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ताजमहल के टेंडर से लाल फीताशाही पर कटाक्ष
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 18 Jun 2017 01:10 AM IST
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हास्य व्यंग्य नाटक ‘ताजमहल का टेंडर’
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अनुकृति रंगमंडल की ओर शनिवार को कानपुर के मर्चेंट चैंबर हॉल में हास्य व्यंग्य नाटक ‘ताजमहल का टेंडर’ का मंचन किया गया। इसमें नाटककार अजय शुक्ला ने कलाकारों के माध्यम से सरकारी विभागों की लाल फीताशाही और नदियों के बचाओ आंदोलन के लिए बनने वाली कमेटियों के भ्रष्टाचार पर कटाक्ष किया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जम्मू कश्मीर पुलिस के पूर्व डीजीपी एमएन सब्बरवाल रहे।
इस नाटक के माध्यम से बताया गया कि शाहजहां को ख्वाब आता है कि ताजमहल बनाया जाए। इसके लिए ताजमहल कंस्ट्रक्शन कार्पोरेशन का गठन होता है और चीफ इंजीनियर गुप्ता जी को काम का जिम्मा सौंपा जाता है। उनके विशेष सलाहकार पीए सुधीर और खास सहयोगी ठेकेदार भैया जी की भी अहम भूमिका होती है। इसके बाद कार्पोरेशन में सैकड़ों इंजीनियरों और क्लर्कों की भर्ती होती है। भैया जी अपने चाचा की यमुना किनारे पड़ी जमीन अनाप शनाप रेट में देते हैं।
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इस नाटक के माध्यम से बताया गया कि शाहजहां को ख्वाब आता है कि ताजमहल बनाया जाए। इसके लिए ताजमहल कंस्ट्रक्शन कार्पोरेशन का गठन होता है और चीफ इंजीनियर गुप्ता जी को काम का जिम्मा सौंपा जाता है। उनके विशेष सलाहकार पीए सुधीर और खास सहयोगी ठेकेदार भैया जी की भी अहम भूमिका होती है। इसके बाद कार्पोरेशन में सैकड़ों इंजीनियरों और क्लर्कों की भर्ती होती है। भैया जी अपने चाचा की यमुना किनारे पड़ी जमीन अनाप शनाप रेट में देते हैं।
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डॉ. ओमेन्द्र वर्मा
यमुना बचाओ आंदोलन के अध्यक्ष, विजिलेंस इंस्पेक्टर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के के अफसर शर्मा जी बहती गंगा में हाथ में धो लेते हैं। लाखों करोड़ों रुपया बहाने के बाद गुप्ता जी का घर, होटल और फार्म हाउस बन जाता है लेकिन ताजमहल नहीं बनता है। ताजमहल का टेंडर भी नहीं निकलता है। इसमें कलाप्र्रेमी आईएम रोहतगी, वरिष्ठ रंगकर्मी राधेश्याम दीक्षित और डॉ. ओमेंद्र कुमार का सहयोग रहा।
लोकतंत्र में पत्रकारिता की भूमिका
प्रिंट मीडिया की भूमिका फिर भी पत्रकारिता के मानकों के अनुरूप है मगर न्यूज चैनल आज अपनी विश्वसनीयता खोते जा रहे हैं। पत्रकारिता के क्षरण के लिए पत्रकार नहीं अखबारों के मालिक हैं। यह बात शनिवार दोपहर अग्निचक्र चैनल व अनुकृति रंगमंडल कानपुर के सहयोग से कानपुर मर्चेंट चेंबर प्रेक्षागृह सिविल लाइंस में आयोजित लोकतंत्र में पत्रकारिता की भूमिका विषयक संगोष्ठी में डा. ओमेन्द्र कुमार ने कही। संचालन करते हुए पी. डब्ल्यू. ए. के सचिव डा. आनन्द शुक्ला ने कहा कि आज पत्रकारिता बाजारवाद के कुचक्र में उलझ गयी है बड़े उद्योगपति व पूंजीपति लोगों के लिए लाभकारी समाचारों को ही तरजीह दी जा रही है। अध्यक्षता कुलदीप सक्सेना ने की। संगोष्ठी में अग्निचक्र चैनल के सैय्यद मोहम्मद अली चिश्ती, खालिद, पूजा श्रीवास्तव, प्रो.खान अहमद फारुक, अवधेश मिश्र, श्याम तिवारी, रूपीना मिश्रा, प्रताप सहानी ने भी अपने विचार रखे।
लोकतंत्र में पत्रकारिता की भूमिका
प्रिंट मीडिया की भूमिका फिर भी पत्रकारिता के मानकों के अनुरूप है मगर न्यूज चैनल आज अपनी विश्वसनीयता खोते जा रहे हैं। पत्रकारिता के क्षरण के लिए पत्रकार नहीं अखबारों के मालिक हैं। यह बात शनिवार दोपहर अग्निचक्र चैनल व अनुकृति रंगमंडल कानपुर के सहयोग से कानपुर मर्चेंट चेंबर प्रेक्षागृह सिविल लाइंस में आयोजित लोकतंत्र में पत्रकारिता की भूमिका विषयक संगोष्ठी में डा. ओमेन्द्र कुमार ने कही। संचालन करते हुए पी. डब्ल्यू. ए. के सचिव डा. आनन्द शुक्ला ने कहा कि आज पत्रकारिता बाजारवाद के कुचक्र में उलझ गयी है बड़े उद्योगपति व पूंजीपति लोगों के लिए लाभकारी समाचारों को ही तरजीह दी जा रही है। अध्यक्षता कुलदीप सक्सेना ने की। संगोष्ठी में अग्निचक्र चैनल के सैय्यद मोहम्मद अली चिश्ती, खालिद, पूजा श्रीवास्तव, प्रो.खान अहमद फारुक, अवधेश मिश्र, श्याम तिवारी, रूपीना मिश्रा, प्रताप सहानी ने भी अपने विचार रखे।