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ठंड की दस्तक पर रैन बसेरे बदहाल, कहीं गंदगी तो कहीं जलभराव
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झींझक स्थित बदहाल रैन बसेरा परिसर। (संवाद)
- फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात। ठंड का असर बढ़ने लगा है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कमी आई है। वहीं जिले के अधिकांश रैन बसेरे बदहाल पड़े हैं। कई रैन बसेरों में ताले लटक रहे हैं तो कई जगहों पर गंदगी फैली है। राजपुर के रैन बसेरा के आसपास जलभराव है। इससे रात के समय दूर दराज से आने वाले मुसाफिरों, मजदूरी पेशा लोगों को भटकना पड़ रहा है।
जिले में हर साल ठंड के मौसम में 13 रैन बसेरे सक्रिय किए जाते हैं। इसमें सात अस्थायी हैं, जबकि छह रैन बसेरे स्थायी है। एडीएम ने तीन दिन पूर्व सभी निकायों को रैन बसेरा सक्रिय करने के निर्देश दिए थे। हालांकि अभी तक निकायों में रैन बसेरा सक्रिय नहीं किए गए हैं। ऐसेे में रात में भटक कर आए राहगीरों को रुकने का कोई इंतजाम नहीं है।
झींझक के क्रय विक्रय परिसर में अस्थायी रैन बसेरे में कोई सूचना बोर्ड या फिर सूचना तक चस्पा नहीं है। ऐसे में जरूरतमंद को रात्रि विश्राम के लिए आश्रय मिलने पर संशय बना है। यहां परिसर बेहद गंदा है।
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नगर निकाय के लिपिक बृजेश कुमार ने बताया कि परिसर का रंग रोगन होना है। कलक्ट्रेट के आपदा लिपिक वीरेंद्र राव ने बताया कि रैन बसेरे संबंधी सूचना निकायों से मांगी गई है। एडीएम वित्त एवं राजस्व जेपी गुप्ता ने बताया कि सभी निकायों में रैन बसेरे जल्द सक्रिय किए जाएंगे।
अकबरपुर का रैन बसेरा बना डस्टबिन स्टोर
अकबरपुर में पराग डेयरी के पास नगर पंचायत का रैन बसेरा बना है। पिछले साल यहां हॉल में प्लास्टिक के डस्टबिन रख दिए गए। इसकी वजह से रैन बसेरा संचालित नहीं किया गया। इस साल भी यहां रैन बसेरा संचालन की कोई तैयारी नहीं की गई है। यह भवन पुराना बस स्टाप के बेहद नजदीक है। वहीं रूरा चौराहा व ओवर ब्रिज चौराहा भी नजदीक है।
जिला अस्पताल रैन बसेरा में भी अव्यवस्था हावी
जिला अस्पताल में शिव ग्रामोद्योग संस्थान कानपुर रैन बसेरा का संचालन करता है। आठ कमरों में 60 बेड उपलब्ध है। पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी नगर निकाय की है। अलबत्ता यह जिम्मेदारी निभाने के प्रति निकाय प्रशासन संजीदा नहीं है। सोमवार दोपहर 12 बजे तक यहां बिस्तर अस्त व्यस्त मिले। साफ सफाई नहीं की गई थी। बेड पर गंदा तकिया रखा था। शौचालय भी गंदे मिले।
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जिले में हर साल ठंड के मौसम में 13 रैन बसेरे सक्रिय किए जाते हैं। इसमें सात अस्थायी हैं, जबकि छह रैन बसेरे स्थायी है। एडीएम ने तीन दिन पूर्व सभी निकायों को रैन बसेरा सक्रिय करने के निर्देश दिए थे। हालांकि अभी तक निकायों में रैन बसेरा सक्रिय नहीं किए गए हैं। ऐसेे में रात में भटक कर आए राहगीरों को रुकने का कोई इंतजाम नहीं है।
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झींझक के क्रय विक्रय परिसर में अस्थायी रैन बसेरे में कोई सूचना बोर्ड या फिर सूचना तक चस्पा नहीं है। ऐसे में जरूरतमंद को रात्रि विश्राम के लिए आश्रय मिलने पर संशय बना है। यहां परिसर बेहद गंदा है।
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नगर निकाय के लिपिक बृजेश कुमार ने बताया कि परिसर का रंग रोगन होना है। कलक्ट्रेट के आपदा लिपिक वीरेंद्र राव ने बताया कि रैन बसेरे संबंधी सूचना निकायों से मांगी गई है। एडीएम वित्त एवं राजस्व जेपी गुप्ता ने बताया कि सभी निकायों में रैन बसेरे जल्द सक्रिय किए जाएंगे।
अकबरपुर का रैन बसेरा बना डस्टबिन स्टोर
अकबरपुर में पराग डेयरी के पास नगर पंचायत का रैन बसेरा बना है। पिछले साल यहां हॉल में प्लास्टिक के डस्टबिन रख दिए गए। इसकी वजह से रैन बसेरा संचालित नहीं किया गया। इस साल भी यहां रैन बसेरा संचालन की कोई तैयारी नहीं की गई है। यह भवन पुराना बस स्टाप के बेहद नजदीक है। वहीं रूरा चौराहा व ओवर ब्रिज चौराहा भी नजदीक है।
जिला अस्पताल रैन बसेरा में भी अव्यवस्था हावी
जिला अस्पताल में शिव ग्रामोद्योग संस्थान कानपुर रैन बसेरा का संचालन करता है। आठ कमरों में 60 बेड उपलब्ध है। पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी नगर निकाय की है। अलबत्ता यह जिम्मेदारी निभाने के प्रति निकाय प्रशासन संजीदा नहीं है। सोमवार दोपहर 12 बजे तक यहां बिस्तर अस्त व्यस्त मिले। साफ सफाई नहीं की गई थी। बेड पर गंदा तकिया रखा था। शौचालय भी गंदे मिले।