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Kanpur News: बाढ़ का पानी उतरने से राहत, घरों में लौटे 189 परिवार
Wed, 06 Aug 2025 01:03 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Wed, 06 Aug 2025 01:03 AM IST
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कानपुर देहात/मूसानगर। बाढ़ का पानी उतरने पर घरों की साफ-सफाई पर जोर है। मंगलवार को सिकंदरा तहसील के चार गांवों में सौ परिवार और भोगनीपुर तहसील में तीन गांवों के 89 परिवारों ने राहत शिविर छोड़ दिया। ये परिवार घरों में लौटे आए। हालांकि अभी भी इन दोनों तहसीलों के करीब 177 परिवार खुले में डेरा डाले हैं। घरों की सिल्ट सफाई कर परिवार भी एक दो दिन में शिफ्ट होंगे।
भोगनीपुर में 15 और सिकंदरा के 10 गांव बाढ़ से प्रभावित थे। अब यमुना नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है। मूसानगर गेज में यमुना जलस्तर खतरे के निशान से अब केवल 49 सेंटीमीटर ऊपर है। देर रात तक यह पानी उतर जाएगा और नदी जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ जाएगा। बाढ़ का पानी उतरने पर गांवों में कीचड़ और गंदगी से दिक्कतें बरकरार हैं। वहीं पिछले तीन दिन से रुक-रुक कर हो रही बारिश भी घरों से बाहर डेरा डाले परिवारों के लिए आफत बनी है। अधिकांश घरों से पानी पूरी तरह से उतर चुका है।
एसडीएम भोगनीपुर देवेंद्र कुमार ने बताया कि चपरघटा में 50 परिवार और क्योटरा -टयोगा में 39 परिवार राहत शिविर छोड़ कर घरों में शिफ्ट हो गए हैं। इधर सिकंदरा तहसील में बछाटी, जैसलपुर, महदेवा और बैजामऊ के करीब सौ परिवार राहत शिविर छोड़कर घरों में पहुंच गए हैं। अभी गोहानी व भुपैयापुर में करीब सौ परिवार छतों, खुले में ऊंचाई या फिर पड़ोसियों के यहां डेरा डाले हैं।
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जलस्तर कम होने के बाद नयापुरवा, क्योटरा बांगर, मुसरिया, बम्हरौली घाट, नगीना बांगर की पुलिया से आवागमन शुरू हो गया है। हालांकि आढन-पथार और पड़ाव में अभी भी नाव से आवागमन हो रहा है। आढन-पथार व पड़ाव की पुलिया डूबने से आढन-पथार, पड़ाव, रसूलपुर, चतुरीपुरवा, कुंभापुर, भुंडा आदि गांवों का संपर्क अभी भी टूटा है।
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घर के गिरने का सता रहा डर
बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब लोग घर गिरी की आशंका से डरे हैं। लोगों का कहना है कि पूरे घर लबालब हो गए थे। अब पानी उतरा है। करीब पांच दिन घरों में पानी भरा रहा। ऐसे में नींव में पानी घुसने और दीवार धंसने से घर गिरने का डर सता रहा है। वहीं रास्ते कीचड़ से पटे हैं। इससे आवाजाही में परेशानी हो रही है। आरोप लगाया कि प्रशासन से मदद के नाम पर लंच पैकेट कभी समय से नहीं मिले। एक बार मिले तो दूसरी बार कब मिलेंगे यह साफ नहीं रहा। बच्चों के लिए दूध, फल, नाश्ता आदि कभी नहीं बांटा गया। अब बाढ़ राहत सामग्री में राशन जरूर दिया जा रहा है।
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वर्जन.........
यमुना नदी का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। मूसानगर गेज में मंगलवार को दोपहर 2 बजे जलस्तर 107.49 मीटर दर्ज किया गया है। यह खतरे के निशान से केवल 49 सेंटीमीटर ऊपर है। देर रात तक जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ जाएगा। - अनिल गुप्ता, मूसानगर स्थल प्रभारी केंद्रीय जल आयोग
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लंच पैकेट दिए मगर बच्चों के लिए दूध-फल नहीं बांटा
बाढ़ का पानी तो गांव से कम हो गया, लेकिन तमाम समस्याओं को छोड़ गया है। गांव में चारों तरफ कीचड़ ही कीचड़ है। बाढ़ में आई सिल्ट घर से लेकर संपर्क मार्गों तक जमा हो गई है। फसल व चारा सब कुछ बर्बाद हो गया है। गृहस्थी कैसे चलेगी इसकी चिंता सता रही है। - रामबाबू, क्योटरा बांगर
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बाढ़ का पानी तो कम हो गया है। मगर समस्या अभी भी जस की तस है। बाढ़ के समय लंच पैकेट आए। बच्चों के लिए नाश्ता, दूध व फल आदि कभी नहीं दिया गया। इससे भी बच्चों को परेशानी रही। - राकेश कुमार, क्योटरा।
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जलस्तर घटने पर अब गांव किनारे पानी है। नाव से ही आवागमन हो रहा है। प्रशासन की ओर से लंच पैकेट बांटे गए। उसमें भी कभी कभार सब्जी खराब मिली। यह परिवार के लिए काफी नहीं। फसल बर्बादी से जीवनयापन और मवेशियों के चारे की समस्या है। - घसीटे, पथार
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भोगनीपुर में 15 और सिकंदरा के 10 गांव बाढ़ से प्रभावित थे। अब यमुना नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है। मूसानगर गेज में यमुना जलस्तर खतरे के निशान से अब केवल 49 सेंटीमीटर ऊपर है। देर रात तक यह पानी उतर जाएगा और नदी जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ जाएगा। बाढ़ का पानी उतरने पर गांवों में कीचड़ और गंदगी से दिक्कतें बरकरार हैं। वहीं पिछले तीन दिन से रुक-रुक कर हो रही बारिश भी घरों से बाहर डेरा डाले परिवारों के लिए आफत बनी है। अधिकांश घरों से पानी पूरी तरह से उतर चुका है।
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एसडीएम भोगनीपुर देवेंद्र कुमार ने बताया कि चपरघटा में 50 परिवार और क्योटरा -टयोगा में 39 परिवार राहत शिविर छोड़ कर घरों में शिफ्ट हो गए हैं। इधर सिकंदरा तहसील में बछाटी, जैसलपुर, महदेवा और बैजामऊ के करीब सौ परिवार राहत शिविर छोड़कर घरों में पहुंच गए हैं। अभी गोहानी व भुपैयापुर में करीब सौ परिवार छतों, खुले में ऊंचाई या फिर पड़ोसियों के यहां डेरा डाले हैं।
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जलस्तर कम होने के बाद नयापुरवा, क्योटरा बांगर, मुसरिया, बम्हरौली घाट, नगीना बांगर की पुलिया से आवागमन शुरू हो गया है। हालांकि आढन-पथार और पड़ाव में अभी भी नाव से आवागमन हो रहा है। आढन-पथार व पड़ाव की पुलिया डूबने से आढन-पथार, पड़ाव, रसूलपुर, चतुरीपुरवा, कुंभापुर, भुंडा आदि गांवों का संपर्क अभी भी टूटा है।
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घर के गिरने का सता रहा डर
बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब लोग घर गिरी की आशंका से डरे हैं। लोगों का कहना है कि पूरे घर लबालब हो गए थे। अब पानी उतरा है। करीब पांच दिन घरों में पानी भरा रहा। ऐसे में नींव में पानी घुसने और दीवार धंसने से घर गिरने का डर सता रहा है। वहीं रास्ते कीचड़ से पटे हैं। इससे आवाजाही में परेशानी हो रही है। आरोप लगाया कि प्रशासन से मदद के नाम पर लंच पैकेट कभी समय से नहीं मिले। एक बार मिले तो दूसरी बार कब मिलेंगे यह साफ नहीं रहा। बच्चों के लिए दूध, फल, नाश्ता आदि कभी नहीं बांटा गया। अब बाढ़ राहत सामग्री में राशन जरूर दिया जा रहा है।
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यमुना नदी का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। मूसानगर गेज में मंगलवार को दोपहर 2 बजे जलस्तर 107.49 मीटर दर्ज किया गया है। यह खतरे के निशान से केवल 49 सेंटीमीटर ऊपर है। देर रात तक जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ जाएगा। - अनिल गुप्ता, मूसानगर स्थल प्रभारी केंद्रीय जल आयोग
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लंच पैकेट दिए मगर बच्चों के लिए दूध-फल नहीं बांटा
बाढ़ का पानी तो गांव से कम हो गया, लेकिन तमाम समस्याओं को छोड़ गया है। गांव में चारों तरफ कीचड़ ही कीचड़ है। बाढ़ में आई सिल्ट घर से लेकर संपर्क मार्गों तक जमा हो गई है। फसल व चारा सब कुछ बर्बाद हो गया है। गृहस्थी कैसे चलेगी इसकी चिंता सता रही है। - रामबाबू, क्योटरा बांगर
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बाढ़ का पानी तो कम हो गया है। मगर समस्या अभी भी जस की तस है। बाढ़ के समय लंच पैकेट आए। बच्चों के लिए नाश्ता, दूध व फल आदि कभी नहीं दिया गया। इससे भी बच्चों को परेशानी रही। - राकेश कुमार, क्योटरा।
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जलस्तर घटने पर अब गांव किनारे पानी है। नाव से ही आवागमन हो रहा है। प्रशासन की ओर से लंच पैकेट बांटे गए। उसमें भी कभी कभार सब्जी खराब मिली। यह परिवार के लिए काफी नहीं। फसल बर्बादी से जीवनयापन और मवेशियों के चारे की समस्या है। - घसीटे, पथार