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Kanpur News: म्योर मिल की जमीन पर बने पांच बंगलों में रहते मिले लोग, दोबारा भेजी रिपोर्ट

Tue, 16 Sep 2025 02:53 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 16 Sep 2025 02:53 AM IST
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People found living in five bungalows built on Muir Mill land, report sent again
कानपुर। सिविल लाइंस स्थित म्योर मिल की जमीन पर मंडलायुक्त, पुलिस आयुक्त कार्यालय समेत अन्य विभागों के मंडलीय कार्यालय बनाने के लिए शासन से पत्राचार तेजी से शुरू हो गया है। मिल की करीब डेढ़ लाख वर्ग मीटर नजूल संपत्ति का जुलाई माह में एडीएम वित्त विवेक चतुर्वेदी ने सर्वे कर रिपोर्ट भेजी थी। शासन ने सर्वे रिपोर्ट पर आपत्ति कर जमीन का वास्तविक स्वरूप मांगा था। इसके बाद दोबारा सर्वे किया गया तो जमीन पर पांच बंगले बने मिले जिनमें मिल के कर्मचारी रह रहे हैं। टीम ने उनसे पूछताछ के बाद रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
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जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में सरकारी विभागों के मंडलीय कार्यालय संचालित हैं। कई विभागों के पास खुद की जमीन नहीं है। कई कलक्ट्रेट या किराये की इमारतों में संचालित हैं। इस समस्या के मद्देनजर जिला प्रशासन एक ही छत के नीचे मंडलीय कार्यालयों को बनाने के लिए लंबे समय से जमीन तलाश रहा था। बीते वर्ष सरकार की तरफ से नजूल की संपत्तियों पर सरकारी कार्यालय स्थापित करने की योजना तैयार की गई थी। इस पर जिले के अफसरों ने नजूल की खाली संपत्तियों को खोजना शुरू किया था। इसके बाद म्योर मिल की जमीन को चिह्नित किया। यह मिल कई वर्षों से बंद पड़ी है। करीब डेढ़ लाख वर्ग मीटर जमीन पर मिल निर्माण के अलावा इसका ज्यादातर हिस्सा खाली पड़ा है। जमीन के चयन के बाद तहसील की टीम ने मौके पर सर्वे किया। इसके बाद नजूल विभाग से जमीन के सारे रिकॉर्ड देखे गए। इससे पता चला कि जमीन अभी म्योर मिल के नाम है। मिल के स्वामित्व वाली जमीन को पहले सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने का प्रस्ताव एडीएम वित्त ने शासन भेजा था। हालांकि इस पर शासन ने आपत्ति कर दोबारा जमीन का वास्तविक सर्वे कर रिपोर्ट मांगी थी। इस पर तहसीलदार की टीम ने फिर से सर्वे किया जिसमें जमीन पर कितने लोग रह रहे हैं, कितने मकान बने और कितना जमीन का हिस्सा खाली पड़ा है की रिपोर्ट बनाकर दोबारा शासन भेज दी गई है।
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पहले जमीन सरकार के नाम दर्ज कराने का प्रस्ताव भेजा था जिस पर आपत्ति कर दोबारा रिपोर्ट मांगी गई थी। फिर से जमीन पर कब्जों का सर्वे कर रिपोर्ट भेज दी गई है। जल्द ही जमीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होगी।
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विवेक चतुर्वेदी, एडीएम वित्त
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