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Kanpur News: प्रियंका कठेरिया को मिलेगा स्व. अतुल माहेश्वरी पत्रकारिता स्वर्ण पदक
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कानपुर। सीएसजेएमयू के 41वें दीक्षांत में प्रियंका कठेरिया को स्व. अतुल माहेश्वरी पत्रकारिता स्मारक स्वर्ण पदक से सम्मानित किया जाएगा। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के परास्नातक विभाग में सर्वोच्च अंक लाने वाले मेधावी को यह पदक दिया जाता है। प्रियंका को 78.65 फीसदी अंक मिले हैं।
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के परास्नातक विभाग की छात्रा प्रियंका कठेरिया ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता प्रयोग निश्चित रूप से पत्रकारिता को नए आयाम तक पहुंचाएगा। इसका सकारात्मक प्रयोग कई मुश्किलों को आसान कर देगा लेकिन इसे असिस्टेंट के रूप में इस्तेमाल करें, इसे मास्टर न बनने दें। प्रियंका कहती हैं कि कभी पत्रकार बनने का नहीं सोचा था लेकिन कोर्स ने समाज को करीब से देखना और उसकी बारीकियों को समझना सिखाया।
कोयलानगर निवासी प्रियंका के पिता भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्त हुए हैं। मां फूलकुमार गृहिणी हैं। पिता के एयरफोर्स में होने के कारण उनकी शिक्षा भटिंडा, बंगलूरू और कानपुर से हुई। अपनी बैचलर डिग्री में भी वीसी गोल्ड मेडल पाने वाली प्रियंका कहती हैं कि शुरुआत से एयरफोर्स में जाने का सोचा था लेकिन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की वजह से यह संभव नहीं हुआ।
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डिजिटल जर्नलिज्म को पसंद करने वाली प्रियंका कहती हैं कि अभी अपनी स्किल को और एक्सप्लोर कर रही हूं। प्रियंका कहती हैं कि मैं किसी बंधी बंधाई यात्रा में चलने में यकीन नहीं रखती बल्कि अपने लिए नए रास्ते तलाश रही हूं। मां से मैंने रचनात्मकता और चीजों को गहराई से देखना सीखा है। मेरे पिता की सीख ने मुझमें यह भरोसा भरा है कि मैं जीवन में जो भी रास्ता चुनूंगी, उसमें सेवा समर्पण और ईमानदारी का भाव सबसे ऊपर रहेगा।
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पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के परास्नातक विभाग की छात्रा प्रियंका कठेरिया ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता प्रयोग निश्चित रूप से पत्रकारिता को नए आयाम तक पहुंचाएगा। इसका सकारात्मक प्रयोग कई मुश्किलों को आसान कर देगा लेकिन इसे असिस्टेंट के रूप में इस्तेमाल करें, इसे मास्टर न बनने दें। प्रियंका कहती हैं कि कभी पत्रकार बनने का नहीं सोचा था लेकिन कोर्स ने समाज को करीब से देखना और उसकी बारीकियों को समझना सिखाया।
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कोयलानगर निवासी प्रियंका के पिता भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्त हुए हैं। मां फूलकुमार गृहिणी हैं। पिता के एयरफोर्स में होने के कारण उनकी शिक्षा भटिंडा, बंगलूरू और कानपुर से हुई। अपनी बैचलर डिग्री में भी वीसी गोल्ड मेडल पाने वाली प्रियंका कहती हैं कि शुरुआत से एयरफोर्स में जाने का सोचा था लेकिन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की वजह से यह संभव नहीं हुआ।
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डिजिटल जर्नलिज्म को पसंद करने वाली प्रियंका कहती हैं कि अभी अपनी स्किल को और एक्सप्लोर कर रही हूं। प्रियंका कहती हैं कि मैं किसी बंधी बंधाई यात्रा में चलने में यकीन नहीं रखती बल्कि अपने लिए नए रास्ते तलाश रही हूं। मां से मैंने रचनात्मकता और चीजों को गहराई से देखना सीखा है। मेरे पिता की सीख ने मुझमें यह भरोसा भरा है कि मैं जीवन में जो भी रास्ता चुनूंगी, उसमें सेवा समर्पण और ईमानदारी का भाव सबसे ऊपर रहेगा।