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कानपुर: राष्ट्रपति के हाथों फला-फूला पार्क अब तबेला बना, कचरे में पड़ा है कोविंद के नाम का लोकार्पण पत्थर
Tue, 22 Jun 2021 03:49 PM IST
शिखा पांडेय
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 22 Jun 2021 03:49 PM IST
सार
जुलाई 2017 में कोविंद के राष्ट्रपति बनने के बाद भी किसी ने इस पार्क की सुध नहीं ली। विष्णुपुरी चौराहे के पास स्थित अर्द्ध विकसित सेंट्रल पार्क की हालत देखकर रामनाथ कोविंद ने 2002-03 में अपनी निधि के पांच लाख रुपये से विकास कराया था।
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राष्ट्रपति के हाथों फला-फूला पार्क अब तबेला बना
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्यसभा सदस्य रहते कानपुर में विष्णुपुरी के जिस सेंट्रल पार्क का विकास कराया था, अब वह उजाड़ हो गया है। चट्टा संचालक समेत दो लोगों का पार्क में अवैध कब्जा है। जगह-जगह पसरी गंदगी विभागों की लापरवाही की पोल खोल रही है।
आवारा जानवरों का अड्डा बने इस पार्क में लोगों ने टहलना भी बंद कर दिया है। जुलाई 2017 में कोविंद के राष्ट्रपति बनने के बाद भी किसी ने इस पार्क की सुध नहीं ली। विष्णुपुरी चौराहे के पास स्थित अर्द्ध विकसित सेंट्रल पार्क की हालत देखकर रामनाथ कोविंद ने 2002-03 में अपनी निधि के पांच लाख रुपये से विकास कराया था।
बाउंड्री, गेट कराए जाने के साथ ही पार्क में कई पौधे भी लगवाए थे। खुद कोविंद ने इस पार्क का उद्घाटन किया था। कुछ साल तो पार्क की स्थिति ठीक रही लेकिन नगर निगम और श्रम विभाग की लापरवाही के चलते यह पार्क उजाड़ होता गया। पार्क के नाम पर सिर्फ बाउंड्री, कुछ हिस्से में इंटरलॉकिंग टाइल्स बचे हैं।
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अमर उजाला ने सोमवार को इस पार्क का जायजा लिया तो गेट के बगल की बाउंड्री में तब के राज्यसभा सदस्य रामनाथ कोविंद के नाम का पत्थर तो लगा नजर आया लेकिन पार्क जैसा बाकी कुछ नहीं दिखा। पार्क का गेट खुला था। इस खराब गेट पर पेंट से पार्क बुक होने की तारीख लिखी थी।
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आवारा जानवरों का अड्डा बने इस पार्क में लोगों ने टहलना भी बंद कर दिया है। जुलाई 2017 में कोविंद के राष्ट्रपति बनने के बाद भी किसी ने इस पार्क की सुध नहीं ली। विष्णुपुरी चौराहे के पास स्थित अर्द्ध विकसित सेंट्रल पार्क की हालत देखकर रामनाथ कोविंद ने 2002-03 में अपनी निधि के पांच लाख रुपये से विकास कराया था।
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बाउंड्री, गेट कराए जाने के साथ ही पार्क में कई पौधे भी लगवाए थे। खुद कोविंद ने इस पार्क का उद्घाटन किया था। कुछ साल तो पार्क की स्थिति ठीक रही लेकिन नगर निगम और श्रम विभाग की लापरवाही के चलते यह पार्क उजाड़ होता गया। पार्क के नाम पर सिर्फ बाउंड्री, कुछ हिस्से में इंटरलॉकिंग टाइल्स बचे हैं।
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अमर उजाला ने सोमवार को इस पार्क का जायजा लिया तो गेट के बगल की बाउंड्री में तब के राज्यसभा सदस्य रामनाथ कोविंद के नाम का पत्थर तो लगा नजर आया लेकिन पार्क जैसा बाकी कुछ नहीं दिखा। पार्क का गेट खुला था। इस खराब गेट पर पेंट से पार्क बुक होने की तारीख लिखी थी।
दरअसल मोहल्ले के जिन लोगों को पार्क से शादी समारोह करना होता है, वे इसी तरह तारीख लिखवा देते हैं। मैदान में जगह-जगह गंदगी, कूड़े के ढेर लगे थे। दो झोपड़ियां बनी हैं। पास में ही जानवर बंधे थे। एक झोपड़ी में चट्टा संचालक का कब्जा है। दूसरे में एक परिवार रहता है। वहां बने मंदिर के आसपास भी गंदगी, झाड़ियां थीं।
अखाड़े के आसपास इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछे हैं। लोगों ने बताया कि इन्हें पूर्व विधायक सतीश निगम ने बिछवाया था। यहां के पूर्व पार्षद महेंद्र पांडे पप्पू ने बताया कि यह पार्क श्रम विभाग का है, वहां से एनओसी न मिलने के कारण नगर निगम भी इसमें विकास कार्य नहीं कराता।
सेंट्रल पार्क का सुंदरीकरण होना चाहिए। इससे आसपास के हजारों लोग लाभान्वित होंगे।- मदन बाबू, क्षेत्रीय पार्षद
यह पार्क अधिकारियों की उपेक्षा का शिकार है। इसे विकसित कराने के लिए कई बार मांग की गई पर स्थित जस की तस है।- राजा ठाकुर, क्षेत्रीय निवासी
रामनाथ कोविंद ने इस पार्क का सुंदरीकरण कराया था। इसके बाद किसी ने ध्यान नहीं दिया। अन्य पार्कों की तरह यह भी उपेक्षित है। - पंचानंद सिंह, क्षेत्रीय निवासी
15 साल में पार्क की हालत बदतर हो गई है। गंदगी, छुट्टा पशुओं के कारण लोग इसमें टहलने भी नहीं जाते।- आकाश यादव, क्षेत्रीय निवासी
कचरे में पड़ा है रामनाथ कोविंद के नाम का लोकार्पण पत्थर
राज्यसभा सदस्य बनने के बाद रामनाथ कोविंद ने परौंख में अपनी निधि से वर्ष 2001 में सीसी मार्ग का निर्माण कराया था। इसका लोकार्पण भी उन्होंने ही किया था। अनदेखी की वजह से लोकार्पण पत्थर का ढांचा ढह गया। यह पत्थर अब सड़क के किनारे कचरे के बीच पड़ा है। यह तब है जब परौंख में राष्ट्रपति के आने की तैयारियां जोरों पर हैं।
अखाड़े के आसपास इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछे हैं। लोगों ने बताया कि इन्हें पूर्व विधायक सतीश निगम ने बिछवाया था। यहां के पूर्व पार्षद महेंद्र पांडे पप्पू ने बताया कि यह पार्क श्रम विभाग का है, वहां से एनओसी न मिलने के कारण नगर निगम भी इसमें विकास कार्य नहीं कराता।
सेंट्रल पार्क का सुंदरीकरण होना चाहिए। इससे आसपास के हजारों लोग लाभान्वित होंगे।- मदन बाबू, क्षेत्रीय पार्षद
यह पार्क अधिकारियों की उपेक्षा का शिकार है। इसे विकसित कराने के लिए कई बार मांग की गई पर स्थित जस की तस है।- राजा ठाकुर, क्षेत्रीय निवासी
रामनाथ कोविंद ने इस पार्क का सुंदरीकरण कराया था। इसके बाद किसी ने ध्यान नहीं दिया। अन्य पार्कों की तरह यह भी उपेक्षित है। - पंचानंद सिंह, क्षेत्रीय निवासी
15 साल में पार्क की हालत बदतर हो गई है। गंदगी, छुट्टा पशुओं के कारण लोग इसमें टहलने भी नहीं जाते।- आकाश यादव, क्षेत्रीय निवासी
कचरे में पड़ा है रामनाथ कोविंद के नाम का लोकार्पण पत्थर
राज्यसभा सदस्य बनने के बाद रामनाथ कोविंद ने परौंख में अपनी निधि से वर्ष 2001 में सीसी मार्ग का निर्माण कराया था। इसका लोकार्पण भी उन्होंने ही किया था। अनदेखी की वजह से लोकार्पण पत्थर का ढांचा ढह गया। यह पत्थर अब सड़क के किनारे कचरे के बीच पड़ा है। यह तब है जब परौंख में राष्ट्रपति के आने की तैयारियां जोरों पर हैं।