निखत-अब्बास जेल कांड: डिप्टी जेलर और वार्डर ने कबूली अपनी भूमिका, नगदी-महंगे गिफ्ट लेने वालों के उगले नाम
विधायक अब्बास और उसकी पत्नी निखत के मिलने के मामले में डिप्टी जेलर और वार्डर ने कड़ाई के बाद अपनी भूमिका कबूली है। उन्होंने नगदी और मंहगे गिफ्ट में बडे़ अधिकारियों व एक वार्डर का नाम लिया है।
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चित्रकूट जेल प्रकरण में एसआईटी के सामने एक और डिप्टी जेलर व एक वार्डर पेश हुए। कई घंटे की पूछताछ के बाद दोनों ने स्वीकार किया कि नियम विरूद्ध जेल में हुए इस कांड की जानकारी है, लेकिन अपनी भूमिका को लेकर बचाव करते रहे।
चर्चित वार्डर जगमोहन को इनके सामने बैठाकर सवाल किए गए। बताया गया कि डिप्टी जेलर ने इस चर्चित वार्डर की भूमिका को सबसे संदिग्ध बताया है। उधर दो दिन की पूछताछ के बाद जेल अधीक्षक व जेलर को फिलहाल तीन दिन के लिए उनके संबद्ध स्थल भेज दिया गया है।
दस फरवरी को जिला जेल में बंदी विधायक अब्बास अंसारी व उसकी पत्नी निखत बानो से गैरकानूनी तरीके से होने वाली मुलाकातों के मामले में नामजद डिप्टी जेलर पियुष पांडेय व एक अन्य वार्डर शनिवार को जांच टीम के सामने पेश हुए।
जिला परिसर में हुई दोनों से पूछताछ
एसआईटी की नोटिस पर शाम को जिला मुख्यालय पहुंचे दोनों को पुलिस अधिकारियों ने पहले कोतवाली फिर जिला जेल परिसर में ले जाकर पूछताछ की। छह घंटे की पूछताछ के दौरान सबसे ज्यादा यही पूछा गया कि इस कांड में किस अधिकारी व कर्मचारी की मुख्य भूमिका रही।
बंदरबांट में शामिल अधिकारियों के लिए नाम
किससे कितने रुपये व गिफ्ट लिए गए जेल में किसके बीच में इसका बंटवारा हुआ। सूत्रों के अनुसार इन दोनों ने माना है कि नगदी व गिफ्ट का लेनदेन तो हुआ है। इसमें बडे अधिकारी व एक वार्डर की मुख्य भूमिका है। खुद को मिले हिस्से और जेल आने जाने वालों से संपर्क के सवाल पर टालमटोल किया।
बयानों को किया गया है रिकार्ड
इसके बाद में जांच टीम ने बडे अधिकारियों व पहले पकड़े गए लोगों के वीडियो फुटेज व बयान सुनाए, तो काफी कुछ कबूल भी लिया है। उधर दो दिन की पूछताछ के बाद शनिवार को निलंबित जेल अधीक्षक अशोक सागर व जेलर संतोष कुमार के बयानों को रिकार्ड करने के बाद जांच टीम ने फिलहाल उन्हें गिरफ्तार नहीं किया है।
सारे सबूत मिलने पर होंगे गिरफ्तार
उन्हें संबद्ध वाले स्थानों पर ही जाने के लिए कहा गया है। निर्देश दिए गए कि तीन दिन के अंदर अन्य सभी के बयानों की कड़ी मिलाकर, जो चेन तैयार होगी उसके बाद इन्हें फिर से जांच टीम के सामने पेश होना पड़ेगा। सारे सबूत मिलने पर गिरफ्तार भी किया जा सकता है। गौरतलब है कि इस प्रकरण में अबतक पांच लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। इस घटना में 8 लोग नामजद हुए थे।
अन्य डयूटी वाले अधिकारी कर्मचारियों से पूछताछ
जेल प्रकरण में नामजदों के अलावा डिप्टी जेलर चंद्रकला की भूमिका सामने आने के बाद जांच टीम व एसटीएफ अधिक सतर्क हो गई है। माना जा रहा है कि ऐसे और भी कई अधिकारी कर्मचारी हो सकते हैं। उधर घटना को लेकर डीआईजी जेल की रिपोर्ट को लेकर भी सवाल खडे किए जा रहे हैं, क्योंकि उनकी रिपोर्ट में यह नाम सामने नहीं आए थे।
दस अधिकारियों की बनी है लिस्ट
इसके अलावा जांच टीम ने जेल के नामजद अधिकारियों के अलावा तीन अन्य अधिकारी व सुरक्षाकर्मियों की भी भूमिका की जांच की है। इसे लेकर डयूटी पर मौजूद इनके मोबाइल डाटा व गतिविधियों का रिकार्ड तलाशा है। जनवरी व 10 फरवरी तक के बीच जेल में खासकर विधायक अब्बास व जेल अधिकारियों के मुलाकाती कक्ष तक में क्रमवार डयूटी पर तैनात रहे अन्य अधिकारियें व वार्डरों से पूछताछ शुरु की है। ऐसे दस और अधिकारी कर्मचारी की लिस्ट बनाई गई है।