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UP: कानपुर के दो लाख लोगों में रोगों का कारण मोटापा, हैलट-कार्डियोलॉजी में ली गई मरीजों की हिस्ट्री से खुलासा

Wed, 26 Feb 2025 01:16 PM IST
हिमांशु अवस्थी रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 26 Feb 2025 01:16 PM IST
सार

Kanpur News: निदेशक प्रोफेसर राकेश कुमार वर्मा ने बताया कि कम आयु वर्ग वाले 60 फीसदी रोगी मोटापा से ग्रस्त होते हैं। इनमें हाइपरटेंशन, डायबिटीज, फैटी लिवर होता है। कोलेस्ट्राल और ट्राईग्लीसिराइड भी बढ़ी निकलती है। ये सिंड्रोम एक्स की गिरफ्त में होते हैं।

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Obesity is cause of diseases in two lakh people of Kanpur history of patients taken in Hallet and Cardiology
एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वस्थ भारत के लिए मोटापा के खिलाफ जोरदार अभियान की वकालत की है। मानी-जानी हस्तियां अभियान की ब्रांड एंबेसडर बन गई हैं। कानपुर शहर के एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट और हैलट में दो लाख रोगी ऐसे पंजीकृत हैं, जिनके रोगों का कारण मोटापा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि मोटापे से रोगी सिंड्रोम एक्स की गिरफ्त में आ रहे हैं।

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सिंड्रोम एक्स किसी रोगी के एक साथ हृदय, धमनियों-नसों, लिवर, अग्नाशय, हाई ब्लडप्रेशर, थायरॉइड और गुर्दा रोग की गिरफ्त में आने की स्थिति को कहते हैं। जांच में ऐसे रोगियों के खून में कोलेस्ट्राल, ट्राईग्लीसिराइड भी बढ़ा रहता है। कार्डियोलॉजी में प्रतिदिन करीब 1000 हृदय रोगी की जांच के लिए आते हैं। इनमें 60 फीसदी रोगी 25 से 40 साल आयु वर्ग और 40 फीसदी रोगी इससे अधिक आयु वर्ग के होते हैं।
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ओपीडी में डायबिटीज के आठ रोगी आते हैं
निदेशक प्रोफेसर राकेश कुमार वर्मा ने बताया कि कम आयु वर्ग वाले 60 फीसदी रोगी मोटापा से ग्रस्त होते हैं। इनमें हाइपरटेंशन, डायबिटीज, फैटी लिवर होता है। कोलेस्ट्राल और ट्राईग्लीसिराइड भी बढ़ी निकलती है। ये सिंड्रोम एक्स की गिरफ्त में होते हैं। इनके रोग की शुरुआत मोटापा से होती है। 70 से 80 फीसदी रोगियों की धमनियों में ब्लॉकेज निकलता है। हैलट की मेडिसिन और सुपर स्पेशियलिटी की ओपीडी में डायबिटीज के आठ रोगी आते हैं।

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खानपान में गड़बड़ी समेत ये मुख्य कारण निकला
इनमें 50 फीसदी 20 से 30 साल उम्र के होते हैं। इनमें ज्यादातर मोटापा ग्रस्त होते हैं। इंडोक्रोनोलॉजी विभाग के प्रभारी और मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. विशाल कुमार गुप्ता ने बताया कि जब इन रोगियों की जांच कराई जाती है, तो दूसरी दिक्कतें निकलती हैं। इनमें आधे रोगी सिंड्रोम एक्स की शुरुआत होने पर अस्पताल आते हैं। कार्डियोलॉजी और हैलट में ऐसे रोगियों की हिस्ट्री ली गई, तो खानपान में गड़बड़ी, व्यायाम की कमी और तनाव मुख्य कारण निकला।

ऐसे करें बचाव

  • घी, तेल और चिकने खाघ पदार्थों का नियंत्रित सेवन करें।
  • नाश्ते को डिनर की तरह भरपूर और डिनर को नाश्ते की तरह लें।
  • मोबाइल, लैपटॉप, टीवी देखते हुए खाना न खाएं।
  • जब भोजन लें, तो कार्य या किसी और तरह के तनाव को दूर रखें।
  • नियमित व्यायाम करें, रात को खाने के बाद टहलें जरूर।
  • शराब, धूम्रपान समेत नशे की अन्य चीजों से परहेज करें।
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