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गठबंधन में अपनी ढपली अपना राग जैसा माहौल, अभी भी एक नहीं साइकिल और हाथी की राहें
Wed, 03 Apr 2019 02:59 PM IST
शिखा पांडेय
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 03 Apr 2019 02:59 PM IST
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मायावती और अखिलेश (फाइल फोटो)
कानपुर नगर सीट के लिए सपा-बसपा गठबंधन में अपनी ढपली, अपना राग सरीखा माहौल जान पड़ रहा है। प्रत्याशी घोषित होने के बाद भी साइकिल और हाथी की राहें एक नहीं हो पा रही हैं।
दरअसल नगर सीट के लिए दोनों दलों की ओर से अभी तक एक भी संयुक्त सम्मेलन नहीं किया गया है। बसपा नेता सपाइयों को भाव नहीं दे रहे तो सपाई बसपाइयों के साथ खुद से तालमेल बैठाने के कोई जतन करते नजर नहीं आ रहे।
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दरअसल नगर सीट के लिए दोनों दलों की ओर से अभी तक एक भी संयुक्त सम्मेलन नहीं किया गया है। बसपा नेता सपाइयों को भाव नहीं दे रहे तो सपाई बसपाइयों के साथ खुद से तालमेल बैठाने के कोई जतन करते नजर नहीं आ रहे।
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सपा बसपा गठबंधन में अकबरपुर सीट बसपा के खाते में और कानपुर नगर सीट सपा के खाते में आई है। अपनी ढपली, अपना राग सरीखे माहौल को इस वजह से भी बल मिला है, क्योंकि अभी तक बसपा का पूरा फोकस सिर्फ अकबरपुर सीट पर ही दिखा है।
बसपा यहां पर खुद को मजबूत मानती है। हालांकि शुरुआत में बसपा यहां भी अपने दम पर ही प्रचार करती नजर आई थी। एकजुटता न होने की खबरें मीडिया में आने और सपाइयों की नाराजगी के बाद कुछेक सम्मेलन यहां संयुक्त रूप से हुए।
बसपा यहां पर खुद को मजबूत मानती है। हालांकि शुरुआत में बसपा यहां भी अपने दम पर ही प्रचार करती नजर आई थी। एकजुटता न होने की खबरें मीडिया में आने और सपाइयों की नाराजगी के बाद कुछेक सम्मेलन यहां संयुक्त रूप से हुए।
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अब यही स्थिति नगर सीट में देखने को मिल रही है। सपा बसपा गठबंधन के बाद से नगर सीट पर दोनों दलों के बड़े नेता और कार्यकर्ता एक बार भी एक साथ नहीं आए। पिछले दिनों बसपा के जोनल इंचार्ज ने कानपुर जिले की सभी 10 विधानसभा क्षेत्रों के पदाधिकारियों के साथ एक बैठक भी की थी।
इसमें सपा नेताओं को नहीं बुलाया गया था। अभी तक माना जा रहा था कि सपा से प्रत्याशी घोषित न होने की वजह से दोनों दलों का तालमेल नहीं बन पा रहा है लेकिन अब प्रत्याशी भी घोषित और नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
इसमें सपा नेताओं को नहीं बुलाया गया था। अभी तक माना जा रहा था कि सपा से प्रत्याशी घोषित न होने की वजह से दोनों दलों का तालमेल नहीं बन पा रहा है लेकिन अब प्रत्याशी भी घोषित और नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
बावजूद इसके नगर सीट के लिए संयुक्त सम्मेलनों की रणनीति नहीं बन पाई। चर्चा तो यहां तक है कि बसपाई सपा प्रत्याशी को लेकर खुश नहीं हैं। उधर कई दावेदार टिकट न मिल पाने की वजह से भी अलग अलग धड़ों में बंटे नजर आ रहे हैं।
बसपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी मानते हैं कि संयुक्त सम्मेलन में देरी हुई है लेकिन भविष्य के लिए प्लान तैयार है। उसे रणनीति के तहत अमल में लाया जाएगा।
बसपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी मानते हैं कि संयुक्त सम्मेलन में देरी हुई है लेकिन भविष्य के लिए प्लान तैयार है। उसे रणनीति के तहत अमल में लाया जाएगा।