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ओपीडी में बढ़े मरीज, कोविड प्रोटोकॉल की अनदेखी
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कानपुर देहात। कोरोना के मामले घटने के साथ ही लोगों में अब संक्रमण का खौफ भी कम होने लगा है। जिला अस्पताल परिसर स्थित कोविड एल-टू वार्ड जहां खाली हैं, वहीं दूसरी ओर ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों की ओर से संक्रमण से बचाव के प्रति लापरवाही बरती जा रही है। जो फिर से संक्रमितों की संख्या को बढ़ा सकती है। बुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 335 मरीज पहुंचे।
जिले के सबसे बड़े अस्पताल में प्रशासन की अनदेखी व लोगों की लापरवाही से आने वाले समय में हालात खतरनाक हो सकते हैं। जिला अस्पताल में ओपीडी, एक्स-रे, दवा वितरण केंद्र समेत सभी जगहों पर लोगों की भीड़ कोरोना गाइडलाइन और सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन करती हुई दिखाई पड़ती है। अस्पताल का आलम यह है कि यहां डॉक्टरों को दिखाने वाले मरीजों की लंबी कतार है।
इस कतार में कहीं भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन दिखाई नहीं पड़ता है। डॉक्टरों की ओर से बार-बार मरीजों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए कहने पर भी इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बुधवार को बाल रोग व आर्थो ओपीडी के बाहर बड़ी संख्या में मरीजों की भीड़ रही।
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नेत्र रोग, सामान्य फिजीशियन, ईएनटी, त्वचा रोग सहित अन्य ओपीडी में भी काफी संख्या में मरीज पहुंचे। जिनमें अधिकांश बिना मास्क लगाए रहे और कतार में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होता नजर नहीं आया।
बिना मरीज एल-टू अस्पताल में ड्यूटी कर रहे डॉक्टर
कानपुर देहात। कोरोना की दूसरी लहर का असर कम हो गया है। अगस्त मेें संभावित तीसरी लहर से बचाव की तैयारियां जोरों पर हैं। दूसरी लहर के दौरान जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में बनाए गए एल-टू अस्पताल मेें पिछले दो माह से एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ है। इसके बावजूद वहां पर एक एनेस्थेटिस्ट, डॉक्टर, नर्स, वार्ड ब्वॉय व चतुर्थ श्रेणी कर्मी की रोस्टर के अनुसार तीन शिफ्टों में ड्यूटी लगाई जा रही है।
जो पूरा दिन बैठकर टाइम पास करते हैं। अगर एल-टू अस्पताल के कुछ डॉक्टरों को जिला अस्पताल की ओपीडी में लगाया जाए तो मरीजों को भी काफी सहूलियत मिलेगी। वहीं दूसरी तरफ सीएमओ डेढ़ माह पहले मरीज न होने से एल-वन अस्पताल को बंद कर चुके हैं।
जिन जिलों में कोविड एल-थ्री अस्पताल नहीं है, वहां के एल-वन चिकित्सालय को बंद कर सिर्फ एल-टू अस्पताल संचालित करने का आदेश है। आपात स्थिति को देखते हुए एल-टू अस्पताल में तीन शिफ्टों मेें डॉक्टर व कर्मियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। ओपीडी में और मरीज बढ़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था कराई जाएगी। - डॉ. राजीव गुप्ता (सीएमएस जिला अस्पताल पुरुष)
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जिले के सबसे बड़े अस्पताल में प्रशासन की अनदेखी व लोगों की लापरवाही से आने वाले समय में हालात खतरनाक हो सकते हैं। जिला अस्पताल में ओपीडी, एक्स-रे, दवा वितरण केंद्र समेत सभी जगहों पर लोगों की भीड़ कोरोना गाइडलाइन और सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन करती हुई दिखाई पड़ती है। अस्पताल का आलम यह है कि यहां डॉक्टरों को दिखाने वाले मरीजों की लंबी कतार है।
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इस कतार में कहीं भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन दिखाई नहीं पड़ता है। डॉक्टरों की ओर से बार-बार मरीजों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए कहने पर भी इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बुधवार को बाल रोग व आर्थो ओपीडी के बाहर बड़ी संख्या में मरीजों की भीड़ रही।
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नेत्र रोग, सामान्य फिजीशियन, ईएनटी, त्वचा रोग सहित अन्य ओपीडी में भी काफी संख्या में मरीज पहुंचे। जिनमें अधिकांश बिना मास्क लगाए रहे और कतार में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होता नजर नहीं आया।
बिना मरीज एल-टू अस्पताल में ड्यूटी कर रहे डॉक्टर
कानपुर देहात। कोरोना की दूसरी लहर का असर कम हो गया है। अगस्त मेें संभावित तीसरी लहर से बचाव की तैयारियां जोरों पर हैं। दूसरी लहर के दौरान जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में बनाए गए एल-टू अस्पताल मेें पिछले दो माह से एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ है। इसके बावजूद वहां पर एक एनेस्थेटिस्ट, डॉक्टर, नर्स, वार्ड ब्वॉय व चतुर्थ श्रेणी कर्मी की रोस्टर के अनुसार तीन शिफ्टों में ड्यूटी लगाई जा रही है।
जो पूरा दिन बैठकर टाइम पास करते हैं। अगर एल-टू अस्पताल के कुछ डॉक्टरों को जिला अस्पताल की ओपीडी में लगाया जाए तो मरीजों को भी काफी सहूलियत मिलेगी। वहीं दूसरी तरफ सीएमओ डेढ़ माह पहले मरीज न होने से एल-वन अस्पताल को बंद कर चुके हैं।
जिन जिलों में कोविड एल-थ्री अस्पताल नहीं है, वहां के एल-वन चिकित्सालय को बंद कर सिर्फ एल-टू अस्पताल संचालित करने का आदेश है। आपात स्थिति को देखते हुए एल-टू अस्पताल में तीन शिफ्टों मेें डॉक्टर व कर्मियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। ओपीडी में और मरीज बढ़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था कराई जाएगी। - डॉ. राजीव गुप्ता (सीएमएस जिला अस्पताल पुरुष)