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अब पेट्रोल की नो टेंशन, मेथेनॉल से दौड़ेगी बाइक, जानिए आपका क्या फायदा होगा
Sun, 05 May 2019 05:26 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 05 May 2019 05:26 PM IST
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जल्द ही पेट्रोल पर होने वाला आपका खर्च कम हो जाएगा। बाजार में ऐसी बाइकें भी उपलब्ध होंगी जो मेथेनॉल (कार्बनिक यौगिक) से दौड़ेंगी। दुनिया के टॉप वैज्ञानिकों में शुमार आईआईटी कानपुर के सीनियर प्रोफेसर अविनाश अग्रवाल और उनकी टीम ने मेथेनॉल से बाइक को चलाने की तरकीब खोज निकाली है।
पहले चरण में 100 और 125 सीसी की हीरो मोटोकॉर्प की बाइक और रॉयल इनफील्ड की बुलेट पर प्रयोग कामयाब रहा है। अब अगले चरण में कार के लिए इंजन बनाया जाएगा। खास बात है कि मेथेनॉल से वाहन चलाने पर वायु प्रदूषण भी कम होगा और पेट्रोल के मुकाबले यह 40 प्रतिशत सस्ता भी पड़ेगा। अभी तक चीन में ही इस तकनीक के सहारे पेट्रोल में 20 फीसदी मेथेनॉल मिश्रण से वाहन चलाए जाते हैं। लेकिन आईआईटी ने 85 फीसदी मेथेनॉल मिश्रण से वाहन चलाने में कामयाबी हासिल की है।
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पहले चरण में 100 और 125 सीसी की हीरो मोटोकॉर्प की बाइक और रॉयल इनफील्ड की बुलेट पर प्रयोग कामयाब रहा है। अब अगले चरण में कार के लिए इंजन बनाया जाएगा। खास बात है कि मेथेनॉल से वाहन चलाने पर वायु प्रदूषण भी कम होगा और पेट्रोल के मुकाबले यह 40 प्रतिशत सस्ता भी पड़ेगा। अभी तक चीन में ही इस तकनीक के सहारे पेट्रोल में 20 फीसदी मेथेनॉल मिश्रण से वाहन चलाए जाते हैं। लेकिन आईआईटी ने 85 फीसदी मेथेनॉल मिश्रण से वाहन चलाने में कामयाबी हासिल की है।
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जल्द बाजार में मिलेंगी ऐसी बाइकें
आईआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अविनाश अग्रवाल की टीम ने एक ऐसा इंजन बनाया है, जिसके जरिये मेथेनॉल से बाइक को चलाना मुमकिन है। प्रोफेसर अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने इसका सफल परीक्षण भी कर लिया है। अब हीरो मोटोकॉर्प और रॉयल इनफील्ड की फ्लीट ट्रायल कर रही है। अगर सब कुछ सही रहा और सरकार इसकी मंजूरी देती है तो आने वाले छह माह में मेथेनॉल मिश्रित ईंधन और इस तरह की बाइकें बाजार में उपलब्ध होंगी।
सामान्य बाइकों में भी हो सकेगा प्रयोग
प्रो. अग्रवाल ने बताया कि बीते एक साल में संस्थान में 100 सीसी से 500 सीसी वाली मोटरसाइकिलों को मेथेनॉल से चलाने पर काम किया गया। अभी तक किसी बाइक में कोई समस्या सामने नहीं आई है। प्रो. अग्रवाल के मुताबिक 100 सीसी वाहन में एम-15 प्रयोग किया जाएगा। 15 प्रतिशत मेथेनॉल और 85 प्रतिशत पेट्रोल। इसका प्रयोग सामान्य बाइकों में भी किया जा सकेगा। किसी भी बाइक के कारबोरेटर में बस थोड़ा सा बदलाव करना पड़ेगा। इसमें महज 100 रुपये तक खर्च होंगे।
आईआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अविनाश अग्रवाल की टीम ने एक ऐसा इंजन बनाया है, जिसके जरिये मेथेनॉल से बाइक को चलाना मुमकिन है। प्रोफेसर अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने इसका सफल परीक्षण भी कर लिया है। अब हीरो मोटोकॉर्प और रॉयल इनफील्ड की फ्लीट ट्रायल कर रही है। अगर सब कुछ सही रहा और सरकार इसकी मंजूरी देती है तो आने वाले छह माह में मेथेनॉल मिश्रित ईंधन और इस तरह की बाइकें बाजार में उपलब्ध होंगी।
सामान्य बाइकों में भी हो सकेगा प्रयोग
प्रो. अग्रवाल ने बताया कि बीते एक साल में संस्थान में 100 सीसी से 500 सीसी वाली मोटरसाइकिलों को मेथेनॉल से चलाने पर काम किया गया। अभी तक किसी बाइक में कोई समस्या सामने नहीं आई है। प्रो. अग्रवाल के मुताबिक 100 सीसी वाहन में एम-15 प्रयोग किया जाएगा। 15 प्रतिशत मेथेनॉल और 85 प्रतिशत पेट्रोल। इसका प्रयोग सामान्य बाइकों में भी किया जा सकेगा। किसी भी बाइक के कारबोरेटर में बस थोड़ा सा बदलाव करना पड़ेगा। इसमें महज 100 रुपये तक खर्च होंगे।
मिश्रण में 85 फीसदी मेथेनॉल
देश में फिलहाल पेट्रोल में 10 फीसदी मेथेनॉल मिलाकर बेचा जाता है। चीन में 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण वाला ईंधन उपलब्ध है। आईआईटी ने 85 फीसदी मेथेनॉल में 15 फीसदी पेट्रोल के मिश्रण से वाहन चलाने की तरकीब खोजी है। मौजूदा समय में देश में पेट्रोल की कीमत 70-80 रुपये प्रति लीटर है, जबकि एक लीटर मेथेनॉल की कीमत 20 रुपये होती है। प्रो. अग्रवाल ने दावा किया कि अगर ये बाइकें सड़कों पर चलने लगेंगी तो न केवल प्रदूषण का स्तर बेहद कम होगा बल्कि 10 प्रतिशत पेट्रोल और डीजल का आयात भी कम हो जाएगा।
आसानी से तैयार हो सकेगा मेथेनॉल
प्रो. अग्रवाल के मुताबिक मेथेनॉल को आसानी से तैयार किया जा सकता है। मेथेनॉल का निर्माण कृषि अपशिष्ट उत्पाद (गन्ना, शकरकंद), हाईएस कोल और शहरी अपशिष्ट से किया जा सकता है। मेथेनॉल को जल परिवहन के लिए भरोसेमंद ईंधन माना जाता है, क्योंकि यह भारी ईंधन का अच्छा विकल्प है। प्रो. अग्रवाल ने बताया कि मेथेनॉल हल्का, वाष्पशील, रंगहीन और ज्वलनशील है। यह एक कार्बनिक यौगिक है, इसलिए इसे काष्ठ अल्कोहल भी कहते हैं। मेथेनॉल पूरी तरह से स्वदेशी ईंधन होगा। इससे भारत की अर्थव्यवस्था पेट्रोल के आयात से मुक्ति की दिशा में चल सकेगी।
हर तरफ से सरकार कोशिश में जुटी
प्रो. अग्रवाल ने बताया कि सरकार मेथेनॉल का प्रयोग बढ़ाने और इस तरह की तकनीक को बढ़ावा देने के लिए हर स्तर पर काम कर रही है। नीति आयोग के सलाहकार प्रो. वीके सारस्वत ने इसके लिए पांच अलग-अलग टास्क फोर्स का गठन किया है जो मेथेनॉल इकोनॉमी के अलग-अलग पहलुओं पर काम कर रही है। चुनाव के बाद इस क्षेत्र में बड़ी घोषणा की संभावना है।
देश में फिलहाल पेट्रोल में 10 फीसदी मेथेनॉल मिलाकर बेचा जाता है। चीन में 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण वाला ईंधन उपलब्ध है। आईआईटी ने 85 फीसदी मेथेनॉल में 15 फीसदी पेट्रोल के मिश्रण से वाहन चलाने की तरकीब खोजी है। मौजूदा समय में देश में पेट्रोल की कीमत 70-80 रुपये प्रति लीटर है, जबकि एक लीटर मेथेनॉल की कीमत 20 रुपये होती है। प्रो. अग्रवाल ने दावा किया कि अगर ये बाइकें सड़कों पर चलने लगेंगी तो न केवल प्रदूषण का स्तर बेहद कम होगा बल्कि 10 प्रतिशत पेट्रोल और डीजल का आयात भी कम हो जाएगा।
आसानी से तैयार हो सकेगा मेथेनॉल
प्रो. अग्रवाल के मुताबिक मेथेनॉल को आसानी से तैयार किया जा सकता है। मेथेनॉल का निर्माण कृषि अपशिष्ट उत्पाद (गन्ना, शकरकंद), हाईएस कोल और शहरी अपशिष्ट से किया जा सकता है। मेथेनॉल को जल परिवहन के लिए भरोसेमंद ईंधन माना जाता है, क्योंकि यह भारी ईंधन का अच्छा विकल्प है। प्रो. अग्रवाल ने बताया कि मेथेनॉल हल्का, वाष्पशील, रंगहीन और ज्वलनशील है। यह एक कार्बनिक यौगिक है, इसलिए इसे काष्ठ अल्कोहल भी कहते हैं। मेथेनॉल पूरी तरह से स्वदेशी ईंधन होगा। इससे भारत की अर्थव्यवस्था पेट्रोल के आयात से मुक्ति की दिशा में चल सकेगी।
हर तरफ से सरकार कोशिश में जुटी
प्रो. अग्रवाल ने बताया कि सरकार मेथेनॉल का प्रयोग बढ़ाने और इस तरह की तकनीक को बढ़ावा देने के लिए हर स्तर पर काम कर रही है। नीति आयोग के सलाहकार प्रो. वीके सारस्वत ने इसके लिए पांच अलग-अलग टास्क फोर्स का गठन किया है जो मेथेनॉल इकोनॉमी के अलग-अलग पहलुओं पर काम कर रही है। चुनाव के बाद इस क्षेत्र में बड़ी घोषणा की संभावना है।