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आईजी की क्लास में पुलिस कर्मी फेल

Fri, 23 Jan 2015 04:06 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर Updated Fri, 23 Jan 2015 04:06 AM IST
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policemen fell in IG class
पुलिस कर्मियों को फरियादियों के साथ सांत्वना, प्यार भरे व्यवहार और मित्रवत पुलिसिंग की सीख देने के लिए लगी आईजी आशुतोष पांडेय की पाठशाला में पुलिसकर्मी पहले दिन ही फेल हो गए। पाठशाला में आए पुलिसकर्मियों को न तो धाराओं का ज्ञान था और न क्षेत्र के अपराधियों की जानकारी थी।
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एक मामले में दहेज पीड़िता पर ससुराल वालों की तहरीर पर डकैती की एफआईआर देख आईजी का मूड बिगड़ गया। उन्होंने विवेचक को गैरजनपद ट्रांसफर करने के साथ ही एएसपी, सीओ और एसओ के खिलाफ जांच के आदेश दिए। एक बुजुर्ग हिस्ट्रीशीटर की नियमों के विरुद्ध निगरानी कराए जाने पर तिर्वा के सीओ और एसओ के विरुद्ध भी जांच के आदेश दिए। आईजी की पाठशाला 30 जनवरी तक प्रतिदिन उनके कैंप कार्यालय में चलेगी।
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आईजी ने पाठशाला के पहले दिन जोन के नौ एसआई, दो इंस्पेक्टर, दो सीओ और 18 कांस्टेबलों को बुलाया था। क्लास शुरू होने पर आईजी ने एसआई से धाराओं के बारे में पूछा तो कई बगले झंाकने लगे। आईजी ने इन्हें कानून की किताब पढ़ने और पीड़ितों की सहायता का जब्बा पैदा करने की सलाह दी।
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उन्होंने पुलिसकर्मियों की बीट बुक भी देखी। पूछने पर कांस्टेबल क्षेत्र और अपनी बीट के अपराधियों के बारे में सटीक जानकारी नहीं दे सके। इसी दौरान तिर्वा कोतवाली से आए कांस्टेबल सतीश की आईजी ने बीट बुक देखी तो वृद्ध हिस्ट्रीशीटर सतीश चौबे (67) की निगरानी किए जाने की बात लिखी देख चौंक गए।

सतीश के खिलाफ वर्ष 1984 में डकैती और हत्या के प्रयास का एक मामला दर्ज हुआ था। तब उनकी हिस्ट्रशीट खुली थी। इसकेबाद वर्ष 1994 में पुलिस की तरफ से एक मामला दर्ज हुआ। तब से कोई मामला नहीं दर्ज हुआ। आईजी ने कांस्टेबल से हिस्ट्रीशीटर की निगरानी का नियम पूछा। वह जवाब नहीं दे सका।

आईजी ने बताया कि तीन साल तक किसी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं होता तो ऐसे हिस्ट्रीशीटर की निगरानी बंद कर दी जाती है। उन्होंने इस मामले मेंम सीओ और एसओ तिर्वा के खिलाफ प्रारंभिक जांच कराए जाने के निर्देश एसपी को दिए हैं।
छिबरामऊ थाने में दहेज पीड़िता और उसके परिवार के आठ लोगों के खिलाफ ससुराल पक्ष की ओर से डकैती का मामला दर्ज किए जाने के मामले को आईजी ने गंभीरता से लिया। छिबरामऊ की नर्गिस ने बताया कि रुखसाना का निकाह पिछले साल छिबरामऊ के आसिफ से हुआ था। आपके (आईजी) के निर्देश पर ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज हुआ।

इसके बाद पुलिस ने ससुराल पक्ष की तरफ से पीड़ित पक्ष पर ही डकैती का मामला दर्ज कर लिया। आरोप पत्र भी कोर्ट में दाखिल कर दिया। आईजी ने एसओ छिबरामऊ को खरी-खोटी सुनाई। साथ ही एएसपी, सीओ और एसओ के खिलाफ जांच के आदेश दिए। एक शख्स ने पत्नी के दूसरी शादी करने के बाद भी हर्जाना लिए जाने की शिकायत की। आईजी ने एसएसपी को मामले को जिला मानीटरिंग सेल की बैठक में रखे जाने के निर्देश दिए।



आईजी आशुतोष पांडेय का कहना है कि पाठशाला का उद्देश्य यह देखना है कि पुलिस कर्मी जमीनी स्तर पर काम क्यों नहीं कर रहे हैं। इनमें टकराने की प्रवृत्ति ज्यादा है और काम करने का जज्बा कम है। इस प्रवृत्ति को खत्म करने और पीड़ितों की सहायता का जज्बा पैदा करने के मकसद से यह पाठशाला लगाई जा रही है। शिकायतकर्ताओं की शिकायतों को इंस्पेक्टर और सबइंस्पेक्टर से डील कराया जाता है। देखा जाता है कि उनका व्यवहार और काम करने की शैली कैसी है।


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