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चूल्हाचौका छोड़ महिलाओं ने दी मतदान को तवज्जो
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हमीरपुर के राठ के धनौरी गांव में घूंघट की ओट से प्रजातंत्र में सहभागिता निभातीं महिलाएं।
- फोटो : HAMIRPUR
भरुआसुमेरपुर। सुबह से शाम तक चूल्हा-चौका कर गृहस्थी के कार्यों में मशगूल रहने वाली महिलाओं ने सोमवार को अपने कार्यों को दरकिनार कर मतदान को तवज्जो दिया। सुबह चूल्हा-चौका छोड़कर मतदान केंद्रों की लाइनों में लग गई। सुबह से ब्लाक की सभी मतदान केंद्रों में महिलाओं की भीड़ का नजारा साफ नजर आया। इससे यह साबित हो रहा है कि गांव की सरकार बनाने के लिए महिलाएं भी काफी सजग और गंभीर हैं।
महिलाओं के लिए आरक्षित हुईं सीटों पर नजारा कुछ अलग ही दिख रहा था। चुनाव बाद यह भले ही यह घरों में कैद हो जाएं, लेकिन चुनाव के दिन खुलेआम घूमकर मतदाताओं को मतदान करने के लिए प्रेरित करती नजर आईं। आम लोगों की धारणा है कि महिलाओं की सोच चूल्हा-चौका तक ही सीमित रहती है। मगर मतदान के दिन ऐसा महसूस नहीं हुआ। क्योंकि सभी बूथों पर सुबह से मतदान के लिए महिलाओं की संख्या कहीं भी पुरुषों से कम नहीं थी। सभी मतदान केंद्रों में महिलाएं पुरुषों के बराबर लाइन लगाए खड़ीं दिखीं।
अपनी बारी आने के बाद उत्साह के साथ वोट की चोट की और मनपसंद उम्मीदवार को मतदान कर उत्साह के साथ घरों को लौट गईं। युवा मतदाता विनीता, अनीता, रश्मि, खुशबू, रुखसाना, रानी, अर्चना, कल्पना, मंजीता, आरती, पूजा कविता आदि ने कहा लोकतंत्र में उन्हें भी अपने पसंद का जनप्रतिनिधि चुनने का अधिकार है। महिलाओं के लिए आरक्षित प्रधान पद की सीट कुंडौरा, पौथिया, उजनेड़ी आदि में महिलाओं के अंदर गजब का उत्साह दिखाई दिया। यह पुरुषों की तरह गांव की गलियों में घर-घर जाकर मतदान के लिए मतदाताओं को प्रेरित करती दिखीं। जिस तरह से आज अपनी जागरुकता का एहसास करा रही हैं। उससे यह साबित होता है कि पुरुष प्रधान समाज में अब महिलाएं भी किसी से पीछे नहीं है। उन्हें भी अपने कर्तव्यों के साथ अपने अधिकारों का आभास हो गया है।
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महिलाओं के लिए आरक्षित हुईं सीटों पर नजारा कुछ अलग ही दिख रहा था। चुनाव बाद यह भले ही यह घरों में कैद हो जाएं, लेकिन चुनाव के दिन खुलेआम घूमकर मतदाताओं को मतदान करने के लिए प्रेरित करती नजर आईं। आम लोगों की धारणा है कि महिलाओं की सोच चूल्हा-चौका तक ही सीमित रहती है। मगर मतदान के दिन ऐसा महसूस नहीं हुआ। क्योंकि सभी बूथों पर सुबह से मतदान के लिए महिलाओं की संख्या कहीं भी पुरुषों से कम नहीं थी। सभी मतदान केंद्रों में महिलाएं पुरुषों के बराबर लाइन लगाए खड़ीं दिखीं।
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अपनी बारी आने के बाद उत्साह के साथ वोट की चोट की और मनपसंद उम्मीदवार को मतदान कर उत्साह के साथ घरों को लौट गईं। युवा मतदाता विनीता, अनीता, रश्मि, खुशबू, रुखसाना, रानी, अर्चना, कल्पना, मंजीता, आरती, पूजा कविता आदि ने कहा लोकतंत्र में उन्हें भी अपने पसंद का जनप्रतिनिधि चुनने का अधिकार है। महिलाओं के लिए आरक्षित प्रधान पद की सीट कुंडौरा, पौथिया, उजनेड़ी आदि में महिलाओं के अंदर गजब का उत्साह दिखाई दिया। यह पुरुषों की तरह गांव की गलियों में घर-घर जाकर मतदान के लिए मतदाताओं को प्रेरित करती दिखीं। जिस तरह से आज अपनी जागरुकता का एहसास करा रही हैं। उससे यह साबित होता है कि पुरुष प्रधान समाज में अब महिलाएं भी किसी से पीछे नहीं है। उन्हें भी अपने कर्तव्यों के साथ अपने अधिकारों का आभास हो गया है।
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