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PPF Account Fraud: जिन खातों में रकम ज्यादा, मोबाइल नंबर नहीं पंजीकृत, उन्हें निशाना बना निकाले लाखों रुपये

Tue, 09 Jan 2024 02:34 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Tue, 09 Jan 2024 02:34 PM IST
सार

Kanpur News: एसबीआई जीटी रोड शाखा के पीपीएफ खाते में सेंधमारी के मामले में शाखा प्रबंधक प्रवीण बघेल ने सफीपुर बंगाली कॉलोनी निवासी तत्कालीन शाखा प्रबंधक ज्योति यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। बताया गया है कि सात जनवरी 2021 से 18 सितंबर 2023 के बीच चार पीपीएफ खातों से पैसा निकाला गया है।

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PPF Account Fraud, Accounts in which the amount is high, mobile number is not registered
पीड़ित विनोद कुमार अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में एसबीआई जीटी रोड शाखा के पीपीएफ खाते में सेंधमारी कर 58 लाख रुपये से अधिक हड़पने वाली महिला बैंक मैनेजर ज्योति यादव ने बेहद शातिराना ढंग से घोटाले को अंदाज दिया। जिन खातों में रकम अधिक थी और मोबाइल नंबर पंजीकृत नहीं थे, उन्हीं को निशाना बनाया। अब तक चार खातों से रकम निकाले जाने का मामला सामने आ चुका है। फर्जी हस्ताक्षर के जरिये बैंक मैनेजर ने पति की फर्म में रुपये ट्रांसफर किए हैं।  इस मामले में उच्च अफसरों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।

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तीन अक्तूबर से बैंक अपनी जांच कर रहा है, लेकिन किसी भी खाताधारक को उनके साथ हुए गबन की जानकारी नहीं दी गई। शाखा प्रबंधक प्रवीण बघेल ने सफीपुर बंगाली कॉलोनी निवासी तत्कालीन शाखा प्रबंधक ज्योति यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। बताया गया है कि सात जनवरी 2021 से 18 सितंबर 2023 के बीच चार पीपीएफ खातों से पैसा निकाला गया है। इसके बाद उन रुपयों को फर्जी दस्तावेज, हताक्षर, बाउचर व चेक से पति राहुल सिंह यादव की फर्म स्काई लाइन इंस्टीट्यूट के खाते में ट्रांसफर कर दी गई।

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खाताधारक की मौत के 20 दिन के भीतर निकाले रुपये
धोखाधड़ी की जानकारी मिलने पर शाखा पहुंचे विनोद कुमार अग्रवाल ने बताया कि उनके पिता संत अग्रवाल और मां ललिता देवी का शाखा में पीपीएफ खाता था, जो 28 साल से ज्यादा पुराने हैं। उनके पिता का देहांत 11 जून 2023 को हो गया था। एक जुलाई को उनके खाते से रुपये निकल गए। उनके पिता बीमार थे, वो चल फिर नहीं सकते थे। बैंक मैनेजर ज्योति यादव ने उनकी केवाईसी के लिए पहले एक कर्मचारी को भेजने को कहा था।

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ऐसे हुए खातों में रुपये जमा और ट्रांसफर
देहांत होने के बाद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी थी। दोनों खातों में 42 लाख से ज्यादा रुपये जमा हैं। मैनेजर ज्योति ने ललिता देवी अग्रवाल के खाते को सात जनवरी 2021 को विनोद कुमार अग्रवाल के पक्ष में नॉमिनेशन किया। इसके बाद खाते को 15 सितंबर 2023 को बंद कर 12,16,452 रुपये शैलेंद्र कुमार तिवारी व शीला तिवारी के खाते में ट्रांसफर किए। इसके बाद यह रकम अपने पति के खाते में ट्रांसफर कर ली। इसी तरह संत अग्रवाल के खाते को ममता पाल के खाते में मर्ज कर 30,86,617 रुपये एक जुलाई 2023 को अपने पति के खाते में ट्रांसफर कर दिए। गणेश मिश्रा के खाते से 15 अप्रैल 2023 को 15,78,010 रुपये भी अपने पति के खाते में ट्रांसफर किए।

बेटियों की शादी के लिए रखा था पैसा
विनोद कुमार अग्रवाल ने बताया कि पिता जब बीमार थे, तब भी पैसा नहीं निकाला था। उनकी दो बेटियां हैं। उनकी शादी के लिए पैसा रखा था, लेकिन बैंक ने धोखाधड़ी कर डाली। सुबह वो बैंक पहुंचे और खाते में जमा रकम वापस करने की मांग की। बैंक अफसर ने आश्वासन दिया कि निलंबित बैंक मैनेजर का वेतन खाता, पेंशन खाता सीज किया गया है। जिस खाते में रकम ट्रांसफर की गई है, उसे भी सीज करके रकम वापस ली जाएगी। उसके पति की भी फर्म जांच के दायरे में आ गई है।

दहशत... खाता बंद कराने पहुंचे बैंक शाखा
दरअसल, पीपीएफ खाता एक बार खुलने के बाद 15 साल तक खाता चलता है। इसके बाद पांच-पांच साल के लिए आगे बढ़ता जाता है। खाताधारक इस खाते से निकासी नहीं करते हैं। इसका लाभ ज्योति यादव ने उठाया। सूत्रों ने बताया कि जिन खातों को निशाना बनाया गया है। इसमें मोबाइल नंबर पंजीकृत नहीं था। इसलिए रुपये निकले की जानकारी भी खाताधारकों को नहीं हो सकी। इस तरह का पहला मामला सामने आने के बाद तमाम लोग शाखाओं में पहुंचे और खाता चेक किया। कई ने खाता बंद करने के आवेदन दिए लेकिन सर्वर न चलने के कारण प्रक्रिया लटक गई।

जिन-जिन शाखाओं में रहीं, वे भी जांच के घेरे में
ज्योति यादव एसबीआई में 2008 से कार्यरत हैं। जीटी रोड शाखा में घोटाला सामने आने के बाद अब हर उस ब्रांच के खातों की जांच की जा रही है, जहां-जहां वह तैनात रही है। वहीं बैंक प्रबंधन ने शाखा में जांच चलने तक नए खाते, लोन समेत नई गतिविधियों पर रोक लगा दी है। विजिलेंस जांच भी चल रही है। सूत्रों ने बताया कि पिछले साल तीन अक्तूबर से जांच शुरू कर दी थी। स्टाफ भी बदल दिया गया है। प्रवीण बघेल को भी माल रोड स्थित क्षेत्रीय कार्यालय से प्रतिनियुक्ति पर अटैच कर दिया गया है। कई स्टाफ ने यहां पर काम करने से मना भी कर दिया।

बैंक अफसर ने घोटाला किया है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है। किसी भी खाताधारक को परेशान होने की जरूरत नहीं है। जिनका भी नुकसान हुआ है, बैंक उसकी भरपाई करेगा। मामले में उचित कार्रवाई की जा रही है।  -राजीव रावत, डीजीएम

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