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Kanpur News: न दाग, न बड़ा चीरा, हैलट में थ्रीडी तकनीक से पहली सफल सर्जरी
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कानपुर। हैलट में गुरुवार को पहली बार अत्याधुनिक थ्रीडी तकनीक से 21 वर्षीय युवती के गॉल ब्लैडर का ऑपरेशन किया गया। इस कॉस्मेटिक लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी सर्जरी (कम चीर-फाड़ वाली सर्जरी) को पूरी तरह सफल बताया जा रहा है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला के नेतृत्व में यह ऑपरेशन हुआ। आम तौर पर गॉल ब्लैडर की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में पेट पर चार पोर्ट लगाए जाते हैं। इनके निशान लंबे समय तक दिखाई देते हैं। मरीज की कम आयु और सौंदर्यात्मक आवश्यकताओं को देखते हुए विशेष तीन-पोर्ट पद्धति अपनाई गई। इस तकनीक में एक कट नाभि और दो छोटे कट उसके नीचे लगाए गए। दावा है कि इससे ऑपरेशन के बाद शरीर पर बाहरी निशान लगभग अदृश्य रहेंगे। डॉक्टरों के अनुसार कम कट से सर्जरी करना तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण होता है। इसमें अत्यधिक सटीकता व समन्वय की आवश्यकता होती है।
कॉलेज प्रशासन ने इस सफलता को सरकारी मेडिकल संस्थानों में विश्वस्तरीय उपचार का प्रमाण बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि न्यूनतम चीर-फाड़ वाली एवं कॉस्मेटिक सर्जरी के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करेगी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और मरीज की स्थिति संतोषजनक है।
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सर्जिकल टीम में डॉ. अभिषेक गोंड, डॉ. दुर्गेश तिवारी, डॉ. शशांक खंडेलवाल, डॉ. अच्युत आनंद त्रिपाठी, डॉ. हर्षित तिवारी, डॉ. सात्विक सिंह और डॉ. क्षितिज रंजन शामिल रहे। वहीं एनेस्थीसिया टीम में डॉ. हिना, डॉ. शिवानी, डॉ. मुकेश, डॉ. स्वर्णिमा स्वर्णिम और डॉ. तेसु की शामिल रहे।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला के नेतृत्व में यह ऑपरेशन हुआ। आम तौर पर गॉल ब्लैडर की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में पेट पर चार पोर्ट लगाए जाते हैं। इनके निशान लंबे समय तक दिखाई देते हैं। मरीज की कम आयु और सौंदर्यात्मक आवश्यकताओं को देखते हुए विशेष तीन-पोर्ट पद्धति अपनाई गई। इस तकनीक में एक कट नाभि और दो छोटे कट उसके नीचे लगाए गए। दावा है कि इससे ऑपरेशन के बाद शरीर पर बाहरी निशान लगभग अदृश्य रहेंगे। डॉक्टरों के अनुसार कम कट से सर्जरी करना तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण होता है। इसमें अत्यधिक सटीकता व समन्वय की आवश्यकता होती है।
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कॉलेज प्रशासन ने इस सफलता को सरकारी मेडिकल संस्थानों में विश्वस्तरीय उपचार का प्रमाण बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि न्यूनतम चीर-फाड़ वाली एवं कॉस्मेटिक सर्जरी के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करेगी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और मरीज की स्थिति संतोषजनक है।
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सर्जिकल टीम में डॉ. अभिषेक गोंड, डॉ. दुर्गेश तिवारी, डॉ. शशांक खंडेलवाल, डॉ. अच्युत आनंद त्रिपाठी, डॉ. हर्षित तिवारी, डॉ. सात्विक सिंह और डॉ. क्षितिज रंजन शामिल रहे। वहीं एनेस्थीसिया टीम में डॉ. हिना, डॉ. शिवानी, डॉ. मुकेश, डॉ. स्वर्णिमा स्वर्णिम और डॉ. तेसु की शामिल रहे।