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एनजीटी को सीटीपी का प्लान देगा शासन
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Sun, 31 Jan 2016 02:05 AM IST
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गंगा में टेनरियों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए शासन ने जाजमऊ में बनाए गए 27 एमएलडी की क्षमता वाले सीटीपी (कंबाइंड ट्रीटमेंट प्लांट) को 32 एमएलडी (मिलियन लीटर डेली) की क्षमता का बनाने की योजना तैयार की है।
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मुख्य सचिव के निर्देशन में प्लान तैयार कर लिया गया है। जिसे चार फरवरी को एनजीटी बोर्ड के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। शनिवार को इस संबंध में मुख्य सचिव आलोक रंजन ने टेनरी एसोसिएशन से बैठक भी की। एक फरवरी को संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ योजना पर मुहर लगाने के लिए लखनऊ बुलाया गया है।
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एनजीटी बोर्ड ने पिछले दिनों यूपी सरकार पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि कानपुर में गंगा में टेनरियों का कचरा रोकने के लिए वह ठोस कदम उठाए। साथ में उस पर होने वाले खर्च की जिम्मेदारी भी वहन करे। इस पर मुख्य सचिव से योजना तैयार कर बोर्ड के सामने प्रस्तुत करने को कहा था।
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इस योजना में वर्तमान सीटीपी की क्षमता वृद्िध के साथ संचालन की व्यवस्था भी बनाई है। क्षमता वृद्घि का खर्च प्रदेश सरकार उठाएगी, संचालन का खर्च टेनरी एसोसिएशन। इस योजना पर खर्च करीब 300 करोड़ आएगा। एक फरवरी की बैठक में नगर आयुक्त, जल निगम एमडी को बुलाया है।
नाले टैप करने को डीपीआर तैयार
सुप्रीम कोर्ट से लेकर नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने सीसामऊ सहित सात नालों को टैप करने की डीपीआर बनाई है।162 करोड़ रुपये की इस डीपीआर को राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र को भेजा जा रहा है। सब कुछ समय पर हुआ तो लगभग एक साल में ये नाले टैप हो जाएंगे।
आईआईटी ने खोजी गंगा के लिए ‘संजीवनी’
अंकित कुमार गर्ग
रुड़की। चमड़ा उद्योगों से निकलने वाले कैंसरकारक प्रदूषण के चलते कानपुर में गंगा सबसे अधिक प्रदूषित है। इन उद्योगों पर एनजीटी की तलवार लटकी है। इसी के मद्देनजर उद्योगों को खत्म किए बगैर गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए आईआईटी के वैज्ञानिकों ने नैनो पार्टिकल बेस्ड उत्प्रेरक तैयार किया है। प्रयोग के पहले चरण में इस उत्प्रेरक से प्रदूषण में 60 फीसदी तक की कमी दर्ज की गई।
वैज्ञानिकों के मुताबिक चमड़ा उद्योगों से प्रति मिनट 10 लीटर कैंसर कारक क्रोमियम युक्त प्रदूषित पानी निकलता है। यह पानी सीधे गंगा में प्रवाहित हो रहा है। एसटीपी संयंत्र भी इस जहरीले पानी का शोधन नहीं कर पा रहे हैं। इसी के मद्देनजर आईआईटी रुड़की के रसायन विभाग के वैज्ञानिक डॉ. शिशिर सिन्हा ने एक खास उत्प्रेरक तैयार किया है।
इसे एसटीपी संयंत्र के साथ लगाए जाने पर यह निष्कासित होने वाले जहरीले पानी को शोधित कर देता है। कानपुर के विभिन्न चमड़ा उद्योगों में प्रारंभिक चरण के दौरान यह प्रयोगों पर लगभग खरा उतरा है।
वैज्ञानिकों की मानें तो जल्द ही यह उत्प्रेरक प्रदूषण को कम करने में कामयाब होगा। डॉ. सिन्हा ने बताया कि उत्प्रेरक के प्रयोग के बाद कानपुर के एक उद्योग में 17,000 पीपीएम प्रदूषण की मात्रा 8,000 पीपीएम तक कम हो गई। खास बात यह है कि उत्प्रेरक के प्रयोग के दौरान एकत्र होनी वाली गाद को रिसाइकल कर फिर से चमड़ा बनाया जा सकता है।
ऑक्सफोर्ड टेनर्स की जांच के आदेश
विवेक मिश्रा
नई दिल्ली/कानपुर। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल) ने उन्नाव के बंथर में स्थापित चमड़ा औद्योगिक इकाई आक्सफोर्ड टेनर्स की जांच के आदेश दिए हैं। आक्सफोर्ड औद्योगिक इकाई से प्रदूषण होने की शिकायत पर इसके संचालन पर रोक लगा दी गई थी। तभी से यह बंद है।
आक्सफोर्ड टेनर्स ने कुछ दिनों पहले एनजीटी बोर्ड के सामने शिकायत मांग रखी थी कि उसने टेनरी से निकलने वाले कचरे के प्रदूषण को नियंत्रित कर लिया है। इसलिए अब इकाई को संचालित करने का आदेश जारी किया जाए।
इस आवेदन पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश दिया कि आक्सफोर्ड इकाई की पूरी जांच की जाए, उसकी वीडियोग्राफी की जाए।
इसकी रिपोर्ट एनजीटी को भेजी जाए। उसके बाद तय होगा कि टेनरी संचालित करने का ओदश जारी करना है या नहीं। कुछ समय पहले टेनर्स ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समक्ष अपनी शिकायत रखी थी और उसने इकाई के संचालन की अनुमति मांगी थी, लेकिन अभी तक मामला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में लंबित है।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने ऑक्सफोर्ड टेनर्स की ओर से दाखिल याचिका पर यह निर्देश दिया है। इंडस्ट्री के संचालन पर रोक के बाद उसने अपने प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित उपकरणों को अपग्रेड किया था।
बोर्ड ने इस पर फैसला सुनाते हुए निर्देश दिया है कि जांच के दौरान आईआईटी रूड़की, आईआईटी कानपुर, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बीएचयू में से किसी एक संस्थान के प्रोफेसर को भी शामिल करने के लिए कहा गया है।
कानपुर टेनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी डा. फि रोज आलम ने बताया कि कोई भी टेनरी अपने यहां जांच के लिए पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कहती है, यदि उस पर सुनवाई नहीं होती है तो वह एनजीटी के पास जाती है।