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Kanpur News: बेसमेंट में मानव गतिविधि दरकिनार कर मनमानी से चला रहे पैथोलाॅजी व अस्पताल

Thu, 25 Jun 2026 12:59 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Thu, 25 Jun 2026 12:59 AM IST
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Pathology lab and hospital being run arbitrarily in the basement, ignoring norms regarding human activity.
कानपुर देहात। बेसमेंट (भूतल) में मानवीय गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके बावजूद जिले में कोचिंग के अलावा पैथोलाॅजी व निजी अस्पताल की गतिविधियां बेसमेंट में संचालित हैं। हालात ये हैं कि अब तक बेसमेंट में संचालित स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले संस्थान को नोटिस देना भी जरूरी नहीं समझा गया है। लखनऊ में हुए हादसे के बाद अब अफसर संजीदा जरूर हुए हैं लेकिन धरातल पर कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में 53 निजी अस्पताल, 35 क्लीनिक और 36 पैथोलॉजी पंजीकृत हैं। इनकी हकीकत जांचने के लिए बुधवार को संवाद न्यूज एजेंसी ने पड़ताल की तो कई निजी अस्पतालों में बेसमेंट में मानव गतिविधियां संचालित मिली। किसी में मेडिकल स्टोर, पैथोलॉजी तो किसी में अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे जांच की सुविधा संचालित दिखी। अकबरपुर में माती मार्ग स्थित एक निजी अस्पताल में बेसमेंट में ओपीडी का बोर्ड लगा मिला। एक निजी अस्पताल में भी बेसमेंट में अस्पताल की गतिविधियां चलती दिखीं।
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इसी प्रकार पुखरायां, डेरापुर व रूरा में भी बेसमेंट में स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हैं। बेसमेंट में पैथोलॉजी, ब्लडबैंक, एक्सरे व अल्ट्रासाउंड सेंटर भी धड़ल्ले से संचालित हैं। बेसमेंट का प्रयोग पार्किंग के लिए किया जा सकता है लेकिन किसी मानव गतिविधियाें की कतई छूट नहीं है। जिन निजी अस्पतालों में फायर एनओसी दी गई है वहां भी बेसमेंट में किसी मानवीय गतिविधि की छूट नहीं है। संचालक मनमानी पूर्वक स्वास्थ्य सेवाएं संचालित किए हैं।
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मानकों की अनदेखी कर संचालित हो रहे निजी अस्पताल, क्लीनिक, पैथोलॉजी या फिर अल्ट्रासाउंड पर रोक के लिए छापेमारी तो खूब होती है लेकिन जिम्मेदारों को बेसमेंट में संचालित स्वास्थ्य सेवाएं नजर नहीं आती हैं। इसी प्रकार कोचिंग या अन्य पठन पाठन संस्थान बेसमेंट में संचालित नहीं होना चाहिए। इसके बाद भी बेसमेंट में कोचिंग संचालित की जा रही थी। लखनऊ में हादसे के बाद अफसर चेते तो मंगलवार को जांच में सच सामने आया है। जिला प्रशासन की टीमों ने पठन पाठन वाले कुल 37 संस्थान बंद कराए हैं। कुल 68 संस्थान चेक करने का लक्ष्य था, इसमें 54 संस्थान जांच जा सके। हालांंकि अभी 31 संस्थानों की जांच शेष है। इसकी वजह रही कि छह कोचिंग संस्थान बंद मिले। पांच संस्थान पते पर नहीं मिले हैं। जबकि शेष में अफसर नहीं पहुंच सके।
बता दें कि लखनऊ में अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेसमेंट में अस्पताल, मॉल, कोचिंग व अन्य कारोबारी गतिविधि बंद कराने के निर्देश दिए हैं। आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां रोकने पर भी जोर दिया है। कहा है कि व्यापक फायर ऑडिट कराई जाए।
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मकानों में अस्पताल, आने जाने का एक ही रास्ता
जिले में अस्पतालों को लाइसेंस व अग्निशमन विभाग से एनओसी देते समय कई बातों को अनदेखा किया गया है। बड़ी-बड़ी सुविधाओं का दावा करने वाले कई अस्पताल, नर्सिंग होम छोटे मकानों में संचालित हो रहे हैं। बेतरतीब नक्शे वाले मकानों में आने जाने का एक ही रास्ता है वह भी संकरा। वहीं कई घनी आबादी क्षेत्र में हैं। इसके साथ ही आग से बचाव के इंतजाम भी पूरे नहीं हैं। इसके बाद भी अग्निशमन विभाग और स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी पर इनका संचालन हो रहा है। यही वजह है कि जिले में मानकों को संचालक ठेंगा दिखा रहे हैं।
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आग से बचाव के लिए ये इंतजाम जरूरी
- पांच हजार लीटर पानी भंडारण क्षमता का ओवर हेड टैंक
- आग बुझाने के लिए जरूरी होजरील (जीन पाइप)
- लैंडिंग वाल्व (जीन पाइप जोड़कर पानी लेने का विकल्प)
- प्रेशर से पानी की बौछार के लिए पांच एचपी मोटर पंप
- फायर एलार्म व परिसर के अनुसार जरूरी अग्निशमन यंत्र
- दो निकास द्वार व हवादार खिड़कियां
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इन नियम से करते संचालक बचाव
छोटे परिसर व कम ऊंचाई के भवन पर एनबीसी के नियम लागू नहीं होते हैं। इसका संचालक फायदा उठाते हैं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रतीक श्रीवास्तव ने बताया कि 100 स्क्वायर मीटर से कम वाले एरिया व नौ मीटर ऊंचाई वाले परिसर में नेशनल बिल्डिंग कोड लागू नहीं होता है। इसका फायदा संचालक उठाते हैं। हालांकि आग से बचाव के लिए जरूरी इंतजाम होना चाहिए। इससे आग लगने की घटना पर त्वरित मदद मिलती है। कई बार फायर स्टेशन से दमकल कर्मियाें को पहुंचने में कुछ समय लगता है तब तक अधिक नुकसान हो चुका होता है।
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बयान...
वाहन पार्किंग के लिए बेसमेंट का प्रयोग किया जा सकता है। यहां मानव गतिविधियां करने पर रोक है। किसी भवन के बेसमेंट में फायर एनओसी नहीं दी गई है। अब तक जांचे गए कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी व कंप्यूटर सेंटर में अग्निसुरक्षा व जीवन रक्षा के लिए जरूरी इंतजाम नहीं मिले हैं। बेसमेंट में स्वास्थ्य सेवाएं संचालित होने की जानकारी कराकर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

- प्रतीक श्रीवास्तव, मुख्य अग्निशमन अधिकारी।
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शासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। जिले में किसी भी जगह कोई भी स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी गतविधि यदि बेसमेंट में चल रही होगी तो उसे बंद कराया जाएगा। इसके लिए विभागीय स्तर पर जांच भी कराई जाएगी। - डॉ. जय गोविंद, सीएमओ
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