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नोएडा से पति संग गर्भवती दो सौ किमी पैदल चल पहुंची गांव, नम आंखों से बयां किया अपना दर्द
Mon, 30 Mar 2020 01:08 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 30 Mar 2020 01:08 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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पूरे देश में लॉकडाउन होने के बाद नोएडा में मजदूरी करने वाला युवक आठ माह की गर्भवती पत्नी को 25 मार्च को पैदल ही गांव के लिए निकल पड़ा। रविवार को गांव पहुंची गर्भवती ने ग्रामीणों के सामने रोते हुए बताया कि वह करीब 200 किमी पैदल चली है।
कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप से गर्भ में पल रहे बच्चे को बचाने की चिंता के चलते ऐसा कदम उठाया। औंता गांव निवासी अशोक की गर्भवती पत्नी अंजू ने बताया कि उसके पति भूमिहीन हैं और नोएडा में मकान निर्माण में मजदूरी करते हैं। बताया कि वह आठ माह की गर्भवती है।
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कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप से गर्भ में पल रहे बच्चे को बचाने की चिंता के चलते ऐसा कदम उठाया। औंता गांव निवासी अशोक की गर्भवती पत्नी अंजू ने बताया कि उसके पति भूमिहीन हैं और नोएडा में मकान निर्माण में मजदूरी करते हैं। बताया कि वह आठ माह की गर्भवती है।
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होने वाले बच्चे को लेकर वह पति के साथ पहले ही गांव आना चाहती थी, लेकिन मजदूरी मिलने में देरी होने से वह नहीं आ सकी। सीएचसी में स्वास्थ्य परीक्षण कराने के दौरान महिला के चेहरे पर थकान थी। पूछने पर उसके आंसू निकल आए।
महिला ने बताया कि रास्ते में कई राहगीरों ने मदद की। उसे व उसके पति को कई राहगीरों ने अपने वाहनों से छोड़कर मदद की, लेकिन ये मदद चंद किमी तक ही हो पाई। महिला ने बताया कि पति-पत्नी दोनों ने करीब 200 किमी का सफर पैदल ही पूरा किए हैं।
जब पैर जवाब दे जाते तो कहीं छांव में बैठकर आराम करते थे। बताया कि रविवार की सुबह उरई (जालौन) पहुंचने पर राठ के लिए एक लोडर वाहन मिला। राठ सीएचसी में स्वास्थ्य परीक्षण कराने के बाद गांव पहुंचे। कहा कि मजबूरी में अपना घर छोड़कर परदेस जाना पड़ता है।
महिला ने बताया कि रास्ते में कई राहगीरों ने मदद की। उसे व उसके पति को कई राहगीरों ने अपने वाहनों से छोड़कर मदद की, लेकिन ये मदद चंद किमी तक ही हो पाई। महिला ने बताया कि पति-पत्नी दोनों ने करीब 200 किमी का सफर पैदल ही पूरा किए हैं।
जब पैर जवाब दे जाते तो कहीं छांव में बैठकर आराम करते थे। बताया कि रविवार की सुबह उरई (जालौन) पहुंचने पर राठ के लिए एक लोडर वाहन मिला। राठ सीएचसी में स्वास्थ्य परीक्षण कराने के बाद गांव पहुंचे। कहा कि मजबूरी में अपना घर छोड़कर परदेस जाना पड़ता है।