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आपकी शिकायतों पर थाने में नहीं होगी हीलाहवाली, पुलिस अधिकारी फोन कर पूछेंगे, कार्रवाई हुई कि नहीं

Sat, 19 Jan 2019 12:46 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 19 Jan 2019 12:46 PM IST
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Now police officer will call and ask any action has taken place or not
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एडीजी, आईजी, एसपी और सीओ कार्यालयों में पहुंचने वाली शिकायतों पर अब पुलिस फीडबैक लेगी। पुलिस अधिकारी पीड़ित को फोन कर पूछेंगे कि क्षेत्रीय थाने की पुलिस ने कार्रवाई की या नहीं। एडीजी अविनाश चंद्र ने कानपुर सहित सभी जोनों के पुलिस कप्तानों को इसके लिए निर्देश दिए हैं। आदेश के बावजूद अगर स्थानीय पुलिस ने लापरवाही बरती तो अफसर नपेंगे। 
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एडीजी ने बताया कि जब किसी मामले में स्थानीय थाने की पुलिस कार्रवाई नहीं करती है तो पीड़ित एसपी ऑफिस से लेकर आईजी और एडीजी कार्यालय तक पहुंचता है। बहुत बार आदेश के बाद भी थाने की पुलिस लापरवाही बरतती है।
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इसलिए ये नई व्यवस्था लागू की गई है। इसमें जो शिकायत जिन दफ्तरों में पहुंचेगी, वहां के अधिकारी तय समय के भीतर पीड़ित से संपर्क कर जानेंगे कि कार्रवाई हुई है कि नहीं।
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एसपी, सीओ लेंगे फीडबैक  
कानपुर जोन में कानपुर, उरई, जालौन, औरैया, इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद व कानपुर देहात जिलों के साथ झांसी रेंज हैं। एडीजी के मुताबिक, इन सभी जिलों में पीड़ित पहले सीओ और फिर एसपी कार्यालय में शिकायत करते हैं। इन दोनों अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि जिन थानों की शिकायतें हैं, उनके थानेदारों को कार्रवाई के लिए आदेश दें। साथ ही फीडबैक भी लें। अगर थानेदार लापरवाही बरतता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करें।

वूमेन पावर लाइन में है यह व्यवस्था 
अभी तक  सिर्फ वूमेन पावर लाइन ‘1090’ में फीडबैक लेने की व्यवस्था है। जो महिलाएं पावर लाइन में शिकायत दर्ज करवाती हैं, कार्रवाई के बाद पुलिसकर्मी उनसे फोन पर फीडबैक लेते हैं। अगर पीड़ित की समस्या का हल नहीं होता है तो आरोपी के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की जाती है।

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दो साल पुराने एनसीआर मामलों की होगी जांच 
एडीजी ने बताया कि अक्सर बड़ी घटनाओं में पता चलता है कि दोनों पक्षों में पहले से ही विवाद थे। पुलिस केवल एनसीआर दर्ज कर मामला रफा-दफा कर देती है। अब पिछले दो सालों में दर्ज हुईं एनसीआर की जांच शुरू की जाएगी। इसमें दोनों पक्षों को बुलाकर यथास्थिति देखी जाएगी। अगर दोनों के बीच विवाद बढ़ा होगा तो पुलिस उनकी काउंसलिंग कराएंगी। साथ ही समझा-बुझाकर शंात करवाने का प्रयास करेगी। अन्यथा मुकदमा दर्जकर कार्रवाई करेगी।

अभी तक शिकायत होने पर स्थानीय थाने की पुलिस जांच रिपोर्ट देती थी। कई बार पता चला कि पीड़ित की समस्या पर कोई कार्रवाई ही नहीं की गई। इसलिए अब थानों की पुलिस की जांच रिपोर्ट छोड़ सीधे पीड़ित से ही पूछा जाएगा कि  कार्रवाई हुई कि नहीं।
- अविनाश चंद्र, एडीजी कानपुर जोन
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