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Kanpur: राजेश बिंदल बोले- गांवों को गोद लेकर कानून की जानकारी दें एलएलबी के छात्र, युवाओं को दिया ये सुझाव
Sat, 22 Feb 2025 12:55 PM IST
हिमांशु अवस्थी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: हिमांशु अवस्थी
Updated Sat, 22 Feb 2025 12:55 PM IST
सार
Kanpur News: न्यायाधीश राजेश बिंदल ने कहा कि कानून समाज के साथ विकसित होता है। छात्रों को सीखने, भूलने और फिर से सीखने का सुझाव दिया। डीप फेक के इस्तेमाल एवं साइबर अपराधों के बारे में बताया कि कैसे कंपनी आपका डाटा एकत्र करते हैं। उन्होंने ई-एससीआर, एससीआर एवं ई-कोर्ट के एप के बारे में जानकारी दी।
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न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, सर्वोच्च न्यायालय, का स्वागत करते विवि के कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कानून का अधिक उल्लंघन उसकी जानकारी के अभाव में होता है। देश में पांच लाख से अधिक लॉ के छात्र-छात्राएं और लगभग छह लाख गांव हैं। अगर एक छात्र एक गांव को गोद लेकर लोगों को कानून की जानकारी दें, तो इस समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकता है। यह बातें छत्रपति शाहूजी महाराज विवि में शुक्रवार को आयोजित चतुर्थ राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का शुभारंभ करने आए मुख्य अतिथि व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश राजेश बिंदल ने कहीं।
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उन्होंने कहा कहा कि समाज को सस्ते और सुलभ न्याय की आवश्यकता है। इसको देखते हुए मूट कोर्ट अत्यंत उपयोगी है। इस प्रतियोगिता में जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण भागीदारी है, क्योंकि सीखना एक सतत यात्रा है। डीपफेक के इस्तेमाल एवं साइबर अपराधों के पीड़ितों को न्याय दिलाने में नई पीढ़ी की भूमिका अहम होने वाली है।
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सीखने, भूलने और फिर से सीखने का सुझाव दिया
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग और ई-एससीआर पोर्टल के बारे में बताया कि विभिन्न भाषाओं में 37,000 निर्णय को उपलब्ध कराया गया है, जो युवा अधिवक्ताओं के लिए उपयोगी है। कानून समाज के साथ विकसित होता है। छात्रों को सीखने, भूलने और फिर से सीखने का सुझाव दिया। डीप फेक के इस्तेमाल एवं साइबर अपराधों के बारे में बताया कि कैसे कंपनी आपका डाटा एकत्र करते हैं। उन्होंने ई-एससीआर, एससीआर एवं ई-कोर्ट के एप के बारे में जानकारी दी।
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प्रो. पाठक बोले- शिक्षण संस्थानों से संबद्ध हो न्यायिक तंत्र
सीएसजेएमयू कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश राजेश बिंदल से कानपुर एयरपोर्ट पर मुलाकात कर उनका स्वागत किया। इसमें उन्होंने सेवानिवृत न्यायाधीशों एवं लीगल प्रैक्टिशनर्स को शिक्षण संस्थानों से जोड़ने का सुझाव दिया। कहा कि ज्यूडिशियल सिस्टम के विशेषज्ञों के शिक्षण संस्थानों से जुड़ने की पहल से विधि छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान मिलेगा। साथ ही वह न्यायपालिका की कार्यप्रणाली को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।