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UP: राकेश टिकैत बोले- किसानों के स्थानीय उत्पाद समाप्त करना चाहती है सरकार
Wed, 26 Mar 2025 11:38 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 26 Mar 2025 11:38 PM IST
सार
होली मिलन समारोह में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के स्थानीय उत्पाद समाप्त करना चाहती है।
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किसान यूनियन के होली मिलन समारोह में बोलते राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भाकियू टिकैट गुट के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सरकार पर हमला बोला। कहा कि केंद्र सरकार चाहे जितना दबाव बनाए, लेकिन आंदोलन जारी रहेगा। सरकार किसानों के स्थानीय उत्पाद को समाप्त करना चाहती है। कहा कि इस सरकार के पास एक ही योजना है कि किसानों की भूमि की कैसे छीनी जाए। यूएसए का एक प्रतिनिधि मंडल आया है और कई समझौता करने जा रहा है। पूरे बाजार की व्यवस्था पर अमेरिका कब्जा करना चाहता है।
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता बुधवार को गांधी मैदान किसान होली मिलन समारोह में शामिल हुए। किसानों की पंचायत में कहा कि सरकार पॉलिसी बनाकर जनता की जेब से पैसा निकलवा रही है। चाहे वाहनों की आयु की बात हो या फिर फसलों के मूल्य की बात हो। बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार पॉलिसी बनाती है।
कहा कि केंद्र सरकार चाहे जितना दबाव बनाए, लेकिन शांत नहीं बैठना है। सरकार न तो किसान संगठनों से बात करती है और न ही समझौता बैठक में शामिल करती है। कहा कि किसानों को निशुल्क बिजली देने के नाम पर सात घंटे बिजली मिल रही है, जिससे खेत की सिंचाई भी ढंग से नहीं हो पा रही है। बाजार में 3,000 रुपये प्रति क्विंटल तक गेहूं का भाव था, चार दिन में 400 रुपये टूट गया। इससे सीधे तौर पर किसानों को नुकसान हुआ।
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भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता बुधवार को गांधी मैदान किसान होली मिलन समारोह में शामिल हुए। किसानों की पंचायत में कहा कि सरकार पॉलिसी बनाकर जनता की जेब से पैसा निकलवा रही है। चाहे वाहनों की आयु की बात हो या फिर फसलों के मूल्य की बात हो। बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार पॉलिसी बनाती है।
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कहा कि केंद्र सरकार चाहे जितना दबाव बनाए, लेकिन शांत नहीं बैठना है। सरकार न तो किसान संगठनों से बात करती है और न ही समझौता बैठक में शामिल करती है। कहा कि किसानों को निशुल्क बिजली देने के नाम पर सात घंटे बिजली मिल रही है, जिससे खेत की सिंचाई भी ढंग से नहीं हो पा रही है। बाजार में 3,000 रुपये प्रति क्विंटल तक गेहूं का भाव था, चार दिन में 400 रुपये टूट गया। इससे सीधे तौर पर किसानों को नुकसान हुआ।
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