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घटेंगी इंजीनियरिंग की एक लाख सीटें, देख पाएंगे परीक्षा की ऑनलाइन अटेंडेंस

Thu, 28 Dec 2017 04:25 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 28 Dec 2017 04:25 PM IST
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One lakh seats of engineering Will decrease in country
डेमो पिक
नए शैक्षिक सत्र में देश में इंजीनियरिंग की एक लाख सीटें घट जाएंगी। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन ने नए सत्र में उन कॉलेजों की सीटें कम करने का फैसला लिया है जहां पिछले सत्र में कम प्रवेश हुए। इसके अलावा उन कालेजों को भी कोर्स की मान्यता नहीं दी जाएगी, जहां एक भी एडमिशन नहीं हुआ। ये कॉलेज बंद हो जाएंगे।
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बुधवार को ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) ने 2018-19 के अप्रूवल प्रॉसेज हैंडबुक और रूल्स रेगुलेशन को जारी कर दिया। इसके मुताबिक नए सत्र के लिए जिन कॉलेजों को अप्रूवल चाहिए वह एक जनवरी से 31 जनवरी 2018 तक एआईसीटीई की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। एआईसीटीई ने फैसला लिया है कि जिन कॉलेजों में पिछले पांच सालों में 50 प्रतिशत से कम प्रवेश हुए हैं उनकी सीटें 50 प्रतिशत घटाई जाएंगी। विभिन्न प्रदेशों से मिले आंकड़ों से एआईसीटीई ने ऐसे दो हजार इंजीनियरिंग कॉलेजों को चिन्हित किया है जहां प्रवेश 50 प्रतिशत से कम रहे हैं।
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यूपी के कॉलेजों की बात करें तो एकेटीयू की ओर से एआईसीटीई को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक सत्र 2017-18 में कुल 23 ऐसे कॉलेज हैं जिनमें एडमिशन शून्य रहा है जबकि 40 ऐसे कॉलेज हैं, जिनमें 50 प्रतिशत से कम एडमिशन हुए। ऐसे में अकेले बीस हजार सीटें यूपी से कम होंगी। हालांकि कई कॉलेजों ने एआईसीटीई से दो वर्ष का समय मांगा है। इन संस्थानों का कहना है कि वह दो सालों में अपने यहां छात्रों की संख्या बढ़ा लेंगे। एआईसीटीई अधिकारियों की मानें तो ऐसे संस्थानों को एक मौका दिया जाएगा।  
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17 कॉलेजों ने सभी कोर्स बंद करने का भेजा प्रस्ताव
एकेटीयू से संबद्ध प्रदेश के 17 इंजीनियरिंग कॉलेजों ने विश्वविद्यालय और एआईसीटीई को पत्र भेजकर अपने सभी कोर्स बंद करने लिए आवेदन किया है। इनमें से तीन के आवेदन स्वीकार किए जा चुके हैं। जबकि 93 निजी कॉलेजों ने खुद अपने कॉलेज की 25 फीसदी सीटें घटाने का प्रस्ताव विश्वविद्यालय और एआईसीटीई को भेजा है। इनके प्रस्ताव को भी स्वीकार कर लिया गया है।


ऑनलाइन देख पाएंगे परीक्षा की अटेंडेंस
इंजीनियरिंग की घटती सीटों के बीच एकेटीयू ने एक और नई पहल शुरू कर दी है। इस सत्र से छात्रों के लिए ऑनलाइन अटेंडेंस देखने की व्यवस्था भी शुरू कर दी है। इसके मुताबिक अब छात्र परीक्षा में बैठने के बाद एकेटीयू की वेबसाइट पर यह देख पाएंगे की उनके कॉलेज ने उनकी अटेंडेंस लगाई है या नहीं। अगर नहीं लगाई है तो वह तत्काल इसकी शिकायत कर सकते हैं।


तीन सत्र में लगातार घटीं हैं सीटें
दरअसल सीटों के कम होने का आंकड़ा पिछले तीन साल से लगातार चल रहा है। एआईसीटीई की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक सत्र 2014-15 में इंजीनियरिंग की कुल 1901501 सीटें अप्रूव्ड थीं। इसमें करीब 50 फीसदी से ज्यादा खाली रह गए थे। इसके चलते एआईसीटीई ने सत्र 2015-16 में 56,859 सीटें घटाकर 1844642 कर दी। सत्र 2016-17 में इंजीनियरिंग की 92346 सीटों को घटाकर 1752296 कर दिया गया। प्रवेश कम होने का सिलसिला जारी रहा। इसके चलते 2017-18 में भी 89,808 सीटें घटा दी गई। सत्र 2017-18 में कुल 1662488 सीटें थीं। इस बार भी करीब 50 प्रतिशत सीटें खाली रह गई हैं। इसलिए एआईसीटीई ने इस बार करीब एक लाख सीटों को कम करने का फैसला लिया है। 



कई ऐसे लोग जो केवल एडमिशन करा लेते थे, वह अब इंजीनियरिंग की पढ़ाई में सख्ती के चलते नई प्रक्रिया से दूर हो गए हैं। यह एक तरह से शुभ संकेत हैं कि आने वाले दिनों में पढ़ने वाले बच्चों के पास ही इंजीनियरिंग की डिग्री होगी।
प्रो. विनय कुमार पाठक, कुलपति (डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम यूनिवर्सिटी)
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