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लापरवाही: हैलट और उर्सला में नहीं सीटी जांच, कोविड जांच में जरूरी है सीटी स्कैन

Mon, 24 Jan 2022 09:51 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Mon, 24 Jan 2022 09:51 AM IST
सार

हैलट में इन मशीनों के लगते-लगते छह महीने लग जाएंगे। तब तक कोरोना की तीसरी लहर भी निकल जाएगी। कोरोना की जांच में सीटी स्कैन बहुत महत्वपूर्ण है। इससे रोग पकड़ने के साथ ही इलाज में आसानी होती है। सीटी स्कैन न होने से रोगियों की पहले एक्सरे जांच कराई जा रही है।

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Negligence: No CT test in Halat and Ursala, CT scan is necessary in Covid investigation
हैलट अस्पताल - फोटो : Social Media

विस्तार

उत्तर प्रदेश के कानपुर में हैलट और उर्सला में सीटी जांच की व्यवस्था न होने से कोरोना की दूसरी लहर में हायतौबा मच चुकी है। इसके बाद भी शासन कोई सबक नहीं ले रहा है। दूसरी लहर में मची त्रहि-त्रहि के बाद भी अस्पतालों में सीटी स्कैन जांच की व्यवस्था नहीं हो पाई है। कोरोना का संक्रमण सांस की नली से बढ़कर फेफड़ों तक पहुंचने लगा है। शासन ने सीटी और एमआरआई का वादा किया है, लेकिन हैलट में इन मशीनों के लगते-लगते छह महीने लग जाएंगे। तब तक कोरोना की तीसरी लहर भी निकल जाएगी। कोरोना की जांच में सीटी स्कैन बहुत महत्वपूर्ण है। इससे रोग पकड़ने के साथ ही इलाज में आसानी होती है। सीटी स्कैन न होने से रोगियों की पहले एक्सरे जांच कराई जा रही है।
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3-4 बार अवगत कराने के बाद भी शासन लापरवाह

हैलट और कांशीराम के कोविड अस्पतालों में कोरोना के लक्षण वाले रोगी आने लगे हैं। शनिवार देर रात दो रोगी कांशीराम से हैलट शिफ्ट किए गए। इनमें कोरोना के गंभीर लक्षण रहे हैं। एक रोगी के हार्ट में सूजन आ गई और दूसरे के फेफड़ों में पानी भर गया था। दूसरी लहर में भी अधिक वायरल लोड वाले रोगियों की यही स्थिति रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संक्रमण में सीटी स्कैन जांच में सही स्थिति आ जाती है। तीन-चार बार शासन को अवगत कराया गया और प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन व्यवस्था नहीं हो पाई। यहां निजी एजेंसी बेट लीज पर सेंटर चला रही है। सरकार की ओर से व्यवस्था नहीं हो पाई।
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रोगियों को बाहर से जांच करानी पड़ रही जांच

इसी तरह उर्सला का सीटी खराब है। प्रस्ताव शासन में विचाराधीन है। अस्पताल आने वाले रोगियों को बाहर से जांच करानी पड़ रही है। तीसरी लहर का दूसरा चरण बढ़ा तो वायरल लोड बढ़ जाएगा और सीटी स्कैन जांच की जरूरत पड़ेगी। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि 30 करोड़ आवंटित होने वाले हैं। इससे सीटी और एमआरआई दोनों मशीनें लगाई जाएंगी।
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