीनियर है जबकि बेटी अल्का शादीशुदा है।
राघव राम ने बताया कि 10 अप्रैल की शाम अनजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को एसपी बताते हुए कहा कि जम्मू में पकड़े गए आतंकवादियों के पास उनका आधार कार्ड मिला है। उनका गिरफ्तारी वारंट जारी हो गया है। परिजन को इसके बारे में बताने पर उन्हें भी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। इसके बाद पांच दिन तक वीडियो कॉल पर बंधक बनाकर रखा और बैंक खातों, जमा पूंजी और परिजन के बारे में पूछते रहे। बयान दर्ज कराने के लिए डीजीपी मुख्यालय लखनऊ बुलाया। उन्होंने असमर्थता जताई तो ऑनलाइन बयान दर्ज कराने को कहा।
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राघव राम ने बताया कि 10 अप्रैल की शाम अनजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को एसपी बताते हुए कहा कि जम्मू में पकड़े गए आतंकवादियों के पास उनका आधार कार्ड मिला है। उनका गिरफ्तारी वारंट जारी हो गया है। परिजन को इसके बारे में बताने पर उन्हें भी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। इसके बाद पांच दिन तक वीडियो कॉल पर बंधक बनाकर रखा और बैंक खातों, जमा पूंजी और परिजन के बारे में पूछते रहे। बयान दर्ज कराने के लिए डीजीपी मुख्यालय लखनऊ बुलाया। उन्होंने असमर्थता जताई तो ऑनलाइन बयान दर्ज कराने को कहा।
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अधिकारी की वर्दी पहने व्यक्ति ने केस से नाम हटाने के लिए महाराष्ट्र पुलिस एटीएस के नाम पर सिक्योरिटी सर्टिफिकेट बनवाने को सुरक्षा राशि जमा कराने के लिए कहा। उसने जांच पूरी होने पर ब्याज सहित धन वापस मिलने का भरोसा दिलाया। उन्होंने एफडी तुड़वाकर रकम बैंक आफ बड़ौदा खाते में जमा कराई और 15 अप्रैल को आरटीजीएस कर इंडसइंड बैंक के एक खाते में 25 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
ठगों ने 10 लाख रुपये की दूसरी एफडी भी तुड़वाने का दबाव बनाया तो उन्हें साइबर ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने कॉल के लिए आए मोबाइल नंबरों के आधार पर रिपोर्ट दर्ज करा दी। गोविंदनगर इंस्पेक्टर अशोक कुमार दुबे ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर जिन खातों में रकम गई है उनके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।