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इन्हें अभिनेता नहीं 'साक्षात् परशुराम' कहिए, बल-शौर्य, अभिनय और वाकपटुता की वजह से हुए मशहूर 

Sat, 13 Oct 2018 04:54 PM IST
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 13 Oct 2018 04:54 PM IST
सार

- समूचे उत्तर भारत में विख्यात रहे हैं परशुराम का किरदार निभाने वाले शहर के अभिनेता
- बल, शौर्य, अभिनय, वाकपटुता की वजह से दशकों तक जनता के दिलों में किया राज 
 

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Ramleela actors in real life from kanpur
समूचे उत्तर भारत में विख्यात रहे हैं परशुराम का किरदार निभाने वाले शहर के अभिनेता
कहा जाता है कि रामलीला में जिसने परशुराम-लक्ष्मण का संवाद नहीं देखा, उसने कुछ नहीं देखा। दो दिव्य शक्तियों का रोमांच भरा अभिनय और संवाद ही रामलीलाओं को जीवंत बनाता है। इन दो दिव्य शक्तियों में परशुराम का अभिनय करने के मामले में यूपी का कानपुर महानगर धनी है। कुछ कलाकारों के अभिनय की तो मिसालें दी जाती हैं। इस अंक में हम ऐसे पांच अभिनेताओं का जिक्र करेंगे जिन्होंने अपने ज्ञान, बल, शौर्य, अभिनय और वाकपटुता की वजह से दशकों तक दर्शकों के दिलों में राज किया है। 
Ramleela actors in real life from kanpur
व्यास नारायण बाजपेई
व्यास नारायण बाजपेई  
बड़ी आंखें, चढ़ीं भौहें। मंच पर इनका रौद्र रूप देखकर जनता जय जयकार करने लगती थी। कानपुर देहात-गजनेर निवासी व्यास नारायण बाजपेई स्वास्थ्य विभाग में वैद्य थे। बताते हैं कि 1930 से 50 के दशक तक इनका अभिनय उठान पर रहा। इनकी थरथराती आवाज लोगों में रोमांच पैदा करती थी। इनका समय लेने के लिए रामलीलाएं महीने भर तक टल जाया करती थीं। लक्ष्मण का अभिनय करने वाले कलाकार के लिए इनके सामने टिकना चुनौती हुआ करती थी। 
Ramleela actors in real life from kanpur
पंडित बाबू लाल अवस्थी
पंडित बाबू लाल अवस्थी 
मोटी जांघें, चौड़ी छाती। भुजाओं की मछलियां शरीर के बल का अहसास कराती थीं। परास, घाटमपुर निवासी पंडित बाबू लाल अवस्थी पुरोहित थे। इस वजह से विद्वता में इनका कोई सानी नहीं था। पुराने कलाकार बताते हैं कि रूप सज्जा और अभिनय ऐसा था जैसे मंच पर साक्षात् परशुराम उतर आए हों। इनकी खासियत थी कि जिस भी रामलीला में गए वहां पैर की ठोकर से तख्त जरूर तोड़ते थे। यह उनके अभिनय का हिस्सा था। उन्हें 'तख्ततोड़ परशुराम' कहा जाता था। इनका अभिनय काल वर्ष 1940 से 1960 तक रहा। 
 
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आचार्य गोरे लाल त्रिपाठी
आचार्य गोरे लाल त्रिपाठी
जटाधारी शिव की प्रतिमूर्ति। परशुराम के रूप में पहली बार दाढ़ी लगाकर अभिनय करने वाले देवनगर कानपुर निवासी आचार्य गोेरे लाल त्रिपाठी नाट्य की सभी क्रियाओं आंगिक, वाचिक, आहार्य और सात्विक में पारंगत थे। लक्ष्मण का अभिनय करने वाले शख्स को इस बात पर पसीना छूट जाता था कि उनकी टक्कर गोरे लाल से होनी है। इनके पुत्र विजय प्रकाश त्रिपाठी बताते हैं कि पिताजी पहले लक्ष्मण का अभिनय करते थे, लेकिन पंडित बाबू लाल अवस्थी के अभिनय से प्रेरित होकर उनकी अभिनय कला को आगे बढ़ाया। संस्कृत में एमए होने की वजह से संवाद शैली में इनका कोई जोड़ नहीं था। वर्ष 1960 से 80 तक इनके नाम का डंका बजा। 
 
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Ramleela actors in real life from kanpur
डॉ. राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी
डॉ. राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी
वर्ष 1980 से 1995 तक परशुराम के अभिनय में डॉ. राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी ने खूब ख्याति कमाई। इन्होंने व्यास नारायण, बाबूलाल और गोरेलाल 3 कलाकारों की परंपरा का मंचन एक साथ किया। इसलिए तर्क से लक्ष्मण के संवादों को परास्त करने में ये माहिर थे। इसके उलट लक्ष्मण के प्रश्नों का जवाब ऐसे देते कि जनता वाह वाह कर बैठती। लंगोट पहनकर मंचन करने की शुरुआत इन्हीं ने की। पड़री, घाटमपुर के रहने वाले डॉ. त्रिपाठी बीएनएसडी, मेस्टन रोड में अध्यापक भी थे। अवधी लोक नाट्य कला में इन्होंने पीएचडी भी की।
 
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