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तंत्र की खामी: नौ माह की गर्भवती को बना दिया द्वितीय मतदान अधिकारी, प्रशिक्षण से पहले बच्चे को दिया जन्म

Wed, 01 May 2024 09:35 AM IST
हिमांशु अवस्थी पुनीत द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
पुनीत द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 01 May 2024 09:35 AM IST
सार

Kanpur News: चुनावी तंत्र की खामी की वजह से ड्यूटी कटवाने के लिए गर्भवती, दिव्यांग और अस्वस्थ कर्मचारी परेशान हो रहे हैं। कार्मिक सीडीओ सुधीर कुमार ने बताया कि मेडिकल बोर्ड ने जिनकी संस्तुति की है और जिनकी समस्या सही है। उन्हें चुनाव ड्यूटी में नहीं लगाया जाएगा।

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Nine months pregnant woman made second polling officer, gave birth to child before training
रोजी शाहीन और नवजात - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर के चार केस यह बताने के लिए काफी हैं कि चुनावी सिस्टम की अपनी कमियों की वजह से परेशानी से जूझ रहे कर्मचारियों को और ज्यादा मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। 13 मई को होने वाले मतदान को कराने के लिए कर्मचारियों की रेंडमाइजेशन के आधार पर लग रही ड्यूटी में गर्भवती, दिव्यांग और ह्रदय रोगियों को भी चुनावी जिम्मेदारी थमाई जा रही है।

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जब कर्मचारी ड्यूटी कटवाने के लिए आवेदन कर रहे तो उन्हें मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने को भेज दिया जा रहा लेकिन मेडिकल बोर्ड की संस्तुति के बाद भी ड्यूटी नहीं काटी जा रही। नतीजा यह है कि अब प्रशिक्षण की तारीख के बीच कर्मचारियों को समझ नहीं आ रहा है कि वह इस समस्या से कैसे निपटें।

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केस: एक
मनीष बाजपेई आंखों से 70 फीसदी दिव्यांग हैं। पार्टी 1711 में उनकी डयूटी लगी है। ड्यूटी कटवाने के लिए आवेदन किया तो मेडिकल बोर्ड ने परेशानी वाजिब मानी, लेकिन ड्यूटी नहीं कटी।

केस: दो
आकांक्षा देवी का 15 मार्च को एक्सीडेंट हुआ था। हादसे के बाद उनके दाहिने पैर में फ्रैक्चर है। चलने में असमर्थ आकांक्षा को अब पी टू बनाया गया है।

केस:तीन
सहायक अध्यापक गुंजन आदित्य छह माह की गर्भवती हैं। परीक्षण के बाद मेडिकल बोर्ड ने ड्यूटी काटने की संस्तुति की लेकिन ड्यूटी नहीं कटी। उन्हें बिठूर में पीटू बनाया गया है।

केस: चार
राम खेलावन को पीठासीन बनाया गया है। 6 अप्रैल को हुए एक्सीडेंट में उनका पैर टूट गया है। इन सभी की हालत को देखते हूए मेडिकल बोर्ड ने चुनाव ड्यूटी काटने की संस्तुति की थी।

संस्तुति के बाद भी लगी ड्यूटी, गर्भवती ने जन्म दिया बच्चा
बैंक ऑफ इंडिया की किदवईनगर शाखा में सहायक प्रबंधक के पद पर तैनात रोजी शाहीन गर्भवती थी। आठ से 12 अप्रैल के बीच चले पहले चरण के प्रशिक्षण में जब उनका नाम आया तो उन्होंने ड्यूटी काटने के लिए सीडीओ कार्यालय में प्रार्थना पत्र दिया। इस पर उन्हें जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा बनाए गए मेडिकल बोर्ड के पास भेज दिया गया।

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इसके बावजूद ड्यूटी नहीं काटी गई
बोर्ड ने परीक्षण कर करीब नौ महीने की गर्भवती रोजी की ड्यूटी काटने की संस्तुति कर दी। बावजूद इसके उनकी ड्यूटी नहीं काटी गई। 14 अप्रैल को उन्होंने हरजिंदरनगर के एक नर्सिंग होम में बच्चे को जन्म दिया। इस बीच अब उनकी कैंट विधानसभाक्षेत्र में द्वितीय मतदान अधिकारी के तौर पर ड्यूटी लगा दी गई है।

592 की ड्यूटी काटने की संस्तुति
चुनाव ड्यूटी से अपना नाम हटवाने के लिए 1057 लोगों ने आवेदन किया। इन सभी को मेडिकल बोर्ड के सामने अपने मेडिकल सर्टिफिकेट के साथ पेश होना पड़ा। परीक्षण के बाद इनमें से 592 लोगों की ड्यूटी काटने की बोर्ड ने संस्तुति कर दी। हालांकि इनमें से 80 फीसदी की ड्यूटी नहीं काटी गई है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
चुनावी ड्यूटी का जिम्मा संभाल रहे कार्मिक सीडीओ सुधीर कुमार ने बताया कि मेडिकल बोर्ड ने जिनकी संस्तुति की है और जिनकी समस्या सही है उन्हें चुनाव ड्यूटी में नहीं लगाया जाएगा। उनकी ड्यूटी काट दी जाएगी।

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