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सामाजिक सद्भाव की मिसाल राष्ट्रपति का गांव: लगातार 15 साल तक चुने गए मुस्लिम प्रधान
Mon, 28 Jun 2021 06:36 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 28 Jun 2021 06:36 AM IST
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परौंख
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का पैतृक गांव परौंख सामाजिक सद्भाव की भी मिसाल है। यहां पांच हजार मतदाताओं में सिर्फ तीन सौ मुस्लिम मतदाता होने के बाद भी लगातार 15 साल तक मुस्लिम प्रधान चुना गया। राष्ट्रपति ने भी परौंख में मंच से गांव के सामाजिक सद्भाव पर गर्व महसूस किया।
संबोधन के दौरान अपने साथियों में सामाजिक सद्भाव में अहम भूमिका निभाने वाले तुराब खां और सोहराब खां का जिक्र भी किया। गांव में पिछले महीने संग्राम सिंह प्रधान चुने गए हैं। इसके पहले पांच सालों तक बलवान सिंह यादव ग्राम प्रधान रहे। पांच साल पहले लगातार 15 साल तक मुस्लिम प्रधान चुना गया।
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संबोधन के दौरान अपने साथियों में सामाजिक सद्भाव में अहम भूमिका निभाने वाले तुराब खां और सोहराब खां का जिक्र भी किया। गांव में पिछले महीने संग्राम सिंह प्रधान चुने गए हैं। इसके पहले पांच सालों तक बलवान सिंह यादव ग्राम प्रधान रहे। पांच साल पहले लगातार 15 साल तक मुस्लिम प्रधान चुना गया।
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पहले मोहम्मद सुलेमान, अगली बार सलीम खान और इसके बाद पांच सालों के लिए सुलेमान ग्राम प्रधान रहे। परौंख गांव में एक मस्जिद है, जिसे हसन मस्जिद के नाम से जाना जाता है। उसी परिसर से जुड़ा मदरसा गुलशन-ए-रजा है। यहां पर हर त्योहार बेहद सद्भाव के साथ मनाया जाता है। सभी एक-दूसरे के हर त्योहार में शामिल होते हैं।
गांव में ब्राह्मण, क्षत्रिय समेत हिंदू समाज के सभी वर्गों का सहयोग यहां के मुसलमानों को मिलता है। मेरी दुआ है कि यह भाईचारा हमेशा बना रहे। लोग भारत के राष्ट्रपति के गांव को भाईचारा की मिसाल के तौर हमेशा याद रखें।
मोहम्मद कमर जावेद खां
पिछले कई सालों से परौंख की मस्जिद में इमामत कर रहा हूं। कभी किसी को जरूरत होती है तो यहां के हिंदू-मुस्लिम हर वक्त खड़े रहते हैं। इतनी कम संख्या में होने के बाद भी यहां पर लोग मुस्लिम प्रधान को जिताते रहे हैं।
हाफिज मोहम्मद सद्दाम
गांव में ब्राह्मण, क्षत्रिय समेत हिंदू समाज के सभी वर्गों का सहयोग यहां के मुसलमानों को मिलता है। मेरी दुआ है कि यह भाईचारा हमेशा बना रहे। लोग भारत के राष्ट्रपति के गांव को भाईचारा की मिसाल के तौर हमेशा याद रखें।
मोहम्मद कमर जावेद खां
पिछले कई सालों से परौंख की मस्जिद में इमामत कर रहा हूं। कभी किसी को जरूरत होती है तो यहां के हिंदू-मुस्लिम हर वक्त खड़े रहते हैं। इतनी कम संख्या में होने के बाद भी यहां पर लोग मुस्लिम प्रधान को जिताते रहे हैं।
हाफिज मोहम्मद सद्दाम