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नेता लोगन की जुबान पे ताला लगै के चाही 

Mon, 28 May 2018 12:25 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Mon, 28 May 2018 12:25 PM IST
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Raju shrivastav Statement about Politicians
राजू श्रीवास्तव
दोस्तों पिछले दिनों हम आपन चाचा के हिंया बर्रा गए रहेन.. हुंवा आम केर पना पियत पियत ऐसेहेन बात होय लगी कि गुरु दुनिया मा पहिली बार ई ताला (लॉक) कइसे बना होई.. तबहें जाजमऊ के बसेसर बोले ई सब छोड़ो.. ई सोचो की ताला को बनाईस होई.. कानपुर में पहिला ताला कइसे आवा होई अउर को लावा होई.. तो बसेसर फिर बोले कि अगर ई ताला न होत तो का होत.. तो पंथु बोले ई सोचो के सतयुग द्वापर मा अगर ताला होत तो का होत.. मनोहर पूछे का हो। तो पंथु बोले कि अगर सतयुग मा ही ताले का आविष्कार हुई जात तो फिर सीता मैया का अपहरण ना हुई पावत..  लक्ष्मण जी रेखा खींचे के बजाए दरवाजे में ताला लगाय के चले जउते.. अउर जानत हौ कृष्ण जी भी माखन ना चुरा पावत..  यशोदा मां माखन की हांडी अलमारी मा रख के ताला लगाय के चली जातीं.. एतने में रावतपुर वाले संकठा बोले हमार दादा के लक्कड़ दादा बतावत रहें की पहिले आज के जइसे लुटियाचोर रहें नहीं।
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ऊ जमाने मा यहीं पटकापुर मा एक आदमी रहा गजोधर.. बहुतै परम रहे.. ऊ सोचे लगे कि ई जौन पडोसी का एतना धन संपत्ति खुले में पड़ा रहत है.. ई अगर हमरा हुई जाए तो कैसन रहे..  तब ऊ गजोधर भईया एक नए काम का आविष्कार किहिन.. चोरी..  अउर फिर ऊ चोरी करि करि के खूब माल दौलत इकठ्ठा कर लिहिन.. लेकिन गजोधर भईया का ख़बर नहीं रही कि कोऊ उनका फ़ॉलो कर रहा है.. फिर एक दिनै जब उनहिन का लौटा चोरी भवा तो उनका समझ मा आवा की कौनो दूसर चोर भी तैयार हुई गवा है..  फिर का रहै.. एक के बाद एक बकरीचोर.. चुनौटीमार.. मुर्गीचोर.. साईकिलचोर.. हुक्काचोर.. चरपइयाचोर.. रजइयाचोर टाइप के चोर पैदा होय लगे.. तो उई जमाने केर कानपुर सहर व्यवस्था के चीफ कहिन कि गुरु नगर मा चोरी हुई रही है.. का किया जाय.. तो कौनो सलाह दिहिस की गजोधर भईया का बुलाव.. तब गजोधर भईया चोरी के बाद दूसरा आविष्कार किहिन.. ताला.. ताले का बड़ा कारखाना अलीगढ मा लगावा गवा.. अउर इस बुजुर्ग चोर को उस कारखाने केर चीफ एडवाईजर बनावा गवा.. ऊ टाइम केर ताले बक्सा के बराबर खूब बड़े बड़े बम्पिलाट होत रहें.. अउर चाबी एतनी बड़ी होत रही कि कंधे पे लादै का पड़त रहै.. लोगन की हैसियत उनकी चाबी से पता चलत रही.. मोहल्ले मा जब कोऊ ताला खरीदे जात रहा तो पूरा मोहल्ला ओके साथ जात रहा.. फिर बाकायदा ताला लगाईं फंक्शन होत रहा।
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फिर इस ताले से ग़ुस्साये बाकी के चोर लोग दिमाग लगाइन अउर उस ताले केर डुप्लीकेट चाबी बनाय लिहिन..  अब ताला कंपनी मा हडकंप मच गवा अब समस्या ई आय गयी रही कि चोर नकली चाबी बनावत रहें तो ऊ ताला बदल देत रहें.. चोर ओकी भी डुप्लीकेट चाभी बना लेत रहें.. तो अलीगढ के ताला कारखाने के मालिक फिर वही कानपुर के बुज़ुर्ग चोर गजोधर को बुलाइन। गजोधर बोले हम कुछ करित है.. फिर ऊ एक कमरे मा घुस गए.. दुई दिन तक अन्दर रहें.. तीसरे दिन बाहर आये के बोले.. लेव हम चाबी केर झंझटै ख़त्म करि दिहा.. आज से ताला चाबी से नहीं नंबर से खुलिहे.. फिर नंबर वाले लॉक आय गए.. कुछ दिन सब चैन रहा मगर समस्या फिर पइदा होय लगी कि लोग ताले का नंबर कॉम्बिनेशन भूल जात रहें.. तो फिर कौनो लौहार का बुलाय के ताला तोड़ा जात रहा.. खैर आजकल तो भईया अजीब अजीब ताला चलत हैं.. डिजिटल लॉक अउर न जाने का का। कोऊ पैटर्न से लॉक होत है.. तो कोऊ फिंगर प्रिंट से खुलत है.. कोऊ कोऊ तो आंख केर पुतली देख भी खुलत है.. अब हमका इत्ता नहीं पता ये आजकल के लौंडे लोग बतावत हैं.. अब केतनी बात सच्ची है केतनी झूठी हमका नहीं पता..तब हम कहा यार कुछु कहौ ताले से हम लोगन बहुत सुकून रहत है.. लेकिन एक ताला अभीनो बाज़ार मा नहीं आवा.. जो नेताओं के भड़काऊ भाषणन पर लगावा जाय सके.. जौन धर्म अउर जाती के नाम पे आग उगलत हैं.. एक अइसे ताले का आविष्कार होय के चाही जो इनकी जुबान पर लगावा जाय सकै ..--राजू श्रीवास्तव
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