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रेड जोन इकाइयों का नए सिरे से होगा सर्वे
अमर उजाला, ब्यूरो
Updated Sat, 20 Feb 2016 02:13 AM IST
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एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल) का नोटिस जारी होने के बाद रेड जोन की सूची में दर्ज औद्योगिक इकाइयाें की नए सिरे से सर्वे कराने की तैयारी हो रही है। अभी तक इस सूची में 1070 औद्योगिक इकाइयां हैं, जो हरिद्वार से लेकर कानपुर के बीच गंगा किनारे स्थित हैं।
पता चला है कि इस सर्वे में यह देखा जाएगा कि जिन इकाइयों को रेड जोन में शामिल किया गया है, उनकी वास्तविकता क्या है। ऐसा तो नहीं है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उन्हें जबरन इस श्रेणी में रखा हुआ है। दो दिन पहले एनजीटी ने गंगा प्रदूषण मसले पर सुनवाई के दौरान जारी नोटिस में पर्यावरण मंत्रालय और वन विभाग से कहा था, कि उन्होंने किस आधार पर औद्योगिक इकाइयों को रेड जोन में रखा है।
यदि यह इकाइयां लगातार प्रदूषण फैला रही हैं, तो इनको बंद क्यों न कर दिया जाए। एनजीटी के इस नोटिस के बाद रेड जोन की श्रेणी में रखी गईं औद्योगिक इकाइयों मेें अफरा-तफरी मच गई है। सभी ने लामबंद होकर प्रदूषण के लिए रेटिंग तय करने वाले विभाग के खिलाफ प्रदेश सरकार से शिकायत की है।
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कहा है कि उन्हें गलत तरीके से रेड जोन में रखा गया है। पिछले दिनों प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने होजरी इंडस्ट्री को भी रेड जोन में रखते हुए इसकी सूची एनजीटी के सामने रखी थी। जिसमें कहा गया था कि होजरी इंडस्ट्री में प्रयोग किए जाने वाला केमिकल काफी हानिकारक है, इससे गंगा में प्रदूषण हो रहा है।
इसके खिलाफ होजरी इंडस्ट्री एसोसिएशन के पदाधिकारी बलराम नरूला ने एनजीटी चेयरमैन स्वतंत्र कुमार की चैंबर मीटिंग में अपनी बात रखी थी। गुरुवार को होजरी इंडस्ट्री एसोसिएशन के पदाधिकारी, मुख्य सचिव आलोक रंजन से भी मिलने गए थे। शुक्रवार को महानगर आए उद्योग मंत्री नितिन अग्रवाल से भी मिलकर इसकी शिकायत की है।
यहां झलक दिखा बिठूर को रवाना यात्रा
गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के साथ-साथ अब उसके किनारे बसी सांस्कृतिक धरोहर से भी लोगों को रूबरू कराने के लिए केंद्र सरकार ने अभियान शुरू किया है।
इसी कड़ी में पूर्वी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र ने गंगा किनारे बसे प्रमुख शहरों के लिए गंगा संस्कृति यात्रा निकाली है। शुक्रवार को यह यात्रा महानगर पहुंची। इस दौरान परमट घाट पर केंद्र से जुड़े लोक कलाकारों ने अलग अलग प्रस्तुति से लोगों को भाव विभोर किया।
केंद्र के निदेशक डॉ. ओमप्रकाश भारती ने बताया कि सांस्कृतिक यात्रा 14 फरवरी को डबरानी गंगोत्री से शुरू हुई थी। जो हरिद्वार होते हुए कानपुर पहुंची है। यहां से 20 को बिठूर पहुंचेगी। इसके बाद कन्नौज, फर्रुखाबाद से इलाहाबाद, वाराणसी, बिहार होते हुए गंगा सागर पर समाप्त होगी।
पूरी यात्रा के दौरान केंद्र के कलाकार नाटिका, नृत्य के जरिए गंगा किनारे की स्थानीय संस्कृति के साथ साथ युवाओं में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, गंगा सुरक्षा और उसकी निर्मलता बचाने के लिए लोगों को जागरूक करते हैं। इन प्रस्तुतियों को लोक कलाओं के माध्यम से दर्शाया जाता है। यह आयोजन कुल 262 गंगा किनारे स्थानों पर होगा।
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पता चला है कि इस सर्वे में यह देखा जाएगा कि जिन इकाइयों को रेड जोन में शामिल किया गया है, उनकी वास्तविकता क्या है। ऐसा तो नहीं है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उन्हें जबरन इस श्रेणी में रखा हुआ है। दो दिन पहले एनजीटी ने गंगा प्रदूषण मसले पर सुनवाई के दौरान जारी नोटिस में पर्यावरण मंत्रालय और वन विभाग से कहा था, कि उन्होंने किस आधार पर औद्योगिक इकाइयों को रेड जोन में रखा है।
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यदि यह इकाइयां लगातार प्रदूषण फैला रही हैं, तो इनको बंद क्यों न कर दिया जाए। एनजीटी के इस नोटिस के बाद रेड जोन की श्रेणी में रखी गईं औद्योगिक इकाइयों मेें अफरा-तफरी मच गई है। सभी ने लामबंद होकर प्रदूषण के लिए रेटिंग तय करने वाले विभाग के खिलाफ प्रदेश सरकार से शिकायत की है।
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कहा है कि उन्हें गलत तरीके से रेड जोन में रखा गया है। पिछले दिनों प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने होजरी इंडस्ट्री को भी रेड जोन में रखते हुए इसकी सूची एनजीटी के सामने रखी थी। जिसमें कहा गया था कि होजरी इंडस्ट्री में प्रयोग किए जाने वाला केमिकल काफी हानिकारक है, इससे गंगा में प्रदूषण हो रहा है।
इसके खिलाफ होजरी इंडस्ट्री एसोसिएशन के पदाधिकारी बलराम नरूला ने एनजीटी चेयरमैन स्वतंत्र कुमार की चैंबर मीटिंग में अपनी बात रखी थी। गुरुवार को होजरी इंडस्ट्री एसोसिएशन के पदाधिकारी, मुख्य सचिव आलोक रंजन से भी मिलने गए थे। शुक्रवार को महानगर आए उद्योग मंत्री नितिन अग्रवाल से भी मिलकर इसकी शिकायत की है।
यहां झलक दिखा बिठूर को रवाना यात्रा
गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के साथ-साथ अब उसके किनारे बसी सांस्कृतिक धरोहर से भी लोगों को रूबरू कराने के लिए केंद्र सरकार ने अभियान शुरू किया है।
इसी कड़ी में पूर्वी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र ने गंगा किनारे बसे प्रमुख शहरों के लिए गंगा संस्कृति यात्रा निकाली है। शुक्रवार को यह यात्रा महानगर पहुंची। इस दौरान परमट घाट पर केंद्र से जुड़े लोक कलाकारों ने अलग अलग प्रस्तुति से लोगों को भाव विभोर किया।
केंद्र के निदेशक डॉ. ओमप्रकाश भारती ने बताया कि सांस्कृतिक यात्रा 14 फरवरी को डबरानी गंगोत्री से शुरू हुई थी। जो हरिद्वार होते हुए कानपुर पहुंची है। यहां से 20 को बिठूर पहुंचेगी। इसके बाद कन्नौज, फर्रुखाबाद से इलाहाबाद, वाराणसी, बिहार होते हुए गंगा सागर पर समाप्त होगी।
पूरी यात्रा के दौरान केंद्र के कलाकार नाटिका, नृत्य के जरिए गंगा किनारे की स्थानीय संस्कृति के साथ साथ युवाओं में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, गंगा सुरक्षा और उसकी निर्मलता बचाने के लिए लोगों को जागरूक करते हैं। इन प्रस्तुतियों को लोक कलाओं के माध्यम से दर्शाया जाता है। यह आयोजन कुल 262 गंगा किनारे स्थानों पर होगा।