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UP: हत्या में सेवानिवृत्त जज की पत्नी व दो बेटों को आजीवन कारावास, ढाई-ढाई लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया
Wed, 14 May 2025 06:09 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर देहात
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर देहात
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 14 May 2025 06:09 PM IST
सार
Kanpur Dehat News: वर्ष 2007 में जमीन के सहन को लेकर हत्या की गई थी। कानपुर देहात के एडीजे-6 की अदालत में सुनवाई चल रही थी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
घाटमपुर कोतवाली क्षेत्र के बेहटा बुजुर्ग गांव में वर्ष 2007 में जमीन के सहन से निकास को लेकर हुए विवाद में सेवानिवृत्त जज के परिवार ने पारिवारिक भतीजे की धारदार हथियार से हमलाकर हत्या कर दी थी। इस मामले की सुनवाई एडीजे-6 की अदालत में चल रही थी। दोष सिद्ध होने के बाद बुधवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई। वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये दोषियों की पेशी कराई गई। अदालत ने सेवानिवृत्त जज की पत्नी, उनके दो बेटों को आजीवन कारावास की सजाई सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर ढाई-ढाई लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
एडीजीसी विवेक त्रिपाठी ने बताया कि कानपुर नगर में ई-ब्लॉक किदवई नगर में रहने वाले सेवानिवृत्त जज शिवबरन सिंह का अपने गांव घाटमपुर क्षेत्र के बेहटा बुजुर्ग में रहने वाले पारिवारिक भतीजे वीरेंद्र सिंह से मकान के निकास को लेकर विवाद चल रहा था। 29 अप्रैल 2007 को शिवबरन सिंह अपने परिवार के साथ शाम को गांव पहुंचे और यहां आने के बाद वीरेंद्र सिंह को गाली गलौज करते हुए फरसा, कुल्हाड़ी, तमंचा व लाठियों से उसपर हमला कर दिया। शोर सुनकर बचाने दौड़े वीरेंद्र सिंह के फौजी पुत्र नवनीत सिंह पर भी जानलेवा हमला किया गया। वह छुट्टी पर घर आया था। घटना में वीरेंद्र सिंह की मौत हो गई थी जब की नवनीत गंभीर रूप से घायल हो गया था।
मामले में वीरेंद्र सिंह के पुत्र विशाल सिंह ने शिवबरन सिंह व उसके बेटे यशोवर्धन व जयवर्धन, पत्नी नीलम व बहू शीलू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की विवेचना करते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में पेश किए थे। मामले की सुनवाई अपर जिला जज छह दुर्गेश की अदालत में चल रही थी। सुनवाई के दौरान शिवबरन सिंह की मौत हो जाने पर अन्य आरोपियों के खिलाफ मामले की सुनवाई जारी रही।
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अदालत ने नौ मई को सेवानिवृत्त जज की पत्नी नीलम देवी व दोनों पुत्र यशोवर्धन, जयवर्धन को दोषी ठहराया था। वहीं आरोपी शीलू को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया था। बुधवार को अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान आरोपियों की जेल से वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये पेशी कराई गई। दोनों पक्षों की दलीलों के बाद अदालत ने फैसला सुनाते हुए तीनों दोषियों नीलम देवी, यशोवर्धन व जयवर्धन को हत्या के अपराध में आजीवन कठोर कारावास व दो-दो लाख रुपये का अर्थदंड व हत्या के प्रयास में प्रत्येक को 10-10 साल का कठोर कारावास व 50-50 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। वहीं अर्थदंड की 75 प्रतिशत राशि मृतक के परिजन को बतौर प्रतिकर दिए जाने के आदेश दिए हैं।
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एडीजीसी विवेक त्रिपाठी ने बताया कि कानपुर नगर में ई-ब्लॉक किदवई नगर में रहने वाले सेवानिवृत्त जज शिवबरन सिंह का अपने गांव घाटमपुर क्षेत्र के बेहटा बुजुर्ग में रहने वाले पारिवारिक भतीजे वीरेंद्र सिंह से मकान के निकास को लेकर विवाद चल रहा था। 29 अप्रैल 2007 को शिवबरन सिंह अपने परिवार के साथ शाम को गांव पहुंचे और यहां आने के बाद वीरेंद्र सिंह को गाली गलौज करते हुए फरसा, कुल्हाड़ी, तमंचा व लाठियों से उसपर हमला कर दिया। शोर सुनकर बचाने दौड़े वीरेंद्र सिंह के फौजी पुत्र नवनीत सिंह पर भी जानलेवा हमला किया गया। वह छुट्टी पर घर आया था। घटना में वीरेंद्र सिंह की मौत हो गई थी जब की नवनीत गंभीर रूप से घायल हो गया था।
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मामले में वीरेंद्र सिंह के पुत्र विशाल सिंह ने शिवबरन सिंह व उसके बेटे यशोवर्धन व जयवर्धन, पत्नी नीलम व बहू शीलू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की विवेचना करते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में पेश किए थे। मामले की सुनवाई अपर जिला जज छह दुर्गेश की अदालत में चल रही थी। सुनवाई के दौरान शिवबरन सिंह की मौत हो जाने पर अन्य आरोपियों के खिलाफ मामले की सुनवाई जारी रही।
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अदालत ने नौ मई को सेवानिवृत्त जज की पत्नी नीलम देवी व दोनों पुत्र यशोवर्धन, जयवर्धन को दोषी ठहराया था। वहीं आरोपी शीलू को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया था। बुधवार को अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान आरोपियों की जेल से वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये पेशी कराई गई। दोनों पक्षों की दलीलों के बाद अदालत ने फैसला सुनाते हुए तीनों दोषियों नीलम देवी, यशोवर्धन व जयवर्धन को हत्या के अपराध में आजीवन कठोर कारावास व दो-दो लाख रुपये का अर्थदंड व हत्या के प्रयास में प्रत्येक को 10-10 साल का कठोर कारावास व 50-50 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। वहीं अर्थदंड की 75 प्रतिशत राशि मृतक के परिजन को बतौर प्रतिकर दिए जाने के आदेश दिए हैं।