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बढ़ते प्रदूषण को लेकर राजू श्रीवास्तव ने दीवाली पर की लोगों से ये न करने की अपील

Thu, 12 Oct 2017 02:51 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 12 Oct 2017 02:51 PM IST
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Raju Shrivastav's appeal do not Burn Harmful Fireworks
डेमो पिक

दिवाली के मौके पर शहर की आबोहवा में साल दर साल प्रदूषण की मात्रा बढ़ती जा रही है। 2015 अक्तूबर माह में प्रदूषण नियंत्रण विभाग को हवा में जितने हानिकारक तत्वों की मात्रा मिली थी, उसमें 2016 में दोगुने की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। सितंबर में शहर में जितनी हवा में प्रदूषण की मात्रा रहती है, उसमें दिवाली के आसपास दो से तीन गुना हानिकारक तत्व बढ़ जाते हैं।

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विभाग ने अभी तक की जो रिपोर्ट जारी की है, उसमें पीएम 10 (हानिकारक तत्व) की मात्रा कहीं-कहीं सामान्य से 240 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर अधिक है, जो सामान्य से करीब पांच गुना ज्यादा है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने शहर में आठ ऐसे प्रमुख स्थानों को चिह्नित किया है, जहां पर सबसे ज्यादा प्रदूषण रहता है। इन स्थानों में कुछ व्यावसायिक, कुछ औद्योगिक और कुछ आवासीय क्षेत्र हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि व्यावसायिक क्षेत्रों में भी प्रदूषण की मात्रा सामान्य से कई गुना ज्यादा पाई गई है। हवा में पाए जाने वाले इन हानिकारक तत्वों की वजह से लोगों में कई तरह की बीमारियां भी पैदा हो रही हैं।
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हानिकारक पटाखे न जलाएं -राजू श्रीवास्तव, हास्य कलाकार

Raju Shrivastav's appeal do not Burn Harmful Fireworks
डेमो पिक

प्रदूषण नियंत्रण विभाग का कहना है कि दिवाली वाले महीने में तेज आवाज और बारूद वाले पटाखों की वजह से प्रदूषण की मात्रा में बढ़ोत्तरी होती है। पिछले दो साल दिवाली के दिन प्रदूषण 30 अक्तूबर वर्ष-2016 725.4 (आम दिनों में अलग-अलग क्षेत्रों में 270 तक प्रदूषण) 11 नवंबर वर्ष-2015 413 (आम दिनों में अलग-अलग क्षेत्रों में 220 तक प्रदूषण) (प्रदूषण की मात्रा माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर क्षेत्र में। सामान्य स्थिति में प्रदूषण (पीएम-10) 50 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होना चाहिए) स्वास्थ्य पर प्रदूषण का असर 51 से 100 माइक्रोग्राम तक दमा के मरीजों के लिए सांस में लेने में दिक्कत बढ़ जाती  है। लगातार संपर्क में रहने से सामान्य व्यक्ति भी सांस का मरीज हो जाता है। 101 से 200 माइक्रोग्राम तक फेफड़े पर असर पड़ना शुरू हो जाता है। दिल की बीमारी भी बढ़ने लगती है। यह बच्चे, बूढ़े और सामान्य व्यक्ति पर असर डालता है। 301 से 400 माइक्रोग्राम तक फेफड़े की कार्य क्षमता काफी कम हो जाती है। पीड़ित व्यक्ति सामान्य सांस नहीं ले पाता है। आक्सीजन लगाने की जरूरत पड़ती है।


अपील हानिकारक पटाखे न जलाएं
हर साल दिवाली हवा में बढ़ रही प्रदूषण की मात्रा को रोकने का एक ही उपाय है कि लोग इस बार इको फ्रैंडली पटाखे जलाएं, जिसमें बारूद का इस्तेमाल नहीं होता। वातावरण में प्रदूषण की मात्रा भी नहीं बढ़ती। सांस लेने में भी बच्चे और बूढ़े सभी को आराम रहता है। छोटे हों या बड़े, इसका प्रयास हम सभी को करना चाहिए। - राजू श्रीवास्तव, हास्य कलाकार
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