President Visit: कोविंद बोले- पर्यावरण संरक्षण को चुनौती मानें, गंगा को प्रदूषण से बचाएं
गंगा के प्रदूषण को लेकर चिंता जाहिर करते हुए राष्ट्रपति बोले, जो उद्योग चल रहे, उनका प्रदूषण कम करें। नए उद्योग पर्यावरण के अनुकूल लगाएं। उद्यम के विकास को गति दी जाए, लेकिन गंगा मैली न होने पाए। प्रदूषण गंगा में न बहाएं।
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पर्यावरण संरक्षण मानव ही नहीं, अन्य जीवों के लिए भी जरूरी है। राष्ट्रपति ने कॉर्बन उत्सर्जन को रोकने के साथ गंगा में प्रदूषण न फैलाने की अपील की। मर्चेंट चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश के 90 साल पूरे होने पर शनिवार को सिविल लाइंस स्थित मर्चेंट चैंबर हॉल में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
उद्यमियों को जीरो पॉल्यूशन की नसीहत देते हुए गांवों तक प्रदूषण रहित विकास फैलाने पर बल दिया। संक्षिप्त संबोधन के साथ उन्होंने उद्यमियों से बात भी की। इस दौरान वह पूरी तरह कनपुरिया अंदाज में नजर आए और उनकी हर बात में कानपुर की छाप दिखी। कानपुर के उत्थान की बात की। प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण उनकी बातों के केंद्र में रहा।
गंगा के प्रदूषण को लेकर चिंता जाहिर करते हुए राष्ट्रपति बोले, जो उद्योग चल रहे, उनका प्रदूषण कम करें। नए उद्योग पर्यावरण के अनुकूल लगाएं। उद्यम के विकास को गति दी जाए, लेकिन गंगा मैली न होने पाए। प्रदूषण गंगा में न बहाएं। ग्लोबल वार्मिंग को ध्यान में रखते हुए उद्योगों से कॉर्बन उत्सर्जन रोकने के लिए उन्होंने सुझाव दिया। नमामि गंगे अभियान का सहयोगी बनने के लिए कहा।
कभी कानपुर से ठंडे शहर अब हैं ज्यादा गर्म
उद्यमियों ने राष्ट्रपति को बताया कि कानपुर के उद्योगों से कॉर्बन उत्सर्जन की दिक्कत नहीं है। मर्चेंट चैंबर के पूर्व अध्यक्ष डॉ. इंद्रमोहन रोहतगी ने जानकारी दी कि राष्ट्रपति ने ग्लोबल वार्मिंग की स्थिति को लेकर हिदायत दी। उन्होंने कहा, बहुत शहर कभी ठंडे क्षेत्र कहे जाते थे, वे अब कानपुर के मुकाबले गर्म हो गए हैं। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और प्रदूूषण घटाने पर बल दिया।
- जलवायु परिवर्तन वैश्विक समस्या है। लोग अभी इसका विकराल रूप देख नहीं पा रहे हैं। 50 से 100 साल में बर्फ की ठंडी तासीर और कम होगी।
- प्रदूषण से मानव स्वास्थ्य खराब होता जा रहा है। कोशिश करें कि प्रकृति के साथ चलें। औद्योगिक घराने कम से कम ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जित करें।
स्विट्जरलैंड का जलवायु परिवर्तन बताया
राष्ट्रपति ने बताया, स्विट्जरलैंड की राजधानी से 30 किमी दूर वह ग्लेशियर देखने गए। वह ग्लेशियर से 10 किमी दूर रहे होंगे पर रक वहां ठंडक महसूस नहीं हुई। इस स्थिति ने चौंकाया तो वहां के लोगों ने बताया कि यही ग्लोबल वार्मिंग का असर है। वहां का तापमान अब 30-40 डिग्री सेल्सियस हो जाता है। उन्होंने कहा, हमने बताया कि हमारे देश में शिमला में बर्फबारी होने पर 15 घंटों में पूरे उत्तर भारत पर असर आ जाता है।
गांवों को गोद लें उद्यमी, शताब्दी समारोह का ब्लू प्रिंट तैयार करें
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उद्यमियों और व्यापारियों को समाज की बेहतरी के लिए काम करने को प्रोत्साहित किया। चैंबर के पदाधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति ने जरूरतमंदों की मदद करने की सलाह दी है। चैंबर के अध्यक्ष अतुल कनोडिया और सदस्य अनिल अग्रवाल ने बताया, राष्ट्रपति ने गांवों के विकास में उद्यमियों-व्यापारियों की भूमिका बढ़ाने को कहा है।
इसके लिए गांवों को गोद लेकर वहां ज्यादा से ज्यादा सुधार कार्य कराए जाएं। कहा कि चैंबर के 90 साल पूरे हो रहे हैं। अगले 10 साल में शताब्दी समारोह होगा। इसे ध्यान में रखकर चैंबर की बेहतरी और शहर के विकास का ब्लू प्रिंट तैयार करें। बड़ा बदलाव लाने के लिए यह जरूरी है। चैंबर के पूर्व अध्यक्ष मुकुल टंडन ने कहा, समाज के उत्थान में उद्यमियों और व्यापारियों की हमेशा बड़ी भूमिका रही।
राष्ट्रपति ने इस पर और फोकस करने को कहा है, जो उद्यमी या व्यापारी अभी योगदान नहीं दे रहे हैं, वे भी सहयोग करें। उद्यमियों ने कहा, शहर में कॉर्बन उत्सर्जन किसी भी इकाई से नहीं होता। शहर में एमएसएमई ही हैं। बड़ी औद्योगिक इकाई नहीं है। इनके जरिये ही शहर उद्योगों में नया मुकाम हासिल कर रहा है। रक्षा-प्रतिरक्षा क्षेत्र भी तेजी से उभर रहा है। राष्ट्रपति ने स्वदेशीकरण पर जोर दिया है। इस मौके पर सुधींद्र जैन, पीयूष अग्रवाल, महेंद्र मोदी आदि मौजूद हे।