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खास खबर: ‘न रास्ता, न बिजली और न पानी’, पांच साल से स्कूल नहीं गए बच्चे, मूलभूत सुविधाओं को तरस रहा एकलव्य नगर

Wed, 07 Oct 2026 10:43 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया Published by: Himanshu Awasthi Updated Wed, 07 Oct 2026 10:43 AM IST
सार

Auraiya News: बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से महज 100 मीटर दूर बसा  एकलव्य नगर बसावट के पांच साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। बाढ़ प्रभावितों को दिए गए 91 पट्टों में से सुविधाओं के अभाव में केवल 30 परिवार ही यहां झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। बस्ती के करीब 100 बच्चे पिछले पांच वर्षों से स्कूल नहीं जा सके हैं।

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No road electricity water children havent attended school for five years Eklavya Nagar deprived of amenities
लोगों से जानकारी लेतीं पूर्व ब्लाॅक प्रमुख सुमन दिवाकर - फोटो : amar ujala

विस्तार

औरैया जिले में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से महज 100 मीटर दूर नौरी के पास बसा एकलव्य नगर पांच साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं की राह देख रहा है। जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावितों को राहत देने के उद्देश्य से यहां 91 पट्टे जारी किए थे, लेकिन सुविधाओं के अभाव में इनमें से केवल 30 परिवार ही यहां रहने का साहस जुटा पाए हैं। बस्ती की कुल आबादी करीब 400 है। इनमें करीब 100 बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले पांच वर्षों से स्कूल का मुंह तक नहीं देखा है। एकलव्य नगर एक्सप्रेस-वे से भले ही महज 100 मीटर दूर हो।

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लेकिन मुख्य मार्ग से सीधा और सुगम संपर्क न होने के कारण ग्रामीणों को औरैया आने-जाने के लिए करीब 15 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। रोजमर्रा के कामकाज, जरूरी सामान की खरीदारी और अन्य जरूरतों के लिए यह दूरी ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा रही है। बारिश के मौसम में समस्या और गंभीर हो जाती है। थोड़ी सी बारिश होते ही पूरी बस्ती जलमग्न होकर तालाब में तब्दील हो जाती है। इससे आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और अन्य ग्रामीणों को घर से बाहर निकलने में भी परेशानी होती है।

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खंभे खड़े, तार का इंतजार
बिजली के मामले में भी बस्ती की स्थिति बदहाल है। यहां बिजली के खंभे तो गाड़ दिए गए हैं, लेकिन अब तक तार नहीं खींचे गए। ग्रामीणों के लिए खड़े ये पोल अब सुविधा के बजाय अधूरे इंतजाम की तस्वीर बनकर रह गए हैं। बिजली न होने से रात में बस्ती पूरी तरह अंधेरे में डूब जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक आसपास जंगल होने के कारण विषैले जीवों और जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिजन चिंतित रहते हैं और कई बार रात में जागकर पहरा देना पड़ता है। पेयजल की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। करीब 400 की आबादी वाली बस्ती केवल तीन हैंडपंपों पर निर्भर है।

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जंगल के रास्ते स्कूल भेजना मुश्किल
बस्ती के बच्चों की पढ़ाई भी सुविधाओं के अभाव में प्रभावित है। ग्रामीणों ने बताया कि यहां से स्कूलों की दूरी तीन से पांच किलोमीटर तक है। रास्ते में जंगल पड़ने के कारण छोटे बच्चों को अकेले स्कूल भेजना जोखिमभरा है। जंगली जानवरों के हमले की आशंका के चलते अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से बचते हैं। ग्रामीण सरनाम सिंह और गुड्डू ने बताया कि दासपुर का विद्यालय करीब पांच किलोमीटर दूर है, जबकि जगतपुर और मई के विद्यालय लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर हैं। ऐसे में छोटे बच्चों के लिए रोज स्कूल जाना आसान नहीं है। यही वजह है कि करीब 100 बच्चे पिछले पांच वर्षों से शिक्षा से दूर हैं।

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जनप्रतिनिधियों के दौरों के बाद भी हालात जस के तस
ग्रामीणों का कहना है कि बस्ती की समस्याओं को देखने के लिए कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह तीन बार और सदर विधायक गुड़िया कठेरिया दो बार यहां का दौरा कर चुकी हैं। इसके बावजूद बस्ती की स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया। ग्रामीणों को अब भी सड़क, बिजली, पेयजल और बच्चों की शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों का इंतजार है। समाजवादी पार्टी से एरवाकटरा की पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुमन दिवाकर ने बताया कि एकलव्य नगर के एक युवक की असमय मौत के बाद वह बस्ती पहुंची थीं। वहां के हालात देखकर वह दंग रह गईं। उन्होंने कहा कि यहां रहने वाले परिवार बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भी इस मुद्दे को उठाया और जिला प्रशासन से इन परिवारों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।

  • हमारे बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है। पांच साल से बच्चे बिना पढ़ाई के घर पर बैठे हैं। न रास्ता है और न स्कूल। बारिश में पानी भर जाने से घर से निकलना भी मुश्किल हो जाता है।  -पूजा देवी
  • बिजली के खंभे खड़े कर दिए गए हैं लेकिन उनमें बिजली की सप्लाई का तार ही नहीं है। रात में अंधेरे में डर बना रहता है कि कहीं जंगली जानवर बच्चों पर हमला न कर दें।  -प्रियंका
  • प्रशासन ने हमें यहां बसा तो दिया, लेकिन सुविधाएं देना भूल गया। एक्सप्रेस-वे पास में ही है फिर भी रास्ता न होने से हमें 15 किलोमीटर का चक्कर काटकर औरैया जाना पड़ता है।  -धर्मेंद्र
  • 91 पट्टे दिए गए थे, लेकिन सुविधाओं के अभाव में सिर्फ 30 परिवार ही रह रहे हैं। अगर पानी, रास्ता और बिजली ही नहीं मिलेगी तो इंसान कैसे रहेगा क्या, जनप्रतिनिधि आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं।  -मोहर सिंह

बिजनेस प्लान के तहत करीब 24 लाख रुपये की लागत से गांव में बिजली पहुंचाई जाएगी। आनेपुर से करीब 12 किलोमीटर लंबी लाइन खींचकर यहां तक बिजली लाई जानी है। चालू माह के अंत तक बस्ती में बिजली आपूर्ति शुरू होने की पूरी संभावना है।  -शशांक, अधिशासी अभियंता, विद्युत निगम

नौरी के पासमजरा गांव तक की सड़क का काम यूपीडी को कराना है। इसके लिए एडीएम स्तर से पत्राचार किया गया है। स्कूल दूर होने की समस्या को लेकर बीएसए से वार्ता की जाएगी।  -ब्रह्मानंद, एसडीएम, सदर

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