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कानपुर हैलट में ब्लैक फंगस के पुष्ट रोगियों पर शोध शुरू, व्हाइट फंगस के मरीजों की भी जुटाई जाएगी हिस्ट्री
Wed, 26 May 2021 11:16 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Wed, 26 May 2021 11:16 AM IST
सार
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में आज से ब्लैक फंगस के पुष्ट रोगियों पर शोध शुरू हो जाएगा। इसके बाद व्हाइट फंगस के रोगियों की भी रिसर्च के लिए हिस्ट्री जुटाई जाएगी।
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हैलट में संक्रमण
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
कानपुर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग के पास अब तक ब्लैक और व्हाइट फंगस की जांच के लिए कुल 17 सैंपल आए हैं। चार रोगियों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हो गई है। बाकी सैंपल अभी जांच मशीन में लगाए गए हैं।
पैथोलॉजी विभाग ने रोगियों पर शोध शुरू कर दिया है। रोगियों के खानपान, काम, रहन-सहन और बीमारियों का ब्योरा दर्ज किया जा रहा है। पैथोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. महेंद्र सिंह ने बताया कि रोगियों में फंगल संक्रमण कैसे आया है, यह पता किया जा रहा है।
इसके साथ ही उनकी बीमारियों की हिस्ट्री ली जा रही है। एचआईवी, कैंसर, गुर्दा, डायबिटीज आदि बीमारियों के रोगियों में फंगल संक्रमण जल्दी हो जाता है। इस शोध में रोगियों का इलाज करने वाले क्लीनिशियन को भी शामिल किया गया। साथ ही माइक्रोबायोलॉजी विभाग से भी तालमेल बैठाया जा रहा है। पैथोलॉजी के साथ माइक्रोबायोलॉजी विभाग की जांच का भी अध्ययन किया जाएगा।
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पैथोलॉजी विभाग ने रोगियों पर शोध शुरू कर दिया है। रोगियों के खानपान, काम, रहन-सहन और बीमारियों का ब्योरा दर्ज किया जा रहा है। पैथोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. महेंद्र सिंह ने बताया कि रोगियों में फंगल संक्रमण कैसे आया है, यह पता किया जा रहा है।
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इसके साथ ही उनकी बीमारियों की हिस्ट्री ली जा रही है। एचआईवी, कैंसर, गुर्दा, डायबिटीज आदि बीमारियों के रोगियों में फंगल संक्रमण जल्दी हो जाता है। इस शोध में रोगियों का इलाज करने वाले क्लीनिशियन को भी शामिल किया गया। साथ ही माइक्रोबायोलॉजी विभाग से भी तालमेल बैठाया जा रहा है। पैथोलॉजी के साथ माइक्रोबायोलॉजी विभाग की जांच का भी अध्ययन किया जाएगा।
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