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गांव की राजनीति: पंचायत चुनाव में पीएचडी, एमबीबीएस और एमटेक वाले भी कूदे
Mon, 12 Apr 2021 04:03 PM IST
शिखा पांडेय
राघवेंद्र सिंह यादव
राघवेंद्र सिंह यादव
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 12 Apr 2021 04:03 PM IST
सार
- भीतर ब्लॉक में प्रधानी, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशियों में केवल छह प्रतिशत ही निरक्षर
- 1068 प्रत्याशियों में 40 प्रतिशत हाईस्कूल पास, 15 प्रतिशत स्नातक तो पांच प्रतिशत परास्नातक
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पंचायत चुनाव
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
घाटमपुर के भीतरगांव ब्लॉक में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इस बार शिक्षित उम्मीदवारों की संख्या अधिक है। एलएलबी, एलएलएम, पीएचडी व एमबीबीएस से लेकर एमटेक, बीटेक पास भी ग्रामीण राजनीति के दंगल में कूद चुके हैं। प्रधानी, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य के सभी उम्मीदवारों में केवल छह प्रतिशत प्रत्याशी ही निरक्षर हैं।
इस ब्लॉक में 77 ग्राम पंचायतें, 89 क्षेत्र पंचायतें और चार जिला पंचायतें हैं। प्रधान के लिए 577, बीडीसी के लिए 433 और जिला पंचायत सदस्य के लिए 58 उम्मीदवार जोर आजमाइश कर रहे हैं। 40 प्रतिशत प्रत्याशी हाईस्कूल पास हैं। 15 प्रतिशत स्नातक तो पांच प्रतिशत परास्नातक तक शिक्षित हैं। बाकी 34 प्रतिशत प्रत्याशी कक्षा पांच तो कक्षा आठ पास हैं।
कमालपुर गांव निवासी अतुल कुमार सचान पढ़े लिखे उम्मीदवारों में सबसे आगे हैं। प्रधानी का चुनाव लड़ने वाले अतुल एमएससी, एमएड, एमफिल व पीएचडी समेत अन्य पढ़ाई करने के बाद अब एलएलबी की पढ़ाई कर रहे हैं। अतुल बताते हैं कि ग्रामीण राजनीति से हटकर उनका मकसद गांव में अधिक से अधिक योजनाओं को लाकर विकास करना है।
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पसेमा गांव निवासी महेंद्र सिंह यादव प्रधान पद के उम्मीदवार हैं। उच्च शिक्षा लेने के बाद एलएलबी की पढ़ाई करने वाले महेंद्र गांव के उम्रदराज प्रत्याशी भी हैं। उनका कहना है कि परिवर्तन लाना है तो उच्च शिक्षित लोगों को ग्रामीण राजनीति में आना होगा। वकालत करने वाले प्रत्याशी महेंद्र सिंह यादव फिलहाल गांव में खेती किसानी में भी खासी रुचि रखते हैं।
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इस ब्लॉक में 77 ग्राम पंचायतें, 89 क्षेत्र पंचायतें और चार जिला पंचायतें हैं। प्रधान के लिए 577, बीडीसी के लिए 433 और जिला पंचायत सदस्य के लिए 58 उम्मीदवार जोर आजमाइश कर रहे हैं। 40 प्रतिशत प्रत्याशी हाईस्कूल पास हैं। 15 प्रतिशत स्नातक तो पांच प्रतिशत परास्नातक तक शिक्षित हैं। बाकी 34 प्रतिशत प्रत्याशी कक्षा पांच तो कक्षा आठ पास हैं।
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कमालपुर गांव निवासी अतुल कुमार सचान पढ़े लिखे उम्मीदवारों में सबसे आगे हैं। प्रधानी का चुनाव लड़ने वाले अतुल एमएससी, एमएड, एमफिल व पीएचडी समेत अन्य पढ़ाई करने के बाद अब एलएलबी की पढ़ाई कर रहे हैं। अतुल बताते हैं कि ग्रामीण राजनीति से हटकर उनका मकसद गांव में अधिक से अधिक योजनाओं को लाकर विकास करना है।
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पसेमा गांव निवासी महेंद्र सिंह यादव प्रधान पद के उम्मीदवार हैं। उच्च शिक्षा लेने के बाद एलएलबी की पढ़ाई करने वाले महेंद्र गांव के उम्रदराज प्रत्याशी भी हैं। उनका कहना है कि परिवर्तन लाना है तो उच्च शिक्षित लोगों को ग्रामीण राजनीति में आना होगा। वकालत करने वाले प्रत्याशी महेंद्र सिंह यादव फिलहाल गांव में खेती किसानी में भी खासी रुचि रखते हैं।
असधना गांव निवासी डॉ. अजीत सचान की नजर ब्लॉक प्रमुख के पद पर है। एमबीबीएस करने वाले डॉ. अजीत सचान गूजा और कैथा क्षेत्र पंचायत से बीडीसी प्रत्याशी हैं। बताते हैं कि अभी हास्पिटल के कमरे में बैठकर स्वास्थ्य सेवाएं चला रहा हूं। डॉ. सचान ग्रामीण इलाकों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा देने की पैरोकारी करते हैं।
सचौली गांव निवासी फूल सिंह यादव सेवानिवृत्त सैनिक हैं। अब गांव में प्रधानी का चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीति विज्ञान से परास्नातक करने के बाद एलएलबी, एलएलएम और पीजीडीएलएल भी कर रखा है। तहसील नर्वल में वकालत करने वाले फूलसिंह बताते हैं कि गांवों में पेयजल की समस्या दूर करना और बिना सुविधा शुल्क लिए लाभार्थियों को योजना का लाभ दिलवाने की ठान रखी है।
सचौली गांव निवासी फूल सिंह यादव सेवानिवृत्त सैनिक हैं। अब गांव में प्रधानी का चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीति विज्ञान से परास्नातक करने के बाद एलएलबी, एलएलएम और पीजीडीएलएल भी कर रखा है। तहसील नर्वल में वकालत करने वाले फूलसिंह बताते हैं कि गांवों में पेयजल की समस्या दूर करना और बिना सुविधा शुल्क लिए लाभार्थियों को योजना का लाभ दिलवाने की ठान रखी है।
पहले पंचायत चुनावों में कम पढ़े लिखे लोग ज्यादा शामिल होते थे, लेकिन अब शिक्षित लोग आ रहे हैं तो हर लिहाज से यह अच्छा संकेत है। शिक्षित व्यक्ति अधिकारों और जिम्मेदारी के प्रति जागरूक रहता है। इस बदलाव से समाज को भी लाभ मिलेगा। - रामनरेश पाल, निर्वाचन अधिकारी, ब्लॉक भीतरगांव