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बच्चियों के साथ चावल और सब्जी में सल्फास मिलाकर खा गई, पति बोला- 'तेज और गुस्सैल थी'
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 17 Jul 2017 01:40 AM IST
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दो पुत्रियों समेत मां द्वारा जहर खाकर जान देने की हृदय विदारक घटना पहेली बनी है। सामूहिक आत्महत्या की वजह न तो परिजन पता लगा सके और न ही पुलिस। सभी हैरत में हैं।
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किसी रंजिश में खाने में जहर मिलाने की आशंका से परिजन इनकार कर रहे हैं। उधर, शनिवार को तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। यूपी बांदा बबेरू कस्बे के मनोरथ थोक निवासी सुनील यादव की पत्नी मंजू देवी (32) ने शुक्रवार को घर में 7 वर्षीय पुत्री निधि और छह वर्षीय अनन्या के साथ खाने में जहर मिलाकर सामूहिक आत्महत्या कर ली थी।
4 वर्षीय पुत्र रौनक को जिला अस्पताल से कानपुर रेफर कर दिया गया। जहां उसका इलाज चल रहा है। शनिवार को शवों का पोस्टमार्टम कराने आए मृतका के ससुर छेदीलाल यादव ने बताया कि शुक्रवार सुबह वह यूपी संपर्क क्रांति एक्सप्रेस ट्रेन से दिल्ली से लौटे थे।
बहू मंजू और उसके तीनों बच्चों से मिलने घर आया। तब सब कुछ सामान्य था। बच्चे और मंजू हंसी-खुशी से मिले। उन्होंने बच्चों को आम और बहू को 300 रुपये दिए। मंजू ने उन्हें पूरे सम्मान के साथ गांव के लिए विदा किया। उसकी बातचीत और हावभाव से ऐसा आभास नहीं हुआ कि वह इतना बड़ा फैसला ले चुकी है।
उधर, पोस्टमार्टम हाउस में मौजूद मृतका मंजू के पति सुनील यादव ने बताया कि मंजू बच्चों पर जान छिड़कती थी। शायद यही वजह रही कि बच्चों को भी अपने साथ ले गई। बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने की जिद पर उसने बबेरू कस्बे में मकान बनवाया और बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलवाया। पति सुनील ने कहा कि मंजू गुस्सैल और स्वभाव से तेज थी। घटना वाले दिन भी ऐसी कोई बात नहीं हुई कि मंजू इतना बड़ा कदम उठा ले।
4 वर्षीय पुत्र रौनक को जिला अस्पताल से कानपुर रेफर कर दिया गया। जहां उसका इलाज चल रहा है। शनिवार को शवों का पोस्टमार्टम कराने आए मृतका के ससुर छेदीलाल यादव ने बताया कि शुक्रवार सुबह वह यूपी संपर्क क्रांति एक्सप्रेस ट्रेन से दिल्ली से लौटे थे।
बहू मंजू और उसके तीनों बच्चों से मिलने घर आया। तब सब कुछ सामान्य था। बच्चे और मंजू हंसी-खुशी से मिले। उन्होंने बच्चों को आम और बहू को 300 रुपये दिए। मंजू ने उन्हें पूरे सम्मान के साथ गांव के लिए विदा किया। उसकी बातचीत और हावभाव से ऐसा आभास नहीं हुआ कि वह इतना बड़ा फैसला ले चुकी है।
उधर, पोस्टमार्टम हाउस में मौजूद मृतका मंजू के पति सुनील यादव ने बताया कि मंजू बच्चों पर जान छिड़कती थी। शायद यही वजह रही कि बच्चों को भी अपने साथ ले गई। बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने की जिद पर उसने बबेरू कस्बे में मकान बनवाया और बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलवाया। पति सुनील ने कहा कि मंजू गुस्सैल और स्वभाव से तेज थी। घटना वाले दिन भी ऐसी कोई बात नहीं हुई कि मंजू इतना बड़ा कदम उठा ले।
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पिता को नहीं दी आत्महत्या की खबर
मंजू की शादी 15 साल पूर्व हुई थी। आठवीं तक पढ़ी थी। मायका बबेरू कोतवाली क्षेत्र के काजीटोला गांव में है। मंजू के पिता भूरा यादव ने बताया कि डेढ़ साल पूर्व ससुरालीजनों की पिटाई से नाराज होकर मंजू बच्चों के साथ मायके आ गई थी। तीन-चार माह बाद सुलह-समझौते पर मंजू ससुराल चली गई। ससुराल में मंजू की पिटाई किसने और क्यों की ? इस सवाल पर पिता भूरा ने कोई जवाब नहीं दिया। अलबत्ता नाराजगी जताई कि सामूहिक आत्महत्या की सूचना उसे ससुराल वालों ने नहीं दी। बबेरू कस्बे में रहने वाले एक रिश्तेदार ने उन्हें फोन पर बताया।
ससुराल संपन्न, पति माता-पिता की खेती पर आश्रित
मृृतका मंजू की ससुराल हर तरह से संपन्न है। सास-ससुर के नाम 50 बीघा जमीन है। खेती का काम पति सुनील ही संभाले है। जेठ संजय यादव पेशे से ठेकेदार है। देवर देवेंद्र यादव भदवारी गांव का प्रधान है। एक अन्य देवर जितेंद्र यादव उर्फ जीतू लखनऊ में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है। घर में ट्रैक्टर, ट्यूबवेल समेत चौपहिया और दोपहिया वाहन हैं। चर्चा है कि सुनील पूरी तरह से माता-पिता पर आश्रित है। सुनील के माता-पिता ही उसके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और रोजमर्रा के सामान का खर्च का वहन करते थे। चर्चा के मुताबिक मंजू को पति का अपने माता-पिता पर ही आश्रित रहना नागवार गुजरता था। अक्सर वह यह बात पति से कहती भी थी। कयास लगाया जा रहा है कि शायद इसी तनाव और विवाद में मंजू ने बच्चों समेत मौत को गले लगा लिया।
मंजू की शादी 15 साल पूर्व हुई थी। आठवीं तक पढ़ी थी। मायका बबेरू कोतवाली क्षेत्र के काजीटोला गांव में है। मंजू के पिता भूरा यादव ने बताया कि डेढ़ साल पूर्व ससुरालीजनों की पिटाई से नाराज होकर मंजू बच्चों के साथ मायके आ गई थी। तीन-चार माह बाद सुलह-समझौते पर मंजू ससुराल चली गई। ससुराल में मंजू की पिटाई किसने और क्यों की ? इस सवाल पर पिता भूरा ने कोई जवाब नहीं दिया। अलबत्ता नाराजगी जताई कि सामूहिक आत्महत्या की सूचना उसे ससुराल वालों ने नहीं दी। बबेरू कस्बे में रहने वाले एक रिश्तेदार ने उन्हें फोन पर बताया।
ससुराल संपन्न, पति माता-पिता की खेती पर आश्रित
मृृतका मंजू की ससुराल हर तरह से संपन्न है। सास-ससुर के नाम 50 बीघा जमीन है। खेती का काम पति सुनील ही संभाले है। जेठ संजय यादव पेशे से ठेकेदार है। देवर देवेंद्र यादव भदवारी गांव का प्रधान है। एक अन्य देवर जितेंद्र यादव उर्फ जीतू लखनऊ में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है। घर में ट्रैक्टर, ट्यूबवेल समेत चौपहिया और दोपहिया वाहन हैं। चर्चा है कि सुनील पूरी तरह से माता-पिता पर आश्रित है। सुनील के माता-पिता ही उसके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और रोजमर्रा के सामान का खर्च का वहन करते थे। चर्चा के मुताबिक मंजू को पति का अपने माता-पिता पर ही आश्रित रहना नागवार गुजरता था। अक्सर वह यह बात पति से कहती भी थी। कयास लगाया जा रहा है कि शायद इसी तनाव और विवाद में मंजू ने बच्चों समेत मौत को गले लगा लिया।
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पोस्टमार्टम में सल्फास की पुष्टि
शनिवार दोपहर पोस्टमार्टम के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए तीनों शवों को लेकर पैतृक गांव लौट गए। यहां पोस्टमार्टम हाउस में शोक जताने वालों का तांता लगा रहा। फुफेरे ससुर सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मूलचंद्र यादव (रिटायर्ड कमिश्नर), सपा नेता रामऔतार यादव (भाऊ) आदि उपस्थित रहे। उधर, सूत्रों के मुताबिक पोस्टमार्टम में तीनों की मौत सल्फास से बताई गई है। शवों के लीवर में चावल और सब्जी मिली है। यही खाकर मां और बेटियों की मौत हुई थी।
शनिवार दोपहर पोस्टमार्टम के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए तीनों शवों को लेकर पैतृक गांव लौट गए। यहां पोस्टमार्टम हाउस में शोक जताने वालों का तांता लगा रहा। फुफेरे ससुर सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मूलचंद्र यादव (रिटायर्ड कमिश्नर), सपा नेता रामऔतार यादव (भाऊ) आदि उपस्थित रहे। उधर, सूत्रों के मुताबिक पोस्टमार्टम में तीनों की मौत सल्फास से बताई गई है। शवों के लीवर में चावल और सब्जी मिली है। यही खाकर मां और बेटियों की मौत हुई थी।
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मौत से पहले घर में मौजूद पानी दिया था फेंक
मृतका मंजू ने सामूहिक आत्महत्या करने से पहले घर में रखा पीने का पानी फेंक दिया था। सास और ससुर के गांव जाने के कुछ देर बाद ही मंजू ने सामूहिक आत्महत्या का निर्णय लेते हुए आनन-फानन पीने का पानी फेंक दिया। मंजू इस बात को जानती थी कि पानी नहीं मिलेगा तो सभी की मौत सुनिश्चित है। इस बात का पता का खुलासा पोस्टमार्टम हाउस आए पड़ोसियों ने किया, क्योंकि जब पड़ोसी उनके घर पहुंचे तो घर में कहीं पानी नहीं मिला।
-परिजन, पड़ोसी और पुलिस हैरत में, रंजिश में जहर देने की आशंका से परिजनों का इनकार
-कुछ देर पहले ही सास-ससुर आए थे मिलने
-पति ने मंजू को बताया तेज और गुस्सैल
मृतका मंजू ने सामूहिक आत्महत्या करने से पहले घर में रखा पीने का पानी फेंक दिया था। सास और ससुर के गांव जाने के कुछ देर बाद ही मंजू ने सामूहिक आत्महत्या का निर्णय लेते हुए आनन-फानन पीने का पानी फेंक दिया। मंजू इस बात को जानती थी कि पानी नहीं मिलेगा तो सभी की मौत सुनिश्चित है। इस बात का पता का खुलासा पोस्टमार्टम हाउस आए पड़ोसियों ने किया, क्योंकि जब पड़ोसी उनके घर पहुंचे तो घर में कहीं पानी नहीं मिला।
-परिजन, पड़ोसी और पुलिस हैरत में, रंजिश में जहर देने की आशंका से परिजनों का इनकार
-कुछ देर पहले ही सास-ससुर आए थे मिलने
-पति ने मंजू को बताया तेज और गुस्सैल