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पुराने कपड़ों को अब फेंकने की जरूरत नहीं होगी, खोजा गया बिल्डिंग मटेरियल बनाने का तरीका

Fri, 28 Dec 2018 01:07 PM IST
gaurav gaurav यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: gaurav gaurav Updated Fri, 28 Dec 2018 01:07 PM IST
सार

- आईआईटी कानपुर से 1986 में एमएमई ब्रांच से किया है बीटेक 
- रिसर्च के बाद सामने आया कि पुराने कपड़ों से तैयार किया जा सकता है बिल्डिंग मटेरियल

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New technique of making building material from old clothes
प्रोफेसर वीना सहरवाला

विस्तार

पुराने कपड़ों को अब फेंकने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि अब इन्हीं पुराने कपड़ों से नये प्रोडेक्ट बनाने का तरीका एक पूर्व आईआईटीयन ने खोज निकाला है। इसमें फैब्रिक को कैमिकल के जरिए बिल्डिंग मटेरियल में बदला जा सकेगा। इतना ही नहीं, इससे लकड़ी, स्टोन और सेरामेक भी तैयार किया जा सकेगा। मिट्टी या किसी अन्य चीज से जमीन के खाली हिस्से को भरने की जगह कपड़ों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह खोज भारतीय मूल की प्रोफेसर वीना सहजबाला ने की है।
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वे सिडनी की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स में प्रोफेसर हैं और कई वर्षों से रिसर्च कर रही थीं। उन्हें वर्ष 2018 में सिडनी में ही सफलता मिली है। दिल्ली में 11 से 13 दिसंबर के बीच हुई दसवीं ग्रिहा समिट (ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटेट एसिसमेंट) में उन्होंने पुराने कपड़ों से तैयार सेरेमेक प्लेट, स्टोन, वुड के साथ बिल्डिंग मटेरियल के प्रोडेक्ट प्रस्तुत किए थे।कपड़ों में कई ऐसे केमिकल होते हैं जो हवा, पानी और धूप के संपर्क में आते ही रिएक्शन करना शुरू कर देते हैं। रिएक्शन के दौरान बहुत सी मात्रा में टॉक्सिक केमिकल और ग्रीनहाउस गैस निकलती हैं।
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इनमेें से कुछ केमिकल शरीर के लिए बेहद घातक होते हैं। टेक्सटाइल इंडस्ट्री और कपड़ों की वजह से प्रदूषण फैलता है। उन्होंने कहा कि कपड़ा और टेक्सटाइल इंडस्ट्री विश्व में दूसरा सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाला क्षेत्र है। विश्व में दस प्रतिशत कार्बन का उत्सर्जन कपड़ों के वेस्ट से होता है। यह पर्यावरण के लिए बहुत खराब है। इसलिए इन कपड़ों को नए प्रोडेक्ट में बदलना पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए एक नया तरीका है। 
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कैसे कपड़ों से बनेगा बिल्डिंग मटेरियल

New technique of making building material from old clothes
प्रोफेसर वीना सहरवाला
वीना और उनकी टीम ने बिल्डिंग मटेरियल बनाने के लिए सबसे पहले पुराने कपड़ों को भारी मात्रा में एकत्र किया। सबसे पहले कपड़ों से चेन, बटन, बक्कल को हटाया। कॉटन, पॉलिस्टर और नायलान के कपड़ों को अलग किया। इसके बाद उन कपड़ों को मशीन की सहायता से छोटे-छोटे टुकड़ों में काट दिया। इसके बाद कैमिकल की सहायता से कपड़ों को अलग अलग फाइबर कंपोनेंट स्टिक में बदल दिया जाता है। तब उसे मशीनों में डालकर एक उचित तापमान पर सॉलिड पैनल में तब्दील कर दिया जाता है। वीना ने बताया कि शुरुआती रिसर्च के बाद जब हमने एक के बाद एक टेस्ट किए तो ये सॉलिड पैनल मजबूत, जल प्रतिरोधी और आग रोधक बनकर तैयार हुए। कपड़ों से तैयार किए गए इस सॉलिड फाइबर की खासियत है कि इन्हें एक उचित तापमान पर जलाया भी नहीं जा सकता है।

मुंबई निवासी हैं वीना सहजबाला
मुंबई निवासी वीना सहजबाला ने आईआईटी से 1986 में एमएमई (मेटेलर्जिकल एंड मटेरियल इंजीनियरिंग) ब्रांच से बीटेक की पढ़ाई की थी। प्रोफेसर वीना सहजबाला वर्तमान में सिडनी की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स में प्रोफेसर हैं। उन्होंने पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए बहुत काम किया है। इसी कड़ी में उन्होंने कपड़ों से फैलने वाले प्रदूषण को दूर करने के लिए उनसे बिल्डिंग मटेरियल तैयार करने का तरीका खोज निकाला।

वूमन ऑफ द ईयर हैं प्रो. वीना सहजबाला
ऑस्ट्रेलिया की हारपर्स बाजार मैग्जीन ने साल 2018 में उन्हें अपने कवर पेज पर जगह देकर वूमन ऑफ द इयर चुना है। वीना ने बताया कि जब मैं छोटी थी तो मुंबई में कपड़ों को बर्बाद होते हुए देखती थी। कुछ लोग पुराने कपड़ों को गरीबों में भी बांट देते थे। मैं हमेशा सोचती थी कि क्या कपड़ों को भी रिसाइकिल कर के कुछ बनाया जा सकता है। मैं बचपन से इंजीनियरिंग करना चाहती थी और आज मैं सफल हूं।

 
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