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यूपी: वन विभाग में भर्ती घोटाला, 2016 में पांच लिपिकों की हुई थी फर्जी नियुक्ति

Tue, 28 May 2019 11:24 AM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 28 May 2019 11:24 AM IST
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Recruitment scam in forest department, five clerks in 2016 fake appointment
डेमो - फोटो : गूगल
वन विभाग में फर्जी तरीके से पांच लिपिकों की नौकरी लगाने के मामले में कानपुर के नवाबगंज थाने में पांच लिपिकों व दो अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। मामला 2016 का है। पांचों लिपिक बर्खास्त किए जा चुके हैं, जबकि आरोपी अफसर निलंबित हो चुके हैं।   
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नवाबगंज स्थित वन विभाग के दफ्तर में 2016 में समूह ग और घ के तहत संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए स्थायी नौकरी निकली थी। विभाग के तत्कालीन अधिष्ठापन प्रभारी रामचंद्र और उप क्षेत्रीय वन अधिकारी राधेश्याम ने आवेदन मांगे थे।
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इन दोनों अफसरों ने पहले से तैनात संविदा कर्मियों के आवेदन न भेजकर अपने पांच रिश्तेदारों प्रदीप कुमार, वीरेंद्र कुमार, सुरेंद्र कुमार, सुरेश बाबू और रमाकांत के ही आवेदन कार्मिक विभाग भेज दिए। इन पांचों को स्थायी नौकरी मिल गई जबकि ये कभी संविदा पर तैनात ही नहीं थे।

इनके फर्जी दस्तावेज बनाए गए। नौकरी के लिए आवेदकों ने दोनों अफसरों को मोटी रकम भी दी थी। सितंबर 2018 में की गई शिकायत के बाद घोटाले की जांच क्षेत्रीय वन अधिकारी कमलेश कुमार को सौंपी गई। जांच में इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर दिसंबर 2018 को पांचों लिपिकों को बर्खास्त कर दिया गया।

जबकि आरोपी अफसर राधेश्याम, रामचंद्र को निलंबित कर दिया गया। रविवार को जांच अधिकारी ने दोनों अफसरों और बर्खास्त लिपिकों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने आदि धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है।

फर्जी दस्तावेज से दिखाई संविदा 
सूत्रों के अनुसार आरोपी अफसरों ने इन पांचों लिपिकों को फर्जी दस्तावेज के जरिए उनका संविदा पर तैनात कर्मचारी दर्शाया था। साथ ही उनके वेतन भुगतान की फर्जी स्लिप भी लगाई थी। 

इन जिलों के रहने वाले हैं आरोपी 
प्रदीप कुमार, सुरेंद्र कुमार, और वीरेंद्र कुमार शाहजहांपुर, रमाकांत मौरावां उन्नाव और सुरेश बाबू एकदिल इटावा के रहने वाला है।
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