Banda: कालिंजर दुर्ग में मिली मूर्तियों की कराई गई फोटोग्रॉफी, भगवान नीलकंठ पर जलाभिषेक की मांगी अनुमति
कालिंजर दुर्ग के कोटि तीर्थ सरोवर की दीवार से निकलीं मूर्तियों और कलाकृतियों की फोटोग्राफी करवाई गई। 10वीं शताब्दी की मूर्तियां होने का अनुमान है। वहीं, अमर उजाला की खबर पढ़कर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे।
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बांदा जिले के ऐतिहासिक कालिंजर दुर्ग के कोटितीर्थ सरोवर की दीवार के मलबे से निकले शिवलिंग, गणेश, भगवान विष्णु और लक्ष्मी समेत अनेक देवी देवताओं की मूर्तियों निकली हैं। मंगलवार को पुरातत्व विभाग ने मूर्तियों और कलाकृतियों की फोटोग्राफी कराई।
वहीं अमर उजाला के 24 नवंबर के अंक में प्रकाशित खबर पढ़ने के बाद आसपास के ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर मूर्तियों को देखा। विभाग इन मूर्तियों की सफाई कराकर सहेजने की तैयारी कर रहा है। कालिंजर दुर्ग के कोटि तीर्थ सरोवर में निकली मूर्तियों को देखने मंगलवार को आसपास के ग्रामीण पहुंचे।
बहादुरपुर पंचायत के पूर्व प्रधान हरिश्चंद्र यादव ने साथियों के साथ मूर्तियां देखकर बताया कि यह 10वीं शताब्दी की हो सकतीं हैं। इन्हें पर्यटकों के लिए सहेज कर रखा जाए। कालिंजर विकास समिति के सदस्य अतुल सुल्लेरे, कोमल कुशवाहा ने बताया कि मुगल शासकों के समय में मूर्तियों को खंडित कर दीवारों के बीच दबा दिया गया था।
इसी तरह की मूर्तियां, खजुराहो, मंडफा किला, अजय गढ़ दुर्ग में हैं। वहीं खबर छपने के बाद पुरातत्व विभाग के संरक्षण सहायक सत्येंद्र कुमार स्टाफ सहित मूर्तियों के पास मिले। कर्मचारियों ने बताया कि मूर्तियां को विभाग द्वारा संग्रहालय में रखने के निर्देश मिले हैं।
जलाभिषेक करने की मांगी अनुमति
ब्लॉक नरैनी की ग्राम पंचायत कटरा कालिंजर के प्रधान राजेंद्र कुमार और अन्य ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के इंजीनियर को ज्ञापन सौंपा। मांग की गई है कि भगवान नीलकंठ के दरबार में जलाभिषेक बंद होने से भक्तों में निराशा है।
इन सुविधाओं को दोबारा चालू कराया जाए। इसके अलावा क्षेत्रीय लोगों को किला में आने आने के लिए टिकट का शुल्क लेने से छूट मिले। इसके लिए कार्ड जारी किए जाएं। इसके अलावा अन्य समस्याओं का समाधान कराने की मांग की गई।