अव्यवस्था: कानपुर रेलवे स्टेशन पर पानी के लिए भटके यात्री, रेलवे रिकॉर्ड में गर्मी 15 अप्रैल से
तेज धूप और गर्मी के सितम से कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पहुंचने वाले यात्री बेहाल है। कारण है अंग्रेजों के बनाए नियमों पर रेलवे का संचालन। दरअसल, गर्मी ने अभी से अपना कहर दिखाना शुरू दिया है कि लेकिन रेलवे के रिकॉर्ड के मुताबिक गर्मी 15 अप्रैल से ही शुरू होगी। इसके चलते रेल यात्रियों को ठंडे पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
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कानपुर में गर्मी का सितम बढ़ गया है और पानी की खपत ट्रेनों में भी बढ़ गई है। लंबी दूरी की कई ट्रेनों में पानी खत्म होने पर यात्रियों ने हंगामा किया। रविवार को कई ट्रेनों में कानपुर सेंट्रल पर पानी भरा गया। ट्रेनों के कानपुर सेंट्रल पर रुकते ही यात्री वाटर बूथ की तरफ भागने लगे।
सेंट्रल पर पानी के लिए हंगामे के दौरान आरपीएफ को बीचबचाव करना पड़ा। इन हालात में भी रेलवे अंग्रेजों के बनाए नियमों पर कायम है। उसके रिकॉर्ड में 15 अप्रैल से गर्मी शुरू होगी, तभी से सेंट्रल पर फ्रीजर चालू होंगे। स्टेशन पर ठंडे पानी के बूथ चालू न होने से खानपान के स्टॉलों पर बिक्री बढ़ गई है। अवैध वेंडर भी रेल नीर के साथ बाहर का पानी बेच रहे हैं। सेंट्रल स्टेशन पर सुबह पांच से शाम सात बजे तक रोजाना औसतन 100-110 ट्रेनों का लोड है।
इस लिहाज से स्टेशन पर पानी के पर्याप्त बूथ नहीं है। ट्रेन के स्टॉपेज समय में एक टोटी से एक या दो यात्री ही पानी भर पाते हैं। एक वाटर बूथ पर 16 से 20 नल होते हैं। स्टेशन पर पेयजल संकट की वजह से ही पानी की अवैध वेंडिंग शुरू हुई है। रविवार को कालका मेल, पुरी, मुरी, एलटीटी सहित आधा दर्जन ट्रेनों में सेंट्रल पर पानी भरा गया।
रेलवे स्टेशनों पर पंखे चलने लगे हैं। फ्रीजरों की मरम्मत भी हो गई है। 15 अप्रैल से चालू कराने के निर्देश हैं। हालांकि, इस संबंध में मंडल के उच्चाधिकारियों से बात कर इन्हें पहले चालू कराने की कोशिश की जाएगी। - हिमांशु शेखर उपाध्याय, डिप्टी सीटीएम, कानपुर