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Kanpur News: आईआईटी की सभी ब्रांच में एआई को शामिल करने की तैयारी
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कानपुर। इंडस्ट्री की मांग को देखते हुए अब आईआईटी कानपुर सभी ब्रांच में एआई को शामिल करने की तैयारी में है। कंप्यूटर साइंस के अलावा अन्य पारंपरिक ब्रांचों को भी एआई से लैस किया जाएगा। यह बदलाव संस्थान में स्थापित वाधवानी स्कूल ऑफ एआई एंड इंटेलीजेंस सिस्टम के तहत हुआ है।
दुनिया में बढ़ रहे एआई के प्रयोग को ध्यान में रखते हुए आईआईटी कानपुर ने भी इसके दायरे को बढ़ाने का मन बना लिया है। अब सिविल और इलेक्टि्रकल ब्रांच के छात्र भी अपने पढ़ाई को एआई से मजबूत कर सकेंगे। भविष्य में स्टार्टअप भी करना चाहते हैं तो एआई की मदद के लिए निर्भरता खत्म होगी।
एआई के उपयोग से नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। सिविल इंजीनियरिंग में एआई के उपयोग सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा जिससे शहरों को भी स्मार्ट बनाया जा सकेगा। भूकंपीय विश्लेषण कर दुनिया को तबाही से बचाने में मदद करेंगे। मैकेनिकल में एआई रोबोटिक्स की मदद मशीनों की क्षमता को बढ़ाने, केमिकल में एआई के उपयोग प्रक्रिया अनुकूलन और दक्षता बढ़ाने के लिए किया जाएगा। इसके अलावा कृषि, चिकित्सा, डिफेंस समेत सभी सेक्टर में एआई के उपयोग को बढ़ाने का प्रयास है।
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संस्थान में स्कूल ऑफ एआई एंड इंटेलीजेंस सिस्टम स्थापित किया गया है। इसकी मदद से पारंपरिक ब्रांचों में आवश्यक बदलाव के साथ नई ब्रांच भी खोलने की तैयारी है। यह कोर्स उन छात्रों के लिए प्रभावी होगा, जो सिर्फ डिजिटल स्पेस नहीं बल्कि वास्तविक दुनिया में भी काम करने वाले सिस्टम बनाना चाहते हैं। संस्थान के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान और भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत एआई है। इसकी मदद से विकसित तकनीक और रिसर्च अत्यधिक प्रभावी होगी। इसको ध्यान में रखते हुए वर्तमान में कंप्यूटर विजन, मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा और रोबोटिक्स के क्षेत्र में हो रही रिसर्च में एआई को बढ़ावा दिया जाएगा।
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दुनिया में बढ़ रहे एआई के प्रयोग को ध्यान में रखते हुए आईआईटी कानपुर ने भी इसके दायरे को बढ़ाने का मन बना लिया है। अब सिविल और इलेक्टि्रकल ब्रांच के छात्र भी अपने पढ़ाई को एआई से मजबूत कर सकेंगे। भविष्य में स्टार्टअप भी करना चाहते हैं तो एआई की मदद के लिए निर्भरता खत्म होगी।
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एआई के उपयोग से नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। सिविल इंजीनियरिंग में एआई के उपयोग सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा जिससे शहरों को भी स्मार्ट बनाया जा सकेगा। भूकंपीय विश्लेषण कर दुनिया को तबाही से बचाने में मदद करेंगे। मैकेनिकल में एआई रोबोटिक्स की मदद मशीनों की क्षमता को बढ़ाने, केमिकल में एआई के उपयोग प्रक्रिया अनुकूलन और दक्षता बढ़ाने के लिए किया जाएगा। इसके अलावा कृषि, चिकित्सा, डिफेंस समेत सभी सेक्टर में एआई के उपयोग को बढ़ाने का प्रयास है।
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संस्थान में स्कूल ऑफ एआई एंड इंटेलीजेंस सिस्टम स्थापित किया गया है। इसकी मदद से पारंपरिक ब्रांचों में आवश्यक बदलाव के साथ नई ब्रांच भी खोलने की तैयारी है। यह कोर्स उन छात्रों के लिए प्रभावी होगा, जो सिर्फ डिजिटल स्पेस नहीं बल्कि वास्तविक दुनिया में भी काम करने वाले सिस्टम बनाना चाहते हैं। संस्थान के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान और भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत एआई है। इसकी मदद से विकसित तकनीक और रिसर्च अत्यधिक प्रभावी होगी। इसको ध्यान में रखते हुए वर्तमान में कंप्यूटर विजन, मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा और रोबोटिक्स के क्षेत्र में हो रही रिसर्च में एआई को बढ़ावा दिया जाएगा।