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महाशिवभक्त रावण इस अनोखे मंदिर में विराजमान, विशेष वरदान पाने के लिए जरूरी हैं पीले फूल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 19 Oct 2018 09:25 AM IST
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इसे आस्था ही कहेंगे जब पूरा देश रावण दहन कर खुशियां मनाता है ताे कुछ लाेग एेसे भी हैं जाे रावण के सौ साल पुराने मंदिर में विशेष अराधना करते हैं। यह पूजा केवल दशहरे के दिन ही हाेती है। कानपुर के शिवाला में स्थित देश के एकलौते दशानन मंदिर में शुक्रवार सुबह से भक्त रावण की पूजा अर्चना करने के लिए उमड़ रहे हैं।
रावण का मंदिर
यह मंदिर साल में एक बार विजयादशमी के दिन ही खुलता है और लोग सुबह-सुबह यहां रावण की पूजा करते हैं। दशानन मंदिर में शक्ति के प्रतीक के रूप में रावण की पूजा होती है और श्रद्धालु तेल के दिए जलाकर मन्नतें मांगते हैं।
रावण का मंदिर
परंपरा के अनुसार आज सुबह आठ बजे मंदिर के कपाट खोले गए और रावण की प्रतिमा का साज श्रृंगार किया गया। इसके बाद आरती हुई। आज शाम मंदिर के दरवाजे एक साल के लिये बंद कर दिये जाएंगे।
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रावण का मंदिर
रावण के इस मंदिर के संयोजक केके तिवारी ने बताया कि कैलाश मंदिर परिसर में मौजूद विभिन्न मंदिरों में शिव मंदिर के पास ही रावण का मंदिर है. इसका निर्माण सौ साल पहले महाराज गुरू प्रसाद शुक्ल ने कराया था।
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रावण का मंदिर
तिवारी बताते हैं कि रावण प्रकांड पंडित होने के साथ-साथ भगवान शिव का परम भक्त था। इसलिये शक्ति के प्रहरी के रूप में यहां कैलाश मंदिर परिसर में रावण का मंदिर बनाया गया।