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बंदूकें बंद, धंधा मंद

Tue, 02 Feb 2016 02:21 AM IST
आशुतोष मिश्र, कानपुर
आशुतोष मिश्र, कानपुर Updated Tue, 02 Feb 2016 02:21 AM IST
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Off guns, business slowed
शस्त्र लाइसेंस बनाने पर हाईकोर्ट की रोक के कारण शहर में असलहा कारोबार बंद होने के कगार पर आ गया है। 14 दुकानदार दुकान बंद कर चुके हैं और असलहे न बिकने से बाकी शस्त्र दुकानदार भी महीनों से खाली बैठे हैं।
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उनका कहना है कि अगर दो -चार महीने और ऐसा रहा तो कारोबार बदलना पड़ेगा। रोक लगने से पहले हर माह शहर में सौ से डेढ़ सौ असलहा लाइसेंस बनते थे। अब सिर्फ निशानेबाज खिलाड़ियों और वरासत (पिता का लाइसेंस बेटे या बेटी के नाम) के लाइसेंस ही बन रहे हैं।
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सात अक्टूबर 2013 को हाईकोर्ट ने नए असलहा लाइसेंस बनाने पर रोक लगा दी थी। पूर्व डीएम डॉ. रोशन जैकब के समय सिर्फ एक इंटरनेशनल शूटिंग खिलाड़ी का ही लाइसेंस बना था। आम लोगों को एक भी लाइसेंस जारी नहीं किए जा रहे हैं। नतीजतन दो साल में 14 शस्त्र दुकानदारों ने लाइसेंस सरेंडर कर दिए।
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शहर में 97 शस्त्र दुकानें हैं। एडीएम सिटी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री का कहना है कि लिखा-पढ़ी में भले 97 दुकानें चल रही हों लेकिन हकीकत में 10-12 दुकानें ही काम कर रही हैं।

300 करोड़ का कारोबार 50 करोड़ में सिमटा
लाइसेंस बनने पर रोक से पहले असलहों और कारतूस बिक्री का शहर का धंधा करीब तीन सौ करोड़ सालाना का था। ब्रिटिश जमाने 1920 से चल रही दुकान के मालिक पीएन विश्वास कहते हैं कि अब यह धंधा करीब 50 करोड़ सालाना का ही बचा है। अगर लाइसेंस पर इसी तरह रोक रही तो एक-दो साल में यह धंधा पूरी तरह दम तोड़ देगा।

डोरी-बद्धी-कवर का धंधा भी सिमटा
असलहे न बिकने सेडोरी, बद्धी, रिवॉल्वर-पिस्टल रखने वाला होलस्टर, असलहों के कवर का धंधा भी ठप है। विजय नगर चौराहे पर असलहा एसेसरीज का बड़ा मार्केट है। अब यहां लगने वाली आधी से ज्यादा दुकाने सिमट चुकी हैं।


अक्सर फील्ड गन फैक्ट्री और स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री रिवाल्वर लेने के लिए प्रदेशभर से आने वाले लोग यहां से कवर, बट शू, कारतूस बेल्ट और क्लीनिंग रॉड लेते थे। लाइसेंस बनना बंद होने के बाद इनके खरीददार एकदम से घट गए। इस कारण अब यहां दो-चार दुकानें ही खुलती हैं।

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